मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध को रोकने के लिए अब दुनिया के कई बड़े देश पर्दे के पीछे से सक्रिय हो गए हैं. एक वरिष्ठ राजनयिक के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हाल की शांति घोषणा से पहले ओमान और तुर्किए के जरिए सबसे ज्यादा गुप्त बातचीत हुई. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, ओमान पहले भी कई बार मध्यस्थ की भूमिका निभा चुका है और इस बार भी उसने दोनों विरोधी पक्षों को बातचीत के लिए तैयार करने में अहम भूमिका निभाई.

सिर्फ ओमान और तुर्की ही नहीं, बल्कि भारत, सऊदी अरब और मिस्र के जरिए भी लगातार संदेशों का आदान-प्रदान होता रहा. इन देशों ने बातचीत का रास्ता खुला रखने की कोशिश की, ताकि तनाव ज्यादा न बढ़े. भारत के अमेरिका और ईरान दोनों के साथ अच्छे संबंध हैं, इसलिए उसने भी क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए बातचीत को जारी रखने में मदद की. हालांकि यह साफ नहीं है कि इस गुप्त बातचीत का ट्रंप के 5 दिन के युद्ध विराम वाले फैसले पर कितना सीधा असर पड़ा, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि इन देशों के प्रयासों ने युद्ध को और बढ़ने से रोकने में मदद की है.

 अमेरिका और ईरान के बीच दूरी कम करने की कोशिश

इस समय मिडिल ईस्ट में ऐसे  हालात हैं कि एक तरफ युद्ध छिड़ा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ कई देश मिलकर बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं. यह पहली बार है, जब युद्ध के चौथे हफ्ते में इतने सारे देश एक साथ आकर अमेरिका और ईरान के बीच दूरी कम करने की कोशिश कर रहे हैं. इससे यह संकेत मिल रहा है कि आने वाले समय में शांति के लिए बातचीत और तेज हो सकती है.

मिडिल ईस्ट में शांति बहाल करने की पहल

इससे पहले यह भी खबर आई थी कि पाकिस्तान, तुर्किए और मिस्र भी पर्दे के पीछे से दोनों देशों को बातचीत के लिए तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं. साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस तरह की किसी बैठक में शामिल हो सकते हैं. मिडिल ईस्ट की मौजूदा स्थिति को देखा जाए तो दुनिया के कई देश मिलकर इस बड़े संकट को खत्म करने के लिए लगातार कोशिश कर रहे हैं और उम्मीद है कि आने वाले समय में इसका कोई शांतिपूर्ण हल निकल सकता है.

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