Explained: ईरान की लीडरशिप में फूट! IRGC के दखल से संसद परेशान और मुज्तबा का पता नहीं, क्या बिखर जाएगी सत्ता?
Iran Leadership Rift: अमेरिका और इजरायल के हमलों से कुछ दिनों राहत में रहा ईरान, अब नई मुसीबत में फंस गया है. ईरान की लीडरशिप में अंतरकलह शुरू हो गई है और इस बीच मुज्तबा खामेनेई भी गायब हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को सोशल मीडिया पर लिखा- ईरान आर्थिक रूप से टूट रहा है. उसके पास पैसों की कमी हो रही है, इसलिए तुरंत होर्मुज स्ट्रेट खोलना चाहता है. वहीं, ईरान के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि अमीर सईद इरावानी ने कहा है कि नाकेबंदी हटने के बाद ही अमेरिका से बातचीत हो सकती है. इससे लग रहा है कि सबकुछ ठीक है, लेकिन IRGC इसके उलट बयान दे रही है. IRGC के केंद्रीय मुख्यालय खातम अल-अनबिया के प्रवक्ता इब्राहिम जोल्फागरी ने कहा कि अमेरिका और इजरायल को पहले से ज्यादा बड़ा सबक सिखाएंगे. यानी ईरान में अंतरकलह शुरू हो चुकी है. हालांकि, इसके संकेत काफी पहले से मिलने लगे थे. तो क्या ईरान को अपने चिराग से ही आग लग जाएगी? जानेंगे एक्सप्लेनर में...
सवाल 1: क्या ईरान की लीडरशिप में सच में फूट है या यह सिर्फ मीडिया की अफवाह है?
जवाब: हां. ईरान की लीडरशिप में फूट के साफ संकेत मिल रहे हैं, लेकिन यह कोई आसान 'सिविलियन vs मिलिट्री' वाली लड़ाई नहीं है. यह मुख्य रूप से रीजनल पावर वैक्यूम और युद्ध के बाद नई पावर बैलेंसिंग का नतीजा है. अमेरिकी थिंकटैंक इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर (ISW) ने साफतौर पर 'शासन के भीतर गंभीर लड़ाई' की बात कही है.
एक तरफ संसद स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ जैसे प्रैग्मेटिक नेता हैं जो डिप्लोमेसी और बातचीत से आगे बढ़ना चाहते हैं. दूसरी तरफ इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर मेजर जनरल अहमद वाहिदी और हार्डलाइनर्स हैं जो अमेरिका के साथ किसी भी समझौते को कमजोरी मानते हैं. यह बहस इसलिए और गहरी हो गई है क्योंकि सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई की सेहत और मौजूदगी पर सवाल उठ रहे हैं. कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि वे कोम में इलाज करा रहे हैं और कई अधिकारी उनसे सीधे संपर्क नहीं कर पा रहे, जिससे फैसले लेने में देरी हो रही है.
सवाल 2: यह फूट कब और कैसे सबसे पहले सामने आई?
जवाब: यह सब अप्रैल 2026 के बीच में उजागर हुआ, खासकर 17-19 अप्रैल के आसपास. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया पर घोषणा करते हुए कहा कि होर्मुज स्ट्रेट कमर्शियल शिपिंग के लिए पूरी तरह खुला है. यह अमेरिका के साथ चल रही बातचीत में लचीले रुख का संकेत था, लेकिन उसी समय IRGC की नेवल फोर्स ने मरीन रेडियो पर संदेश भेजा कि होर्मुज अभी भी बंद है और जहाजों को IRGC की अनुमति लेनी होगी.
IRGC से जुड़ी तस्नीम न्यूज एजेंसी ने विदेश मंत्रालय की इस घोषणा पर सवाल उठाए. ईरानी संसद के एक सीनियर सदस्य मुर्तजा महमूदी ने अराघची को हटाने की मांग कर दी. 18 अप्रैल को ईरानी आर्म्ड फोर्सेस ने औपचारिक रूप से U-turn लेते हुए कहा कि अमेरिका की नेवल ब्लॉकेड जारी रहने तक होर्मुज स्ट्रेट बंद रहेगा. यह घटना तुरंत इंटरनेशनल मीडिया में 'लीडरशिप रिफ्ट' के रूप में छाई, जहां गालिबाफ डिप्लोमेसी के पक्ष में हैं और वाहिदी मिलिट्री रिस्पॉन्स पर अपना कंट्रोल बढ़ा रहे हैं.
सवाल 3: इसमें बड़ा खिलाड़ी कौन हैं और उनकी भूमिका क्या है?
जवाब: ईरान में फिलहाल कोई एक बड़ा खिलाड़ी नहीं है. बल्कि 5 बड़े नाम है:
- सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई: मार्च 2026 में अपने पिता आयतुल्लाह अली खामेनी की मौत के बाद लीडर बने. कुछ रिपोर्ट्स में उनके स्वास्थ्य पर सवाल हैं और कहा जा रहा है कि कई अधिकारी उनसे संपर्क नहीं कर पा रहे, जो नेगोशिएशन में बड़ी बाधा है.
- मोहम्मद बाघेर गालिबाफ (ईरानी संसद स्पीकर): वे डिप्लोमेसी के सबसे बड़े समर्थक हैं. 11-12 अप्रैल को पाकिस्तान में US के साथ पहले राउंड की बातचीत का नेतृत्व किया. ISW के मुताबिक वे अंदरूनी खींचतान में IRGC कमांडर के खिलाफ खड़े हैं. उनका मानना है कि बातचीत से उनकी घरेलू पोजीशन मजबूत रहेगी, लेकिन वे डरते हैं कि अगर IRGC का कंट्रोल बढ़ा तो उनका और अराघची का पद भी खतरे में पड़ सकता है.
- मेजर जनरल अहमद वाहिदी (IRGC कमांडर): वे बातचीत के सबसे बड़े विरोधी हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक वे मुज्तबा खामेनेई के साथ सीधा संपर्क रखने वाले इकलौते अधिकारी हैं. वे मिलिट्री रिस्पॉन्स और नेगोशिएशन पॉलिसी पर अपना कंट्रोल बढ़ा रहे हैं. ISW कहता है कि वाहिदी और उनके करीबी IRGC के अंदरूनी दायरे ने मिलिट्री के साथ-साथ नेगोशिएशन पॉलिसी पर भी कब्जा कर लिया है.
- अब्बास अराघची (विदेश मंत्री): उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट खोलने की घोषणा की, लेकिन हार्डलाइनर्स ने उनकी टाइमिंग और भाषा पर हमला किया गया.
- स्टेबिलिटी फ्रंट (Jebhe-ye Paydari) और हार्डलाइनर्स: ये अल्ट्रा-हार्डलाइनर्स संसद और स्टेट टीवी पर मजबूत हैं. वे किसी भी नरम कदम को कैपिटुलेशन मानते हैं.
सवाल 4: होर्मुज स्ट्रेट का मुद्दा क्यों टेढ़ी खीर बन गया है और इसमें क्या यू-टर्न हुआ?
जवाब: होर्मुज स्ट्रेट दुनिया की एनर्जी सप्लाई का गला है. ईरान ने इसे हथियार बनाया. पहले सीजफायर के तहत खोला गया, लेकिन अमेरिकी ब्लॉकेड जारी रहने पर अराघची ने फिर से खुला घोषित किया. IRGC ने तुरंत विरोध किया और कहा 'बंद रहेगा'. संसद एक बिल बना रही है जिसमें इजरायल से जुड़े जहाजों पर बैन, 'होस्टाइल कंट्रीज' के जहाजों को सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की अनुमति जरूरी और नुकसान पहुंचाने वाले देशों को मुआवजे तक बंद रखने का प्रस्ताव है.
सवाल 5: यह फूट ईरान की पूरी व्यवस्था को कितना कमजोर कर रही है?
जवाब: यह फूट रीजनल पावर वैक्यूम और युद्ध के बाद की सिचुएशन का नतीजा है. IRGC युद्ध में सबसे मजबूत निकला है, जबकि सिविलियन लीडरशिप डिप्लोमेसी से अपना बचाव करना चाहती है. मुज्तबा खामेनेई की नई भूमिका में अभी 'कंसेंसस बिल्डिंग' चल रही है, न कि एकतरफा फैसले. लेकिन कई एनालिस्ट कहते हैं कि यह 'टैक्टिकल डिबेट' है, न कि व्यवस्था को तोड़ने वाली. रीजन अभी भी एकजुट दिख रहा है, लेकिन बाहरी दबाव इसे और बढ़ा रहा है. ईरान की लीडरशिप में तनाव साफ है, लेकिन यह 1979 की क्रांति वाली पूरी व्यवस्था को अभी तोड़ने जितना बड़ा नहीं दिखता. यह युद्ध के बाद की नई पावर बैलेंसिंग का हिस्सा है.
कुल मिलाकर IRGC का बढ़ता कंट्रोल डिप्लोमेसी को मुश्किल बना रहा है. अगर ईरान बेहतर प्रपोजल नहीं दे पाया तो सीजफायर खत्म हो सकता है. ईरान में यह फूट पोस्ट-खामेनी ट्रांजिशन का नतीजा है. मुज्तबा खामेनेई की पोजीशन अभी पूरी तरह मजबूत नहीं लगती. अगर IRGC पूरी तरह कंट्रोल ले ले तो हार्डलाइन पॉलिसी बढ़ेगी, लेकिन गालिबाफ जैसे प्रैग्मेटिस्ट्स अगर सफल हुए तो सीजफायर परमानेंट डील में बदल सकता है.


























