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सिंधु जल संधि निलंबित किए जाने से पाकिस्तान बुरी बौखलाया हुआ है और एक बार फिर उसने इंटरनेशनल फोरम पर अपनी भड़ास निकाली है. पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने दुनिया के सामने गिड़गिड़ाते हुए कहा कि पानी को पाकिस्तान के खिलाफ हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है.

समा टीवी की रिपोर्ट के अनुसारआसिफ अली जरदारी ने कतर की राजधानी दोहा में यूनाइटेड नेशंस वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस ऑन सोशल डेवलपमेंट में यह मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि पानी को पाकिस्तान के खिलाफ हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है इसलिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से न्याय, शांति और समानता बनाए रखने के लिए वह आग्रह करते हैं.

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आसिफ अली जरदारी ने कहा कि इंडस वॉटर ट्रीटी को सस्पेंड किया जाना 24 करोड़ पाकिस्तानियों के लिए गंभीर खतरा है. उन्होंने भारत को गिदड़भभकी भी दी है. उन्होंने जोर देकर कहा कि यह कदम पूरे पाकिस्तान को पानी से वंचित करने के बराबर है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है. पाकिस्तानी राष्ट्रपति ने कहा, 'हम कभी इस तरह दबाव बनाने की रणनीति को कामयाब होने नहीं देंगे.' आसिफ अली जरदारी का यह भी कहना है कि भारत ने इंडस वॉटर ट्रीटी को तोड़कर अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन किया है. उन्होंने इेस क्षेत्रीय स्थिरता पर सीधा हमला बताया है.

आसिफ अली जरदारी ने अपनी भड़ास निकालते हुए कहा, 'पानी को पाकिस्तान के खिलाफ हथियार बनाकर इस्तेमाल किया जा रहा है. ट्रीटी निलंबित करना करोड़ों पाकिस्तानियों को पानी के अधिकार से वंचित करना है.' उन्होंने फिर से गीदड़भभकी देते हुए कहा कि पाकिस्तान ऐसे किसी भी प्रयास का विरोध करता है, जो उसकी संप्रभुता और उसके लोगों की आजीविका के लिए खतरा है. आसिफ अली जरदारी यहीं नहीं रुके उन्होंने कश्मीर का मुद्दा भी उठाया. जरदारी ने कहा कि फिलिस्तीन और कश्मीर का मुद्दा एक ही सिक्के के दो पहलू हैं.

22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले में 26 मासूमों की निर्मम हत्या किए जाने के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान को लेकर सख्त कदम उठाए थे, जिसमें सिंधु जल संधि को निलंबित किया जाना भी शामिल है. पाकिस्तान को सबसे ज्यादा परेशानी इसी से है. वह बार-बार इस मुद्दे को उठाता है. वह भारत से बात करने की पेशकश भी कर चुका है, लेकिन भारत का रुख साफ है कि पहले आतंक के मुद्दे पर बात होगी, उसके बाद ही किसी और मसले पर चर्चा करेंगे.

19 सितंबर, 1960 को विश्व बैंक की मध्यस्थता से भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि हुई थी, जिसके तहत 6 नदियों के पानी का बंटवारा किया गया था. ब्यास, रावी और सतलुज नदी का पानी भारत को दिया गया, जबकि चिनाब, झेलम और सिंधु का पानी पाकिस्तान को.