नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े इलाके को अपनी चपेट में ले लिया. तिब्बत की ओर से पानी और मलबे का तेज बहाव भोटे कोशी नदी के रास्ते रसुवा जिले में पहुंचा और तिमुरे तथा स्याब्रुबेसी होते हुए त्रिशूली नदी में जा मिला. इसके बाद बाढ़ का पानी नुवाकोट, धाडिंग, गोरखा, तनहुन, चितवन और नवलपुर तक पहुंच गया.

Continues below advertisement

नेपाल में अचानक आई बाढ़ ने नेपाल के परिवहन नेटवर्क को भी भारी नुकसान पहुंचाया. करीब 30 मोटरेबल पुल पूरी तरह तबाह हो गए, जबकि लगभग 40 किलोमीटर पक्की सड़क पानी और मलबे की चपेट में आकर नष्ट हो गई. कई जगहों पर सड़कें टूटने और पुल बहने के कारण प्रभावित इलाकों तक पहुंचना मुश्किल हो गया. इससे राहत और बचाव कार्यों के सामने भी बड़ी चुनौती खड़ी हो गई.

त्रिशूली में इतनी तबाही क्यों हुई

Continues below advertisement

त्रिशूली शिकार इसलिए बनी क्योंकि नदी संकरी घाटी में है. उसी घाटी में सड़क, बस्ती, व्यापार मार्ग और जलविद्युत सब एक साथ जमा हो गए थे. ऊपर से आया मलबे वाला सैलाब फैल नहीं पाया, सिर्फ तेज होकर सब कुछ कुचलता चला गया

संकरी और ढलान वाली घाटी

भोटेकोशी–त्रिशूली गॉर्ज बहुत तंग है. पहाड़ खड़े हैं, समतल जगह कम है. ऊपर लेंदे खोला में ग्लेशियर, बर्फ-चट्टान गिरी, अस्थायी बांध बना, फटा. पानी,कीचड़,पत्थर की दीवार नीचे आई. चौड़े मैदान में फैलकर कमजोर हो जाती, यहां ऊर्जा और तेज हो गई. गलछी में त्रिशूली 30 मिनट में करीब 9 मीटर उफान पर आई.

20 साल में घाटी भर दी गई

सैटेलाइट तस्वीरों के मुताबिक रसुवागढ़ी से त्रिशूली तक सड़क, पुल, होटल, कस्टम, ट्रक यार्ड, सबस्टेशन और दर्जनों जलविद्युत परियोजनाए नदी के किनारे ही बन गईं. नदी के पास जगह खत्म हो गई. बाढ़ आने पर भागने या पानी फैलने की गुंजाइश नहीं बची

व्यापार, तीर्थ , बस्ती एक ही रास्ते पर

रसुवागढ़ी चीन सीमा का मुख्य ओवरलैंड रूट है. कैलाश-मानसरोवर यात्री, ट्रक, कस्टम, स्थानीय बाजार (तिमुरे, स्याब्रुबेसी, बेतरावती, त्रिशूली बाजार) सब नदी के साथ-साथ. जुलाई 2025 में भी इसी सिस्टम में ग्लेशियल फ्लड आ चुकी थी, फिर भी किनारे पर बस्तियां और निर्माण जारी रहे.

चेतावनी ऊपर टूट गई

ऊपरी बेसिन के गेज स्टेशन बाढ़ ने पहले ही बहा दिए. अलर्ट नीचे पहुंचा, लेकिन रसुवा और ऊपरी त्रिशूली को समय नहीं मिला. सिस्टम धीरे-धीरे बढ़ते पानी के लिए बना था, यह तो मलबे की दीवार थी.