Lashkar Terrorist Threat on Abraham Accords: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पाकिस्तान समेत कई मुस्लिम देशों से अब्राहम अकॉर्ड्स पर हस्ताक्षर कर इज़राइल के साथ संबंध सामान्य करने की अपील के बाद पाकिस्तान में विवाद गहरा गया है. इसी बीच आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के डिप्टी चीफ सैफुल्लाह कसूरी ने बकरीद की नमाज़ के बाद खुले मंच से पाकिस्तान सरकार और सेना प्रमुख आसिम मुनीर को धमकी देते हुए कहा कि “जो भी इज़राइल को मान्यता देने की बात करेगा, उसे खत्म कर दिया जाएगा.”

Continues below advertisement

सैफुल्लाह की मुनीर-शहबाज को धमकी

सैफुल्लाह कसूरी ने अपने भाषण में दावा किया कि कोई भी वैश्विक ताकत मुस्लिम देशों को इज़राइल को मान्यता देने के लिए मजबूर नहीं कर सकती. उसने पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच कथित रक्षा सहयोग का जिक्र करते हुए यह भी कहा कि पाकिस्तान की सैन्य क्षमता अब इज़राइल के करीब तक पहुंच चुकी है. अपने भाषण के दौरान उसने जिहाद और शहादत जैसे मुद्दों को उठाते हुए समर्थकों को उकसाने की भी कोशिश की.

Continues below advertisement

अब्राहम अकॉर्ड्स के खिलाफ पाक रक्षा मंत्री

इससे पहले पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी स्पष्ट किया था कि पाकिस्तान इज़राइल के साथ संबंध सामान्य करने के पक्ष में नहीं है. उन्होंने कहा कि जब तक 1967 की सीमाओं के आधार पर पूर्वी यरुशलम को राजधानी बनाकर एक स्वतंत्र फ़िलिस्तीनी राज्य की स्थापना नहीं होती, तब तक पाकिस्तान इज़राइल को मान्यता नहीं देगा. साथ ही उन्होंने इज़राइल पर अविश्वास जताते हुए उसके साथ किसी भी समझौते को देश की विचारधारा के खिलाफ बताया.

दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ युद्ध समाप्त करने के लिए चल रही शांति वार्ता “अच्छी तरह से” आगे बढ़ रही है, हालांकि अंतिम निर्णय में अभी समय लग सकता है. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ईरान अपने सर्वोच्च नेता से परामर्श के लिए जटिल संचार प्रणाली का इस्तेमाल कर रहा है, जिसके कारण बातचीत की प्रक्रिया धीमी हो सकती है.

ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर अपने पोस्ट में यह भी कहा कि जो देश इस शांति वार्ता में मध्यस्थता कर रहे हैं, उन्हें अब्राहम समझौता (Abraham Accords) पर हस्ताक्षर करना चाहिए. यह समझौता इज़राइल और अरब देशों के बीच राजनयिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंधों को सामान्य बनाने से जुड़ा है.

उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के लिए इस समझौते पर हस्ताक्षर करना “सम्मान की बात” होगी. ट्रंप के अनुसार, अमेरिका द्वारा इस जटिल मुद्दे को सुलझाने के प्रयासों के बाद संबंधित देशों को कम से कम इस समझौते में शामिल होना चाहिए, हालांकि उन्होंने यह भी माना कि कुछ देशों के पास इससे अलग रहने के अपने कारण हो सकते हैं. गौरतलब है कि संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन पहले ही इस समझौते पर हस्ताक्षर कर चुके हैं, जबकि ट्रंप चाहते हैं कि सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, तुर्किये, मिस्र और जॉर्डन भी इसमें शामिल हों.

ये भी पढ़ें: केरलम के पूर्व सीएम पी. विजयन के घर ईडी रेड का विरोध, CPM वर्कर्स ने गाड़ियों पर किया हमला, देखें Video