ईरान में पिछले 12 दिनों से जारी बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों के बीच खामेनेई शासन ने पहली बार हिंसा और हताहतों की बात स्वीकार की है. सरकारी टीवी ने यह माना है कि प्रदर्शनों के दौरान हिंसक घटनाएं हुईं और कुछ लोगों के हताहत होने की खबरें हैं. हालांकि, शासन ने इसे घरेलू लोगों का गुस्सा नहीं माना है.

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खामेनेई सरकार ने क्या कहा?

सरकारी टीवी ने एक कार्यक्रम में पहली बार चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि प्रदर्शनों में हिंसा हुई और लोग हताहत हुए. लेकिन यह सब 'अमेरिकी-इजरायली आतंकी एजेंटों' ने किया है. सरकार का दावा है कि ये एजेंट आगजनी और हिंसा फैला रहे हैं ताकि देश अस्थिर हो जाए.

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पहले सरकार प्रदर्शनों को नजरअंदाज कर रही थी या छोटी घटना बता रही थी. अब हताहतों की बात मानकर सरकार ने हालात की गंभीरता को स्वीकार किया है.

अमेरिका ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि अगर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हिंसा की गई तो अमेरिका 'तगड़ा हमला' करेगा और प्रदर्शनकारियों की मदद करेगा. इस धमकी के बाद ईरान ने अपना एयरस्पेस बंद कर दिया है और मिलिट्री को हाई अलर्ट पर रखा है.

निर्वासित क्राउन प्रिंस ने प्रदर्शन का समर्थन किया

ईरान के विपक्षी नेता और निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने प्रदर्शन का समर्थन करते हुए कहा, 'लाखों ईरानियों ने आज रात अपनी आजादी की मांग की. जवाब में, ईरान में सरकार ने कम्युनिकेशन की सभी लाइनें काट दी हैं. इंटरनेट बंद कर दिया है. लैंडलाइन काट दी हैं. यह सैटेलाइट सिग्नल को जाम करने की भी कोशिश कर सकते है.'

ईरान में प्रदर्शनों की वजहें क्या हैं?

ईरान के 111 से ज्यादा शहरों में हालात बहुत गंभीर हो गए हैं. खासकर गुरुवार रात को राजधानी तेहरान में आगजनी और प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी जैसी घटनाएं रिपोर्ट हुईं हैं.

  • ईरान में महंगाई बहुत तेजी से बढ़ रही है.
  • अर्थव्यवस्था बुरी हालत में है.
  • रियाल (ईरान की मुद्रा) की कीमत बहुत गिर गई है.
  • लोग रोजमर्रा की चीजें और दवाइयां खरीदने में मुश्किल महसूस कर रहे हैं.