Iran US Talks Failure: पाकिस्तान में अमेरिका के साथ हुई अहम बातचीत बेनतीजा रहने के बाद ईरान की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है. ईरानी संसद के स्पीकर और डेलीगेशन लीडर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि ईरान ने पूरी नीयत से बातचीत की, लेकिन पिछले अनुभवों के कारण वह अमेरिका पर भरोसा नहीं कर सकता.

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गालिबाफ ने कहा, “बातचीत से पहले मैंने इस बात पर जोर दिया था कि हमारे पास जरूरी सद्भावना और इच्छाशक्ति है, लेकिन पिछले दो युद्धों के अनुभव के कारण हमें सामने वाले पक्ष पर भरोसा नहीं है.”

ईरानी प्रस्तावों के बावजूद नहीं बन पाया भरोसा

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उन्होंने बताया कि ईरानी डेलीगेशन के सदस्यों ने भविष्य को ध्यान में रखते हुए कई सकारात्मक पहलें रखीं, लेकिन अमेरिकी पक्ष इस दौर की बातचीत में भरोसा जीतने में नाकाम रहा. उन्होंने कहा, “मेरे साथियों ने आगे की सोच के साथ पहल की, लेकिन सामने वाला पक्ष हमारा भरोसा हासिल नहीं कर सका.”

अमेरिका को दी सीधी चेतावनी

गालिबाफ ने कहा, “अमेरिका हमारे तर्क और सिद्धांतों को समझ चुका है, अब यह उसी पर निर्भर है कि वह हमारा भरोसा जीत पाता है या नहीं?” उन्होंने साफ किया कि ईरान बातचीत को अपनी रणनीति का हिस्सा मानता है. उन्होंने कहा, “हम बातचीत को अधिकार आधारित कूटनीति का एक तरीका मानते हैं, जो सैन्य संघर्ष के साथ-साथ चलता है. ईरान की 40 दिनों की राष्ट्रीय रक्षा की उपलब्धियों को मजबूत करने के प्रयास हम एक पल के लिए भी नहीं रोकेंगे.”

पाकिस्तान को कहा- भाई देश

गालिबाफ ने पाकिस्तान के सहयोग की सराहना करते हुए कहा, “मैं इस प्रक्रिया को संभव बनाने में हमारे दोस्त और भाई देश पाकिस्तान के प्रयासों के लिए आभारी हूं और वहां की जनता को शुभकामनाएं देता हूं.” उन्होंने देश की जनता का धन्यवाद करते हुए कहा,“ईरान 9 करोड़ लोगों का देश है. हमारे बहादुर लोगों ने सुप्रीम लीडर की सलाह पर सड़कों पर उतरकर हमारा समर्थन किया और हमें अपनी दुआओं के साथ आगे भेजा, इसके लिए मैं उनका आभारी हूं.”

21 घंटे की बातचीत के बाद टीम की सराहना

अंत में गालिबाफ ने अपने साथियों की तारीफ करते हुए कहा, “मैं 21 घंटे की इस कठिन बातचीत में शामिल अपने साथियों से कहना चाहता हूं, शाबाश, ईश्वर आपको और ताकत दे. हमारा प्यारा ईरान हमेशा जिंदा और मजबूत रहे.”