Iran-US War: ईरान पर इस मुस्लिम देश ने किया था सीक्रेट अटैक! एयरस्ट्राइक की चौंकाने वाली रिपोर्ट आई सामने
Iran-US War: सऊदी अरब ने मार्च महीने के आखिरी हफ्ते में ईरान के कई ठिकानों पर सीक्रेट हवाई हमले किए थे. रॉयटर्स की रिपोर्ट में दावा किया गया है.

ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध के दौरान सऊदी अरब ने भी मार्च महीने के आखिर में ईरान पर सीक्रेट हवाई हमले किए थे. समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने दो विदेशी और दो ईरानी अधिकारियों के हवाले से यह दावा किया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि ये हमले ईरान की तरफ से सऊदी अरब पर हुए ड्रोन और मिसाइल हमलों के जवाब में किए गए थे. हालांकि, सऊदी अरब ने कभी सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार नहीं किया है कि उसने ईरान की जमीन पर हमला किया था.
अधिकारियों के अनुसार ये हमले मार्च के आखिरी सप्ताह में किए गए थे. उसी समय ईरान की ओर से उन खाड़ी देशों पर हमले हो रहे थे, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं. एक अधिकारी ने कहा कि सऊदी अरब ने यह कार्रवाई अपनी सुरक्षा के जवाब में की थी. हालांकि रिपोर्ट में यह साफ नहीं किया गया कि ईरान के किन इलाकों को निशाना बनाया गया. यह भी नहीं बताया गया कि हमलों में कितना नुकसान हुआ.
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सऊदी विदेश मंत्रालय ने नहीं दिया कोई जवाब
इस मामले पर जब सऊदी विदेश मंत्रालय से जवाब मांगा गया तो उन्होंने इन हमलों की पुष्टि नहीं की. ईरान के विदेश मंत्रालय की तरफ से भी कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार जब ईरान-अमेरिका जंग पूरे पीक पर था तो इसके बावजूद सऊदी अरब और ईरान के बीच बातचीत भी जारी रही. इस बीच रियाद में मौजूद ईरानी राजदूत के जरिए दोनों देशों के बीच लगातार संपर्क बना रहा. रिपोर्ट में यह दावा भी किया गया है कि सऊदी अरब ने हमलों की जानकारी पहले ही ईरान को दे दी थी. इसके बाद दोनों देशों के बीच तेजी से कूटनीतिक स्तर पर बातचीत हुई.
105 ड्रोन से सऊदी अरब ने किया था हमला
सऊदी अरब ने ईरान को आगे और जवाबी कार्रवाई की चेतावनी भी दी थी. बाद में दोनों देशों ने तनाव कम करने पर सहमति जताई. ईरान के एक अधिकारी ने भी इस बात की पुष्टि की कि दोनों देशों के बीच तनाव घटाने को लेकर बातचीत हुई थी. उनका कहना था कि इसका मकसद हालात को और बिगड़ने से रोकना और दोनों देशों के हितों की रक्षा करना था. रिपोर्ट के अनुसार 25 से 31 मार्च के बीच सऊदी अरब पर 105 से ज्यादा ड्रोन और मिसाइल हमले हुए थे, लेकिन 1 अप्रैल से 6 अप्रैल के बीच यह संख्या घटकर करीब 25 रह गई.
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