इजरायली मिसाइल से बार-बार मलबे का बना ढेर, फिर कैसे उठकर खड़ा होता रहा बेरुत... लेबनान की दिलचस्प कहानी
Beirut Attack: लेबनान की राजधानी बेरूत में इस वक्त बारूद की बू आ रही है, जिसका कारण इजरायली मिसाइलें और बम है. इजरायल का तर्क है वो हिजबुल्ला के सैन्य ढांचों, हथियारों और ठिकानों को निशाना बना रहा है.

- कभी 'मिडिल ईस्ट का पेरिस' कहलाता था बेरूत, अब बारूद की बू.
मिडिल ईस्ट में एक महीने से ज्यादा समय तक युद्धरत रहे US-इजरायल और ईरान के बीच शनिवार (11 अप्रैल, 2026) को पाकिस्तान में बातचीत की तैयारियां चल रही हैं. पूरी दुनिया की निगाहें इस बातचीत पर टिकी हुई हैं, जबकि दूसरी इजरायल यह मानने को तैयार नहीं है कि लेबनान सीजफायर का हिस्सा है. इजरायल और लेबनान के बीच दशकों पुराने दुश्मनी है, इजरायल का तर्क है वो लेबनान के हथियाबंद लड़ाकों के संगठन हिजबुल्ला के सैन्य ढांचों, हथियारों और ठिकानों को निशाना बना रहा है, जिसके लिए इजरायल आज भी लेबनान में मिसाइलें और बम बरसा रहा है.
लेबनान मध्य एशिया का ऐसा इकलौता देश है, जहां कोई रेगिस्तान नहीं है. बर्फ और समंदर के बीच बसा लेबनान वो मुल्क है, जो मिडिल ईस्ट में होने के बावजूद बर्फ से ढके पहाड़ों के लिए जाना जाता है. एक तरफ बर्फ के पहाड़ और दूसरी तरफ नीले समंदर से आती लहरें लेबनान को गले से लगाती हैं. यही वजह है कि लेबनान पर्यटन के लिए पहली पसंद माना जाता है, लेकिन एक बात और है जो लेबनान को बाकी दुनिया से अलग करती है और वो है मुश्किल हालात और तबाही के बाद बार-बार जी उठने की तमन्ना. लेबनान के सबसे बड़े शहर और राजधानी का नाम बेरूत है, जिसे राख से फिर खड़ा हो जाने वाला शहर भी कहा जाता है.
अब तक 8 बार बर्बाद हो चुका बेरूत
बेरूत वो शहर है जिसे बार-बार तबाह किया गया है और अब तक 8 बार ये बर्बाद हो चुका है, लेकिन हर बार बेरूत मुस्कुरा उठता है. इस शहर ने सदियों से आक्रमण, भूकंप, युद्ध और विस्फोट के दंश झेले हैं. बेरूत को फीनिक्स सिटी कहा जाता है यानि वो शहर जो कभी नहीं मरता. बेरूत का इतिहास सिर्फ एक शहर की कहानी नहीं, बल्कि जज्बे और पुनर्जन्म की कहानी है.
2020 की ये तस्वीरें दुनिया आज भी नहीं भूली है जब 6 साल पहले बेरूत पोर्ट पर करीब 2,750 टन असुरक्षित अमोनियम नाइट्रेट में भीषण विस्फोट हुआ था. ये विस्फोट इतना भयानक था कि 200 से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी जबकि हजारों घायल हुए थे. 3 लाख से ज्यादा लोग बेघर हो गए थे. ये इतिहास के सबसे शक्तिशाली गैर-परमाणु विस्फोटों में से एक था, लेकिन इतनी भयानक चोट के बाद भी बेरूत फिर से उठ खड़ा हुआ था.
कभी बेरुत को कहा जाता था मिडिल ईस्ट का पेरिस
मौजूदा वक्त में बेरूत शहर से बारूद की बू आ रही है, लेकिन एक वक्त था जब इस शहर को मिडिल ईस्ट का पेरिस कहा जाता था. 1516 में बेरूत एक छोटा सा कस्बा था, लेकिन 19वीं सदी में इसका तेजी से विकास हुआ. 1894 में आधुनिक बंदरगाह बनने और सीरिया की राजधानी दमिश्क से सड़क से जुड़ने के बाद बेरूत यूरोप और अरब दुनिया के बीच व्यापार का बड़ा सेंटर बन गया था. यहां से रेशम, जैतून का तेल और तंबाकू का व्यापार होता था. फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका के व्यापारी बेरूत आकर बसने लगे. बेरूत शहर से ही कई लेखक, विचारक और आंदोलनकारी निकले, जिन्होंने पूरे क्षेत्र को प्रभावित किया. इस दौर में शहर की पहचान पत्थर के घरों, संकरी गलियों, बाजारों और मस्जिदों से होती थी. जब मुस्लिम, ईसाई और यहूदी सब साथ रहते थे.
Source: IOCL


























