Bangladesh Army Emergency meeting Over Coup Rumors: बांग्लादेश में क्या सेना जल्द तख्तापलट करने वाली है? यह सवाल कई दिनों से उठ रहा है. ऐसा इसलिए है क्यों सेना प्रमुख कई बार मोहम्मद यूनुस की सरकार पर सवाल उठा चुके हैं. हालांकि अब उन्होंने इन मीडिया रिपोर्ट्स का खंडन किया है.बांग्लादेश सेना के प्रमुख अधिकारियों ने मंगलवार (25 मार्च) को एक मीडिया रिपोर्ट को पूरी तरह से झूठा और मनगढ़ंत करार दिया, जिसमें दावा किया गया था कि सेना के शीर्ष अधिकारियों ने आपातकालीन बैठक बुलाई थी. इस रिपोर्ट को सेना ने पत्रकारिता की गंभीर चूक बताते हुए खारिज कर दिया. सेना की मीडिया शाखा इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) ने इसे गलत जानकारी और अफवाह फैलाने का मामला बताया है.

ISPR की तरफ से जारी किए गए बयान के अनुसार, जिस रिपोर्ट में दावा किया गया कि "Bangladesh Army Holds Emergency Meeting Amid Possibility of Coup Against Chief Adviser Mohammad Yunus" पूरी तरह से भ्रम फैलाने वाली और झूठी जानकारी पर आधारित है. यह रिपोर्ट पत्रकारिता की एक गंभीर चूक का उदाहरण है, जिसमें किसी विश्वसनीय स्रोत या ठोस सबूत का जिक्र नहीं किया गया है. ISPR ने कहा कि यह बैठक एक सामान्य प्रशासनिक बैठक थी, जिसे गलत तरीके से तख्तापलट की साजिश के रूप में पेश किया गया.

आरोपों की सत्यता पर सवालISPR के बयान में स्पष्ट किया गया कि रिपोर्ट में कोई ठोस सबूत या विश्वसनीय जानकारी नहीं है, जो इस बात की पुष्टि कर सके कि तख्तापलट की योजना बनाई जा रही थी. सेना ने इस रिपोर्ट को "झूठा और दुर्भावनापूर्ण" बताया और कहा कि यह अफवाह पूरी तरह से मनगढ़ंत है. यह पहली बार नहीं है जब संबंधित मीडिया संगठन ने बांग्लादेश सेना के खिलाफ गलत रिपोर्टिंग की है. इससे पहले, इसी मीडिया समूह ने मार्च 2025 में एक और रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसे बांग्लादेश सेना ने उस समय भी खारिज किया था.

भारत-बांग्लादेश संबंधों पर असरइस विवाद के बाद, भारत और बांग्लादेश के बीच मीडिया कवरेज को लेकर चर्चा तेज हो गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की अफवाहें न केवल दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को नुकसान पहुंचा सकती हैं, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरा हो सकती हैं. सेना के बयान ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता का कोई खतरा नहीं है और तख्तापलट की अफवाहें पूरी तरह से बेबुनियाद हैं.

झूठी रिपोर्टिंग पर कार्रवाई की संभावनाबांग्लादेश सेना के इस स्पष्ट बयान के बाद माना जा रहा है कि सरकार झूठी और भ्रामक खबरें फैलाने वाले मीडिया संगठनों पर सख्त कार्रवाई कर सकती है. ISPR ने कहा कि मीडिया को जिम्मेदारी से रिपोर्टिंग करनी चाहिए और बिना किसी सबूत के ऐसी खबरें प्रकाशित करने से बचना चाहिए.