Seyed Abbas Araghchi: ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र निरस्त्रीकरण सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि परमाणु हथियार पूरी मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं. वह यहां ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु मुद्दे पर अप्रत्यक्ष बातचीत और प्रतिबंध हटाने के प्रयास के लिए पहुंचे थे.

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अराघची ने कहा कि आज भी दुनिया करीब 12 हजार परमाणु हथियारों के डर में जी रही है. इनमें से कई हथियार हाई अलर्ट पर रखे गए हैं और कुछ देशों की नीति में इनके पहले इस्तेमाल तक की बात शामिल है. उन्होंने कहा कि यह स्थिति परमाणु अप्रसार संधि यानी एनपीटी की भावना के खिलाफ है.

ईरान का परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण

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ईरान के विदेश मंत्री ने साफ कहा कि उनका देश न तो परमाणु हथियार बनाना चाहता है और न ही उन्हें हासिल करना चाहता है. उन्होंने कहा कि ईरान की सुरक्षा नीति में परमाणु हथियारों की कोई जगह नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि परमाणु ऊर्जा का शांतिपूर्ण उपयोग हर एनपीटी सदस्य देश का अधिकार है और इसे राजनीतिक शर्तों से नहीं जोड़ा जाना चाहिए.

अमेरिका पर लगाए आरोप

अराघची ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि उसने अपने वादों का बार बार उल्लंघन किया. उन्होंने कहा कि अमेरिका ने जेसीपीओए समझौते से एकतरफा बाहर निकलकर कूटनीति को नुकसान पहुंचाया और बाद में ईरान की शांतिपूर्ण परमाणु सुविधाओं पर हमला भी किया. उन्होंने कहा कि ईरान पर लगाए गए प्रतिबंध और सैन्य धमकी अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ हैं और इन्हें खत्म होना चाहिए.

इजरायल पर भी निशाना

ईरान के विदेश मंत्री ने अमेरिका और कुछ यूरोपीय देशों की आलोचना करते हुए कहा कि वे इजरायल के परमाणु हथियारों और क्षेत्र में उसकी कार्रवाई पर चुप रहते हैं, लेकिन ईरान के शांतिपूर्ण कार्यक्रम को खतरा बताते हैं. उन्होंने कहा कि पिछले कई दशकों में इजरायल ने क्षेत्र में गंभीर हमले किए हैं और गाजा में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है.

आईएईए से सहयोग जारी रहेगा

अराघची ने कहा कि ईरान अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के साथ अपने कानूनी दायरे में सहयोग करता रहेगा. उन्होंने एजेंसी के महानिदेशक के साथ हाल की तकनीकी बातचीत का भी जिक्र किया.

अमेरिका से बातचीत पर उम्मीद

जिनेवा में ईरान और अमेरिका के बीच दूसरे दौर की बातचीत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ईरान पूरी गंभीरता और अच्छे इरादे से बातचीत में शामिल हुआ है. उन्हें उम्मीद है कि यह बातचीत स्थायी समाधान की दिशा में आगे बढ़ेगी. अपने भाषण के अंत में उन्होंने कहा, या तो दुनिया परमाणु हथियार खत्म करेगी या एक दिन यही हथियार दुनिया को खत्म कर देंगे. उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर राजनीतिक इच्छा शक्ति हो तो परमाणु हथियारों से मुक्त दुनिया का सपना पूरा किया जा सकता है.