ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि इजरायल द्वारा की गई ईरानी सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी की हत्या से देश के नेतृत्व को कोई घातक झटका नहीं लगेगा. तेहरान द्वारा लारीजानी की हत्या की पुष्टि के बाद अल जजीरा को दिए इंटरव्यू में अरघची ने कहा कि अमेरिका और इजरायल को अभी यह समझना बाकी है कि ईरान की सरकार किसी एक व्यक्ति पर निर्भर नहीं है.
लारीजानी की मौत पर क्या बोले अराघची उन्होंने कहा कि मुझे समझ नहीं आता कि अमेरिकी और इजरायली अब तक इस बात को क्यों नहीं समझ पाए हैं कि ईरान के इस्लामी गणराज्य का एक मजबूत राजनीतिक स्ट्रक्चर है, जिसमें राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक संस्थाएं स्थापित हैं. किसी एक व्यक्ति की उपस्थिति या अनुपस्थिति इस स्ट्रक्चर को प्रभावित नहीं करती. उन्होंने आगे कहा कि बेशक व्यक्ति प्रभावशाली होते हैं और प्रत्येक व्यक्ति अपनी भूमिका निभाता है. कोई बेहतर, कोई बदतर, कोई कम, लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि ईरान की राजनीतिक व्यवस्था एक बहुत ही ठोस संरचना है.
अराघची ने अली खामेनेई की हत्या का जिक्र करते हुए कहा कि भारी राष्ट्रीय क्षति के बावजूद व्यवस्था चलती रही. विदेश मंत्री ने कहा, "हमारे पास नेता से अधिक महत्वपूर्ण कोई नहीं था और नेता के शहीद होने के बावजूद व्यवस्था ने अपना काम जारी रखा और तुरंत एक नया नेता नियुक्त कर दिया." उन्होंने आगे कहा, "अगर कोई और शहीद होता है तो भी यही होगा. अगर विदेश मंत्री कभी शहीद हो जाते हैं तो कोई और उनकी जगह लेने के लिए तैयार होगा."
गुलामरेज़ा सुलेमानी की भी मौतईरान की सरकारी मीडिया ने मंगलवार को इस बात की पुष्टि की कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के अंतर्गत आने वाले अर्धसैनिक समूह बासिज के प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल गुलामरेज़ा सुलेमानी भी अमेरिकी-ज़ायोनी दुश्मन के हमले में मारे गए. पिछले 6 वर्षों से देश के सबसे शक्तिशाली आंतरिक सुरक्षा बल बासिज के कमांडर रहे सुलेमानी लड़ाई में एक प्रमुख नेता के रूप में उभरे थे.
क्या बोले अल जज़ीरा के मारवान बिशारा अल जज़ीरा के वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक मारवान बिशारा ने कहा कि इजरायल लंबे समय से अपने राजनीतिक विरोधियों की हत्याओं में लिप्त रहा है, जो युद्ध में सामान्य बात नहीं है. उन्होंने कहा, “युद्धों में आप निर्वाचित नेताओं सहित राजनीतिक नेताओं की हत्या करके शुरुआत नहीं करते. हत्याओं का यह कार्यक्रम गुंडागर्दी है, यह आतंकवाद है, यह युद्ध का सामान्य तरीका नहीं है.” बिशारा ने कहा कि ईरान में व्यवस्था मजबूत है और एक नेता की हत्या से व्यवस्था ध्वस्त नहीं हो जाएगी, फिर भी इस तरह की हत्याओं का कहीं न कहीं प्रभाव जरूर पड़ता है.
अराघची ने कहा कि हमने जंग की शुरुआत नहीं की. इसकी शुरुआत अमेरिका ने की और इस युद्ध के सभी परिणामों मानवीय और वित्तीय के लिए भी वही जिम्मेदार हैं, चाहे वह ईरान के लिए हो, इस क्षेत्र के लिए हो या पूरी दुनिया के लिए. इन सबके लिए अमेरिका को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए.
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