लेबनान का गैस गेम! क्या ‘सुरक्षा जोन’ के बहाने 'खजाने' पर कब्जे की तैयारी कर रहा है इजरायल?
Israel Lebanon Conflict: दक्षिणी लेबनान में इजरायल द्वारा बनाए गए बफर जोन को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. लेबनान का आरोप है कि इजरायल समुद्री क्षेत्रों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहा है.

दक्षिणी लेबनान में बनाए गए इजरायल के तथाकथित 'बफर जोन' को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. लेबनानी अधिकारियों और कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का आरोप है कि सुरक्षा के नाम पर इजरायल उन समुद्री क्षेत्रों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहा है जहां लेबनान के संभावित गैस भंडार मौजूद हैं. हालांकि इजरायल ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उसका उद्देश्य केवल सुरक्षा सुनिश्चित करना और हिज्बुल्लाह को सीमा से दूर रखना है.
बफर जोन पर बढ़ा विवाद
2026 के युद्ध के दौरान इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में एक सुरक्षा क्षेत्र बनाया था. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने संकेत दिया है कि फिलहाल सेना इस क्षेत्र से पीछे नहीं हटेगी. इजरायल का दावा है कि यह क्षेत्र हिज्बुल्लाह के हमलों को रोकने के लिए जरूरी है.
समुद्री सीमा तक बढ़ने की आशंका
विशेषज्ञों का कहना है कि यह बफर जोन भूमध्यसागर के उन हिस्सों तक फैलता दिख रहा है जो लेबनान के विशेष आर्थिक क्षेत्र में आते हैं. इससे आशंका पैदा हुई है कि इजरायल की नजर उन समुद्री इलाकों पर हो सकती है जहां भविष्य में गैस और तेल के बड़े भंडार मिल सकते हैं.
यह भी पढ़ें: होर्मुज खुलते ही भारत को होंगे ये 10 बड़े फायदे, गिरेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम! चीन-पाकिस्तान को लगेगा झटका!
काना और करिश गैस फील्ड फिर चर्चा में
2022 में अमेरिका की मध्यस्थता से हुए समुद्री सीमा समझौते के तहत काना गैस क्षेत्र लेबनान और करिश गैस क्षेत्र इजरायल के हिस्से में आया था. अब विशेषज्ञों का कहना है कि इजरायल के नए सुरक्षा क्षेत्र की सीमा ब्लॉक-8 और ब्लॉक-9 तक पहुंचती दिखाई दे रही है, जो काना गैस परियोजना का हिस्सा माने जाते हैं.
लेबनान के गैस भंडार कितने बड़े हैं?
लेबनान के पास कुल 10 ऑफशोर ब्लॉक हैं, लेकिन अभी तक केवल ब्लॉक-8 में हाइड्रोकार्बन गतिविधियों का अनुबंध हुआ है. ब्लॉक-4 और ब्लॉक-9 में पहले की गई खोजों में व्यावसायिक रूप से उपयोगी गैस भंडार नहीं मिले. इसी कारण अभी तक लेबनान के पास प्रमाणित गैस भंडार की आधिकारिक पुष्टि नहीं है.
2022 का समुद्री समझौता क्या कहता है?
अक्टूबर 2022 में लेबनान और इजरायल ने 860 वर्ग किलोमीटर के विवादित समुद्री क्षेत्र को लेकर समझौता किया था. अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञों का कहना है कि यह समझौता दोनों देशों पर कानूनी रूप से बाध्यकारी है और किसी भी पक्ष द्वारा एकतरफा सीमा बदलना अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन माना जाएगा.
इजरायल और लेबनान का क्या कहना है?
इजरायल में भी इस समझौते को लेकर मतभेद हैं. विपक्षी नेता यायर लापिड का कहना है कि गैस क्षेत्र को लेकर बेवजह विवाद पैदा किया जा रहा है. वहीं ऊर्जा मंत्री एली कोहेन का आरोप है कि 2022 का समझौता लेबनान के पक्ष में था और इससे हिज्बुल्लाह मजबूत हुआ. दूसरी ओर लेबनान के ऊर्जा मंत्री जो सादी का कहना है कि इजरायल के नए नक्शे से समुद्री सीमा समझौते की कानूनी स्थिति नहीं बदलती.
लेबनान के पास क्या विकल्प हैं?
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इजरायल लेबनान के समुद्री क्षेत्र में गतिविधियां बढ़ाता है तो लेबनान अमेरिका, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का सहारा ले सकता है. साथ ही किसी भी कब्जे वाले समुद्री क्षेत्र में तेल या गैस निकालने की कोशिश को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अवैध माना जाएगा.
गाजा जैसी स्थिति बनने का खतरा
विश्लेषकों का मानना है कि यदि समुद्री क्षेत्रों पर नियंत्रण का विवाद बढ़ा तो दक्षिणी लेबनान की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हो सकता है. मछली पकड़ने और समुद्री संसाधनों पर निर्भर हजारों लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल यह साफ नहीं है कि इजरायल वास्तव में गैस संसाधनों पर कब्जा चाहता है या सिर्फ सुरक्षा दबाव बनाकर लेबनान को नई बातचीत के लिए मजबूर करना चाहता है, लेकिन क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है.
























