हिंद महासागर में डूबे ईरानी फ्रिगेट IRIS डेना को बचाने के लिए भारतीय नौसेना ने खोज और बचाव अभियान शुरू किया है. नेवी के एक बयान के अनुसार IRIS डेना से संकट का संदेश 4 मार्च की सुबह कोलंबो स्थित समुद्री बचाव समन्वय केंद्र (एमआरसीसी) को प्राप्त हुआ, जिसके बाद ये अभियान शुरू किया गया है. अमेरिका ने पनडुब्बी से ईरानी वॉरशिप पर हमला किया है.

ईरानी फ्रिगेट गाले से 20 समुद्री मील दूर पश्चिम में है, जो श्रीलंका के खोज और बचाव क्षेत्र के अंतर्गत आता है. सूचना मिलते ही भारतीय नौसेना ने तुरंत बचाव अभियान शुरू कर दिया है.

भारत का समुद्री गश्ती विमान ऑपरेशन में शामिल नौसेना के अनुसार श्रीलंका के नेतृत्व में पहले से चल रहे खोज अभियानों में सहायता के लिए 4 मार्च को सुबह 10 बजे एक लंबी दूरी का समुद्री गश्ती विमान तैनात किया गया है और एक दूसरे विमान को किसी भी इमरजेंसी से निपटने के लिए स्टैंडबाय पर रखा गया है. पास के क्षेत्र में तैनात प्रशिक्षण पोत आईएनएस तरंगिनी को सहायता का आदेश मिला और वह उसी दिन शाम 4 बजे तक खोज क्षेत्र में पहुंच गया.

सर्वेक्षण पोत आईएनएस इक्षक भी अभियान में सहयोग देने के लिए कोच्चि से रवाना हुआ. यह पोत अभी भी लापता लोगों की तलाश कर रहा है और जहाज़ दुर्घटना में फंसे लोगों के लिए मानवीय सहायता के रूप में काम कर रहा है

अमेरिका ने किया था हमलाभारतीय नौसेना और श्रीलंका के अधिकारी आपसी समन्वय से काम कर रहे हैं. यह घटना 4 मार्च को हुई जब एक अमेरिकी पनडुब्बी ने श्रीलंका के दक्षिणी तट पर स्थित गाले से लगभग 40 समुद्री मील दूर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में ईरानी फ्रिगेट को टॉरपीडो से निशाना बनाया. जहाज ने सुबह विस्फोट की सूचना देते हुए संकटकालीन संदेश भेजा, लेकिन श्रीलंकाई बचाव जहाजों के घटनास्थल पर पहुंचने से पहले ही वह डूब चुका था. यह हमला गाले के मुख्य नौसैनिक अड्डे से लगभग एक घंटे की दूरी पर हुआ..अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने पेंटागन में इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए इसे टॉरपीडो से हासिल शांत मौत बताया. उन्होंने कहा कि यह ईरान पर अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले से शुरू हुए अभियानों का एक महत्वपूर्ण विस्तार है.

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