मिडिल ईस्ट में जारी ईरान-अमेरिका इजरायल युद्ध के 1 महीने बाद युद्धविराम की घोषणा की गई. यह फैसला ठीक उस समय लिया गया, जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी थी कि वे पूरी सभ्यता को खत्म कर देंगे. सीजफायर के ऐलान के बाद पूरी दुनिया ने राहत की सांस ली. करीब एक महीने से ज्यादा समय से चल रही इस जंग के बीच, दोनों देशों ने सिर्फ 90 मिनट पहले सीजफायर पर सहमति बनाई. इस समझौते में ईरान की तरफ से एक अहम भूमिका उसके नए सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई की रही, जो पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के बेटे हैं. रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने पहली बार बातचीत को आगे बढ़ाने का संकेत दिया, जिससे समझौते का रास्ता साफ हुआ.

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Axios की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बताया कि दो हफ्ते के इस युद्ध विराम के दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही जारी रहेगी. यह रास्ता बहुत अहम है, क्योंकि दुनिया के लगभग 20 फीसदी तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरता है. उन्होंने कहा कि यह आवाजाही ईरान की सेना के साथ तालमेल में और तकनीकी बातों का ध्यान रखते हुए होगी. अमेरिका की तरफ से व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने इस समझौते को अमेरिका की जीत बताया. उनका कहना था कि अमेरिकी सेना की कार्रवाई से दबाव बना, जिससे बातचीत का रास्ता खुला और अब शांति की उम्मीद जगी है. सीजफायर का असर दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी दिखा. बाजारों में तेजी आई, क्योंकि लोगों को लगा कि लंबे समय से चल रहा संकट अब खत्म हो सकता है.

पर्दे के पीछे क्या हुआ

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जहां एक तरफ सार्वजनिक तौर पर सख्त बयान दे रहे थे, वहीं दूसरी तरफ पर्दे के पीछे लगातार बातचीत चल रही थी. अमेरिका की सेना मिडिल ईस्ट में बड़े हमले की तैयारी में थी और अधिकारी आखिरी फैसले का इंतजार कर रहे थे. वहीं, इलाके के दूसरे देश भी ईरान की संभावित जवाबी कार्रवाई को लेकर चिंतित थे. इस दौरान अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ लगातार बातचीत में लगे हुए थे. ईरान की तरफ से आया एक प्रस्ताव उन्हें बहुत खराब लगा, जिसके बाद पूरे दिन नए प्रस्तावों और बदलावों का सिलसिला चलता रहा. पाकिस्तान, मिस्र और तुर्किए जैसे देशों ने बीच-बचाव कर दोनों पक्षों को करीब लाने की कोशिश की.

अमेरिका ने नए प्रस्ताव को दी मंजूरी

अमेरिका ने सोमवार (6 अप्रैल 2026) रात तक एक नए प्रस्ताव को मंजूरी दे दी, जिसमें दो हफ्ते के सीजफायर की बात थी. इसके बाद अंतिम फैसला मुज्तबा खामेनेई को लेना था. बताया गया कि वे लगातार इस प्रक्रिया में शामिल थे. हालांकि, सुरक्षा कारणों से वे सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए. रिपोर्ट के अनुसार, खामेनेई की मंजूरी इस पूरे समझौते में सबसे अहम रही. उनके हरी झंडी देने के बाद ही बात आगे बढ़ी. विदेश मंत्री अराघची ने भी बातचीत को आगे बढ़ाने और सेना को मनाने में बड़ी भूमिका निभाई.

चीन ने भी समझौते में निभाई भूमिका

चीन ने भी ईरान को समझौते की ओर बढ़ने की सलाह दी. वहीं, अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी लगातार संपर्क में थे. मंगलवार (7 अप्रैल 2026) तक यह साफ हो गया था कि समझौता हो सकता है, लेकिन इसके बावजूद ट्रंप ने एक बार फिर कड़ी चेतावनी दी. हालांकि, बातचीत जारी रही और आखिरकार कुछ घंटों बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस समझौते की जानकारी सार्वजनिक की. इसके बाद ट्रंप ने भी सोशल मीडिया पर हमले रोकने की बात कही और ईरान ने भी इस पर सहमति जता दी.

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