ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के अंतिम संस्कार को लेकर पूरे देश और दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं. इस समय सबसे बड़ा सवाल यह है कि उनके जनाजे की नमाज कौन पढ़ाएगा और क्या नए सुप्रीम लीडर मोज्तबा खामेनेई इस समारोह में शामिल होंगे. अली खामेनेई के बाद उनके बेटे मोज्तबा खामेनेई को नई जिम्मेदारी दी गई है. सुप्रीम लीडर बनने के बाद से वह सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं. ऐसे में लोगों के बीच यह चर्चा तेज है कि क्या वह अपने पिता के अंतिम संस्कार में पहली बार सार्वजनिक रूप से दिखाई देंगे.

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पिछले हफ्ते अंतिम संस्कार आयोजन समिति के सचिव अली अकबर पोरजमशीदियन ने कहा था कि मोज्तबा खामेनेई की मौजूदगी को लेकर फैसला बाद में लिया जाएगा. उन्होंने बताया कि इस बारे में आधिकारिक घोषणा आर्म्ड फोर्स के कमांडर-इन-चीफ और सुप्रीम लीडर के कार्यालय की ओर से की जाएगी. एक और बड़ा सवाल जनाजे की नमाज को लेकर है. शिया परंपरा में जनाजे की नमाज पढ़ाना सिर्फ धार्मिक जिम्मेदारी नहीं होती, बल्कि इसका राजनीतिक महत्व भी बहुत बड़ा माना जाता है. इसलिए यह फैसला बेहद अहम माना जा रहा है

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रूहोल्लाह खुमैनी के निधन पर किसने जनाजे की नमाज अदा की थी?

इतिहास पर नजर डालें तो 1989 में जब रूहोल्लाह खुमैनी का निधन हुआ था, तब उनके उत्तराधिकारी ने जनाजे की नमाज नहीं पढ़ाई थी. उस समय शिया धर्मगुरु मोहम्मद रजा गोलपायगानी ने यह जिम्मेदारी निभाई थी. इसी वजह से माना जा रहा है कि इस बार भी किसी बड़े शिया धर्मगुरु यानी ग्रैंड अयतुल्ला द्वारा जनाजे की नमाज पढ़ाई जा सकती है. फिलहाल पूरे ईरान में अंतिम संस्कार से जुड़ी तैयारियां जारी हैं और लोगों की नजरें आने वाले आधिकारिक ऐलान पर टिकी हुई हैं.

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