ईरान के सर्वोच्च नेता के सैन्य सलाहकार, याह्या रहीम सफवी ने कहा कि फारस की खाड़ी के देशों को ये मान लेना चाहिए कि अमेरिका इस क्षेत्र में वापस नहीं आएगा. उन्होंने पड़ोसी देशों से अपने मतभेद आपस में ही सुलझाने का आग्रह किया.

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उन्होंने कहा, "फारस की खाड़ी के किनारे बसे देशों को यह पता होना चाहिए कि अमेरिका अब इस क्षेत्र में वापस नहीं आएगा. हम हजारों सालों से अपने पड़ोसियों के साथ रहते आए हैं और हम पड़ोसी हैं." उन्होंने आगे कहा, "पड़ोसियों के लिए एक-दूसरे के साथ मिल-जुलकर रहना ही बेहतर है."

खामेनेई ने दी अमेरिका को चेतावनीमोजतबा खामेनेई ने सोमवार को अमेरिका का नाम लिए बिना उस पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कुछ लोग हमें दुनिया की चौथी महाशक्ति मानते हैं. आज, दुश्मन की सेनाओं की हिम्मत नहीं होती कि वे अरब सागर से आगे बढ़ें. जल्द ही वह दिन आएगा जब अरब सागर से उनकी मौजूदगी पूरी तरह खत्म हो जाएगी. हमारे लोग अपनी जिम्मेदार मौजूदगी से देश भर के चौराहों और सड़कों को भर देते हैं.

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ये बातें ऐसे समय में कही गईं जब होर्मुज़ जलडमरूमध्य और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर तेहरान और वॉशिंगटन के बीच तनाव बना हुआ है. साथ ही, यह बयान उस समय आया है जब अमेरिका ने रणनीतिक जलमार्ग को फिर से खोलने से जुड़े ईरान के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है.

उन्होंने कहा, "ईरान के दो दक्षिणी समुद्र दुश्मन सेनाओं के घूमने-फिरने की जगह हुआ करते थे. लेकिन आज, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बहादुर योद्धाओं और रक्षकों से मिली करारी चोटों के कारण, वे अरब सागर से आगे नहीं बढ़ पाते हैं. जब भी उन्होंने इस खतरे का सामना करने की हिम्मत की है, उन्हें खुद ही नुकसान उठाना पड़ा है और जल्द ही, अरब सागर भी उनसे पूरी तरह खाली हो जाएगा.

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