अमेरिका द्वारा रविवार तड़के ईरान के दक्षिणी तटीय इलाके में स्थित कई सैन्य निगरानी और सर्विलांस ठिकानों पर किए गए हवाई हमलों के बाद ईरान का पहला आधिकारिक बयान सामने आया है. ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और युद्धविराम समझौते का खुला उल्लंघन बताया है. मंत्रालय ने कहा कि ईरान अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा.
अमेरिका पर युद्धविराम समझौता तोड़ने का आरोपईरान के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि 28 जून 2026 की सुबह अमेरिकी सैन्य बलों ने देश के दक्षिणी तट पर स्थित कई निगरानी और सर्विलांस सुविधाओं पर हवाई हमले किए. मंत्रालय ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई 18 जून 2026 को हुए युद्ध समाप्ति समझौते (Memorandum of Understanding on the Termination of the Imposed War) के पहले अनुच्छेद का स्पष्ट उल्लंघन है.
'संयुक्त राष्ट्र चार्टर का भी हुआ उल्लंघन'विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिकी हमले संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) का भी गंभीर उल्लंघन हैं, जो किसी भी देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ बल प्रयोग पर रोक लगाता है. ईरान ने इन हमलों को 'बर्बर' बताते हुए कहा कि अमेरिका ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह अपने अंतरराष्ट्रीय वादों और समझौतों का सम्मान नहीं करता. मंत्रालय के अनुसार, समझौतों का उल्लंघन करना अमेरिकी शासन की स्वाभाविक प्रवृत्ति बन चुकी है.
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संयुक्त राष्ट्र से की हस्तक्षेप की मांगईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और संयुक्त राष्ट्र महासचिव से अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने की अपनी जिम्मेदारी निभाने की अपील की. विदेश मंत्रालय ने कहा कि वैश्विक संस्थाओं को इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए.
'हर सैन्य आक्रमण का जवाब देने का अधिकार सुरक्षित'ईरान ने अपने बयान में दोहराया कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत उसे आत्मरक्षा का पूरा अधिकार है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान अमेरिकी सैन्य आक्रमण के खिलाफ अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और जरूरत पड़ने पर उचित जवाब देगा.
