थम जाएगी जंग! ईरान ने रख दीं 3 शर्तें, अमेरिका और इजरायल से बोला- 'हर्जाना दोगे तभी...'
Iran Peace Conditions: मसूद पेजेश्कियान ने कहा है कि ईरान शांति चाहता है, लेकिन युद्ध खत्म करने के लिए तीन शर्तें रखी गई हैं.

Iran Peace Conditions: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच ईरान की ओर से एक बड़ा बयान सामने आया है. ईरान के राष्ट्रपति ने कहा है कि उनका देश शांति चाहता है, लेकिन युद्ध खत्म करने के लिए कुछ जरूरी शर्तों को मानना होगा. उन्होंने साफ कहा कि यह लड़ाई अमेरिका और इजरायल की वजह से शुरू हुई और इसे खत्म करने के लिए ईरान के अधिकारों को मान्यता देना जरूरी है.
मसूद पेजेश्कियान ने कहा है कि ईरान शांति के लिए प्रतिबद्ध है. इसके साथ ही उन्होंने युद्ध समाप्त करने के लिए तीन शर्तें सामने रखीं. उन्होंने कहा कि यह लड़ाई यहूदी शासन और अमेरिका की वजह से शुरू हुई है और यह तभी खत्म हो सकती है जब ईरान के अधिकारों को स्वीकार किया जाए.
रूस और पाकिस्तान के नेताओं से की बातचीत
राष्ट्रपति ने सामाजिक माध्यम मंच एक्स पर एक संदेश में बताया कि उन्होंने रूस और पाकिस्तान के नेताओं से बातचीत की है. उन्होंने कहा कि इस बातचीत में उन्होंने क्षेत्र में शांति के लिए ईरान की प्रतिबद्धता दोहराई. पेजेश्कियान ने कहा कि इस लड़ाई को खत्म करने का एकमात्र रास्ता यह है कि ईरान के कानूनी अधिकारों को मान्यता दी जाए, हुए नुकसान का हर्जाना दिया जाए और भविष्य में हमलों को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ठोस गारंटी दी जाए.
उन्होंने यह भी कहा कि रूस और पाकिस्तान के नेताओं से बात करते हुए उन्होंने फिर से साफ किया कि इस इलाके में शांति के लिए ईरान अपने वादे पर कायम है. उनके अनुसार यह लड़ाई जायोनी शासन और अमेरिका की वजह से शुरू हुई है और इसे खत्म करने के लिए ईरान के कानूनी अधिकारों को मानना, हर्जाना देना और भविष्य में हमलों के खिलाफ पक्की अंतरराष्ट्रीय गारंटी देना जरूरी है.
कूटनीतिक कोशिशें हुई तेज
ईरानी राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय में आया है जब युद्ध को रोकने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज हो गए हैं. इस बीच रूस लगातार ईरानी नेतृत्व के साथ संपर्क बनाए हुए है और संघर्ष खत्म करने की अपील कर रहा है. पेजेश्कियान ने साफ कर दिया है कि ईरान युद्ध रोकने के लिए तैयार है, लेकिन वह अमेरिका और इजरायल के सामने झुकने के लिए तैयार नहीं है.
ईरान इतनी मजबूती से क्यों बात कर रहा है
ईरान के इस रुख के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर ईरान इतनी मजबूती के साथ अपनी बात कैसे रख रहा है. मध्य पूर्व मामलों के विशेषज्ञ कबीर तनेजा का कहना है कि इसके पीछे तीन बड़े कारण हो सकते हैं.
पहला कारण – विचारधारा से मिलती है ताकत
विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका विरोधी रुख ईरान की क्रांति के मुख्य सिद्धांतों में से एक है. युद्ध की स्थिति में यह विचारधारा सरकार को और मजबूत बना सकती है. इससे उन्नीस सौ उन्यासी की क्रांति के समय से लगाए जा रहे अमेरिका विरोधी नारों को फिर से बढ़ावा मिल सकता है.
दूसरा कारण – नेतृत्व की स्थिति मजबूत करना
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे युद्ध के समय देश का सर्वोच्च धार्मिक नेता अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है. अली खामेनेई की हत्या के बाद सर्वोच्च नेता बने मोजतबा खामेनेई के लिए यह मौका देश के अलग अलग गुटों का समर्थन हासिल करने में मददगार हो सकता है.
तीसरा कारण – सैन्य संगठन की साख का सवाल
तीसरा कारण ईरान की शक्तिशाली सुरक्षा इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स से जुड़ा है. पिछले कुछ वर्षों में इस संगठन को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, खासकर अयातुल्ला खामेनेई की हत्या के बाद. विशेषज्ञों का कहना है कि सर्वोच्च नेता की सत्ता के केंद्र के रूप में यह संगठन अपनी ताकत और प्रभाव बनाए रखने के लिए युद्ध को अपने अस्तित्व से जुड़ा मुद्दा मान सकता है.
Source: IOCL



























