US Iran Talks 2.0: इस्लामाबाद 2.0 वार्ता को लेकर अब भी सस्पेंस बरकरार है. पहले यह बैठक मंगलवार को प्रस्तावित थी, लेकिन अब इसके बुधवार तक टलने की अटकलें लगाई जा रही हैं. हालांकि, ईरान की ओर से इसे लेकर विरोधाभासी संकेत मिले हैं. कुछ सांसदों ने अमेरिका के साथ वार्ता की खबरों को पूरी तरह गलत बताया है. वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि यदि सीजफायर खत्म होता है तो ईरान पर बमबारी की जाएगी.

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हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि अगर ईरान वार्ता के लिए आता है इस्लामाबाद वार्ता सफल रहती है तो फिर आगे वे ईरान के नेताओं के साथ भी मुलाकात कर सकते हैं.

पाक को चीन पर भरोसा

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इसी बीच पाकिस्तान, जो अब तक इस पूरे मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है, अब खुलकर चीन पर भरोसा जता रहा है. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, Jiang Zaidong ने Ishaq Dar के साथ बैठक में अमेरिका-ईरान शांति प्रयासों में पाकिस्तान की भूमिका की सराहना की. साथ ही दोनों देशों ने “सदाबहार” चीन-पाकिस्तान साझेदारी को और मजबूत करने पर जोर दिया.

जर्मनी बोला- कबूल करो ऑफर

दूसरी ओर यूरोप भी सक्रिय नजर आ रहा है. जर्मनी के विदेश मंत्री Johann Wadephul ने ईरान से अपील की है कि वह इस्लामाबाद में वार्ता के प्रस्ताव को स्वीकार करे और अपनी जनता के हित में कूटनीतिक रास्ता चुने. ब्रुसेल्स में यूरोपीय विदेश मंत्रियों की बैठक से पहले उन्होंने कहा कि यह मौका गंवाना ईरान के लिए नुकसानदायक हो सकता है.

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इस पूरे तनाव के बीच ईरान के अंदर हालात भी चिंताजनक बने हुए हैं. इंटरनेट मॉनिटरिंग संस्था NetBlocks के अनुसार, देश में पिछले 53 दिनों से व्यापक इंटरनेट प्रतिबंध जारी है. सरकार ने “टियर सिस्टम” लागू किया है, जिसमें सीमित लोगों और संस्थानों को ही इंटरनेट एक्सेस मिल रहा है, जबकि आम जनता लगभग पूरी तरह वैश्विक इंटरनेट से कटी हुई है.

इससे न सिर्फ आम जीवन प्रभावित हुआ है, बल्कि कारोबार और अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर असर पड़ा है. एक तरफ कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, तो दूसरी ओर धमकियां, अविश्वास और आंतरिक दबाव इस पूरे क्षेत्र को और अधिक अस्थिर बना रहे हैं.

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