Board of Peace: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्विट्ज़रलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के गठन का ऐलान किया है. इस बोर्ड का उद्देश्य दुनियाभर में जारी युद्धों के समाधान की दिशा में काम करना और युद्ध से तबाह क्षेत्रों के पुनर्निर्माण में भूमिका निभाना बताया गया है.

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इस पहल के तहत ट्रंप ने शुरुआत में कनाडा को भी बोर्ड में शामिल होने का निमंत्रण भेजा था, लेकिन कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की ओर से किसी आधिकारिक प्रतिक्रिया आने से पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह न्योता वापस ले लिया.

ट्रंप ने कही ये बात

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ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा, “प्रधानमंत्री कार्नी, कृपया इस पत्र को इस बात का प्रमाण मानें कि बोर्ड ऑफ पीस कनाडा को शामिल करने के संबंध में दिया गया आपका निमंत्रण वापस लिया जा रहा है. यह बोर्ड अब तक का सबसे प्रतिष्ठित वैश्विक नेतृत्व मंच होगा.”

35 देशों की सहमति, यूरोप की दूरी

गुरुवार सुबह तक करीब 35 देशों ने इस बोर्ड में शामिल होने की सहमति दे दी है. इनमें इजरायल, तुर्की, मिस्र, सऊदी अरब और कतर जैसे पश्चिम एशिया के प्रमुख देश शामिल हैं. हालांकि, अमेरिका के पारंपरिक सहयोगी माने जाने वाले कई यूरोपीय देश अभी इस पहल से दूरी बनाए हुए हैं. ये देश न तो सदस्यता को लेकर पूरी तरह सहमत हुए हैं और न ही बोर्ड के फीस सिस्टम पर अपनी हामी भरी है.

स्थायी सदस्यता के लिए भारी फीस

ड्राफ्ट प्रस्ताव के मुताबिक, बोर्ड में स्थायी सदस्य बनने के लिए किसी भी देश को कम से कम एक अरब अमेरिकी डॉलर का भुगतान करना होगा. माना जा रहा है कि ट्रंप इस बोर्ड के आजीवन अध्यक्ष रह सकते हैं, जबकि अन्य सदस्यों का कार्यकाल तीन वर्ष का होगा.

50 देशों को भेजा गया न्योता

व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने बताया कि करीब 50 देशों को बोर्ड में शामिल होने का न्योता भेजा गया है. हालांकि, कई देशों की ओर से अब तक कोई जवाब नहीं आया है. अंतिम रूप से किन देशों को सदस्यता मिलेगी, इसकी सूची फिलहाल जारी नहीं की गई है. कुछ देशों ने सहमति दी है, कुछ ने इनकार किया है, जबकि कई देश अभी विचार कर रहे हैं.

कार्नी का दावोस भाषण बना विवाद की वजह

इस पूरे घटनाक्रम की जड़ कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का हालिया दावोस भाषण माना जा रहा है. वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में दिए गए अपने भाषण में कार्नी ने तथाकथित ‘मध्यम शक्तियों’ से महाशक्तियों की धमकियों के खिलाफ एकजुट होने की अपील की थी. हालांकि उन्होंने ट्रंप का नाम नहीं लिया, लेकिन उन्होंने उन विदेश नीतियों पर निशाना साधा जिनमें टैरिफ को दबाव के हथियार, वित्तीय ढांचे को जबरदस्ती और सप्लाई चेन को कमजोरियों के रूप में इस्तेमाल किया जाता है.

कार्नी ने दावोस में कहा, “नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की दुहाई देना बंद करें. ऐसा कुछ नहीं है. सिस्टम को वही कहें जो यह है, एक ऐसा दौर, जहां सबसे शक्तिशाली देश अपने हितों को साधने के लिए आर्थिक एकीकरण का इस्तेमाल जबरदस्ती के हथियार के रूप में करते हैं.”