मिडिल ईस्ट में चल रही जंग में चीन और रूस सीधे तौर पर शामिल नहीं हैं, लेकिन दोनों ही देश ईरान की अप्रत्यक्ष तरीके से मदद कर रहे हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, जहां रूस ईरान को खुफिया जानकारी मुहैया करा रहा है, जिसमें मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य ठिकानों, जहाजों और फाइटर जेट्स की गतिविधियों से जुड़ा डेटा शामिल है, वहीं चीन अपने सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम के जरिए ईरान की सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने में मदद कर रहा है.
थिंक चाइना की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान अब अमेरिका के GPS सिस्टम की बजाय चीन के BeiDou (बीडोउ) सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम का इस्तेमाल कर रहा है, जिससे उसके मिसाइल और ड्रोन हमलों की सटीकता बढ़ गई है. विश्लेषकों का कहना है कि पिछले संघर्षों में इजरायल और उसके सहयोगियों ने इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर तकनीक का इस्तेमाल कर ईरानी ड्रोन और मिसाइलों के GPS सिग्नल को जाम कर दिया था. इससे ईरान के हमले काफी हद तक असफल हो गए थे, लेकिन अब ईरान ने अपनी सैन्य गाइडेंस प्रणाली को बदलते हुए चीन के BeiDou-3 नेटवर्क से जोड़ दिया है, जो अधिक सुरक्षित माना जाता है.
क्या है BeiDou सिस्टम?
BeiDou सिस्टम चीन द्वारा विकसित एक वैश्विक सैटेलाइट नेविगेशन नेटवर्क है, जो GPS की तरह पृथ्वी पर किसी भी स्थान की सटीक लोकेशन और समय की जानकारी देता है. इस सिस्टम में लगभग 30 से ज्यादा सैटेलाइट शामिल हैं और यह दुनिया भर में नेविगेशन सेवाएं उपलब्ध कराता है.रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, BeiDou का सैन्य स्तर का एन्क्रिप्टेड सिग्नल पारंपरिक GPS की तुलना में ज्यादा सुरक्षित है. इसमें 'फ्रीक्वेंसी-हॉपिंग' और ऑथेंटिकेशन तकनीक का इस्तेमाल होता है, जिससे इसे जाम या नकली सिग्नल से भ्रमित करना बेहद मुश्किल हो जाता है. यही वजह है कि ईरान के मिसाइल अटैक पहले की अपेक्षा और सटीक हो रहे हैं.
रूस ने ईरान को दिए EWS
कुछ रिपोर्टों में यह भी संकेत दिया गया है कि हालिया हमलों में ईरानी मिसाइलों की सटीकता बढ़ने से पश्चिमी खुफिया एजेंसियों को शक हुआ कि ईरान को चीन के सैटेलाइट डेटा या नेविगेशन नेटवर्क तक पहुंच मिल रही है. हालांकि चीन और रूस ने सीधे तौर पर युद्ध में किसी सैन्य समर्थन से इनकार किया है. यहां तक कि क्रेमलिन के प्रवक्ता ने ये भी कहा था कि अब तक ईरान ने रूस से कोई मदद भी नहीं मांगी है.
रूस ने कैसे की ईरान की मदद?
अगर रूस की बात करें तो उसने ईरान के साथ अपने रणनीतिक साझेदारी समझौते के तहत रक्षा और तकनीकी सहयोग बढ़ाया है. पिछले कुछ सालों में रूस ने ईरान को अपडेटेड इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम भी दिए हैं, जो रडार और निगरानी सिस्टम को बाधित करने में सक्षम माने जाते हैं. राजनयिक स्तर पर भी रूस अमेरिका-इजरायल हमलों की आलोचना करता रहा है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ईरान के पक्ष में बयान देता है. डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान को चीन और रूस से मिल रही इस मदद से मिडिल ईस्ट का पूरा समीकरण बदल सकता है.
