IRGC से ईरान के सुप्रीम लीडर तक... कैसे और क्यों मुज्तबा बने पिता खामेनेई के उत्तराधिकारी?
Iran New Supreme Leader: मुज्तबा खामेनेई के बारे में कहा जाता है कि वे अपने पिता अयातुल्लाह खामेनेई के नेतृत्व में बड़े बिजनेस नेटवर्क का संचालन करते थे.

अयातुल्लाह अली खामेनेई के बेटे मुज्तबा खामेनेई (56 साल) को ईरान का नया सर्वोच्च नेता चुना गया है. ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा कि मुज्तबा खामेनेई की नियुक्ति ‘गरिमा और ताकत के नए युग’ की शुरुआत है. मुज्तबा को इसलिए चुनाव गया है क्योंकि इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड्स कोर (IRGC) में उनकी बड़ी पकड़ है. यही वो सेना है जो वर्तमान में अमेरिका-इजरायल के साथ चल रहे युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. मुज्तबा खामेनेई ने खुद 1987 मे IRGC का हिस्सा होकर ईरान-इराक़ जंग में भाग लिया था, जिस कारण IRGC के लिए वो सबसे बेहतर विकल्प थे.
मुज्तबा खामेनेई को क्यों चुना गया सुप्रीम लीडर?
मुज्तबा खामेनेई सिर्फ इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड्स कोर में ही नहीं, बल्कि ईरान की केंद्रीय राजनीति में भी काफी सक्रिय थे. समय समय पर वह अपने पिता और तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई को सलाह भी देते थे. साथ ही ईरान की सेना हो या फिर मजहबी गुट सभी में उनकी स्वीकारता थी. ऐसे में अयातुल्लाह अली खामेनेई के दूसरे बेटे मुज्तबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर चुना गया, जो आईआरजीसी, सेना, राजनीतिक लीडरशिप और मजहबी गुटों सभी को साथ लेकर चल सके और सब में स्वीकारता हो.
हिजबुल्लाह और हूती ग्रुप रहेंगे एकजुट
मुज्तबा खामेनेई के खुद के पिता की जान इजरायल-अमेरिका के हमले में हुई है. ऐसे में सुप्रीम लीडर के पद के लिए ऐसे व्यक्ति को ध्यान में रखा गया जो ईरान के हितों के साथ सत्ता के लिए समझौता नहीं करेगा. मुज्तबा खामेनेई के सर्वोच्च नेता बनने के बाद ईरान के प्रॉक्सी ग्रुप हिजबुल्लाह, हूती भी एकजुट रहेंगे. साथ ही उनका IRGC में अनुभव इस जंग में काम आएगा. अमेरिका के लिए मुज्तबा खामेनेई को मारना मुश्किल होगा क्योंकि जिस तरह से बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी पूरी टीम 8 फीट गहरे बंकर में सुरक्षित रह रही है उसी तरह मुज्तबा भी रह रहे हैं.
मुज्तबा खामेनेई के बारे में कहा जाता है कि वे अपने पिता अयातुल्लाह खामेनेई के नेतृत्व में बड़े बिजनेस नेटवर्क का संचालन करते थे. उन्हें रविवार को होने वाले वोट से पहले विशेषज्ञों की असेंबली ने सबसे आगे माना था. असेंबली 88 मौलवियों की एक बॉडी है जिसे अली खामेनेई का वारिस चुनने का काम सौंपा गया.
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