US Iran Peace Talks In Islamabad: इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच करीब 21 घंटे चली लंबी बातचीत आखिरकार बिना किसी समझौते के खत्म हो गई. दोनों देशों के बीच दशकों बाद हुई सबसे उच्च स्तर की बातचीत में भी कोई सहमति नहीं बन सकी. हालांकि दोनों पक्षों ने संकेत दिया है कि आगे भी बातचीत जारी रह सकती है, लेकिन परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों और क्षेत्रीय नियंत्रण जैसे मुद्दों पर गहरी असहमति बनी रही.
1. ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर गहरी असहमति
बातचीत का सबसे बड़ा मुद्दा ईरान का परमाणु कार्यक्रम रहा. अमेरिका चाहता था कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की क्षमता पूरी तरह खत्म करने की गारंटी दे और यूरेनियम संवर्धन पर सख्त रोक लगाए. वहीं ईरान ने इसे अपने संप्रभु अधिकारों पर हमला बताते हुए कड़े प्रतिबंध मानने से इनकार कर दिया.
2. प्रतिबंध हटाने और फ्रीज संपत्तियों पर विवाद
ईरान ने अपनी विदेशों में फ्रीज की गई संपत्तियों को वापस करने की मांग की, जिनमें कतर और अन्य देशों में रखे फंड भी शामिल हैं. लेकिन अमेरिका ने इस तरह की किसी भी सहमति से इनकार कर दिया, जिससे आर्थिक राहत को लेकर दोनों पक्षों में बड़ा अंतर सामने आ गया.
3. होर्मुज स्ट्रेट और समुद्री नियंत्रण का मुद्दा
होर्मुज स्ट्रेट बातचीत का बड़ा विवाद बन गया. ईरान ने इस रणनीतिक जलमार्ग पर अधिक नियंत्रण और ट्रांजिट फीस लेने की मांग रखी. वहीं अमेरिका ने कहा कि इस रास्ते से दुनिया के लगभग 20% ऊर्जा व्यापार को बिना किसी रुकावट के गुजरना चाहिए और इसे खुला रखना जरूरी है.
4. क्षेत्रीय मांगें और युद्ध मुआवजे का मुद्दा
ईरान ने बातचीत का दायरा बढ़ाते हुए युद्ध मुआवजे और क्षेत्रीय स्तर पर पूर्ण युद्धविराम की मांग रख दी, जिसमें लेबनान जैसे क्षेत्र भी शामिल थे. अमेरिका ने इन व्यापक मांगों से दूरी बनाते हुए केवल परमाणु प्रतिबंध और समुद्री सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित रखा, जिससे दोनों की प्राथमिकताओं में टकराव हो गया.
5. भरोसे की कमी और तनावपूर्ण माहौल
पूरी बातचीत के दौरान दोनों देशों के बीच गहरा अविश्वास बना रहा. अधिकारियों के मुताबिक बातचीत के दौरान कई बार माहौल तनावपूर्ण हो गया और गुस्सा भी देखने को मिला. ईरान का प्रतिनिधिमंडल अपने साथ नागरिकों की पीड़ा से जुड़े प्रतीक लेकर पहुंचा था, जबकि दोनों पक्ष एक-दूसरे पर सख्त रुख अपनाने का आरोप लगाते रहे.
