Weather News: कहीं बारिश-बाढ़ तो कहीं झुलसा देने वाली गर्मी, दुनिया में बदलते मौसम के पैटर्न ने बढ़ाई वैज्ञानिकों की चिंता
World Weather: दुनिया भर में मौसम के हालात तेजी से बदल रहे हैं. भारत में जून में सूखा और जुलाई में बाढ़ जैसे हालात देखने को मिले, जबकि यूरोप रिकॉर्ड गर्मी की चपेट में है.

दुनिया के कई हिस्सों में इस समय मौसम के बेहद असामान्य और खतरनाक बदलाव देखने को मिल रहे हैं. दुनिया के किसी हिस्से में भीषण गर्मी पड़ रही है, कहीं सूखे जैसे हालात हैं तो कहीं अचानक भारी बारिश और बाढ़ लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है. वैज्ञानिकों का मानना है कि एल-नीनो और बढ़ते वैश्विक तापमान का असर अब साफ तौर पर दिखाई देने लगा है.
भारत और दक्षिण एशिया में इस साल मौसम का मिजाज काफी बदला हुआ रहा. जून और जुलाई के दौरान देशभर में सामान्य से करीब 40 से 42 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई. जून का महीना पिछले 100 वर्षों के सबसे सूखे जून महीनों में तीसरे स्थान पर रहा. मध्य भारत में बारिश की कमी लगभग 50 प्रतिशत तक पहुंच गई, जिससे कई इलाकों में भीषण गर्मी और लू का सामना करना पड़ा.
हालांकि जुलाई में स्थिति अचानक बदल गई. मुंबई, दिल्ली और पुणे जैसे बड़े शहरों में तेज और लगातार बारिश हुई. कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए, सड़कें पानी में डूब गईं और कई जगह भूस्खलन की घटनाएं भी सामने आईं. विशेषज्ञों के अनुसार, एल-नीनो की वजह से मानसून कमजोर पड़ा, लेकिन स्थानीय मौसम सिस्टम के कारण कुछ क्षेत्रों में बहुत अधिक बारिश हुई. अब पाकिस्तान की ओर से आने वाली सूखी हवाओं ने उत्तर भारत में बारिश की रफ्तार फिर धीमी कर दी है.
ये भी पढ़ें: वियतनाम बोट एक्सीडेंट में जान गंवाने वालों के शव लाए जाएंगे भारत, दूतावास ने क्या-क्या बताया?
यूरोप में शरीर जलाने वाली गर्मी की मार
यूरोप भी इस समय गंभीर गर्मी की मार झेल रहा है. जून 2026 यूरोप के इतिहास का सबसे गर्म जून महीना दर्ज किया गया. फ्रांस की राजधानी पेरिस में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया, जबकि ब्रिटेन, फ्रांस, स्पेन और इटली में कई पुराने रिकॉर्ड टूट गए. सबसे बड़ी चिंता यह रही कि रात के समय भी तापमान काफी ऊंचा बना रहा, जिससे लोगों को गर्मी से राहत नहीं मिल सकी. जुलाई में भी यूरोप को गर्मी से कोई खास राहत नहीं मिली है. जून के आखिर में पड़ी रिकॉर्ड गर्मी के दौरान 10,000 से अधिक अतिरिक्त मौतें दर्ज की गईं. यूरोमोमो (EuroMOMO) के आंकड़ों के अनुसार, इनमें 9,000 से ज्यादा मौतें 65 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों की थीं. विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार गर्म रातें और लंबे समय तक बनी रहने वाली गर्मी बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक साबित हुई.
दुनिया के तमाम देशों के मौसम का हाल
ब्राजील, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया में भी मौसम के अलग-अलग और चरम प्रभाव देखने को मिल रहे हैं. कुछ क्षेत्रों में सूखे की स्थिति बनी हुई है, जबकि कई जगहों पर भारी बारिश और बाढ़ ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. इन क्षेत्रों में मौसम का असंतुलन कृषि, जल संसाधनों और आम जीवन पर असर डाल रहा है. एक्सपर्ट्स के अनुसार, इन सभी बदलावों के पीछे एल-नीनो एक बड़ी वजह है. एल-नीनो प्रशांत महासागर के पानी को सामान्य से ज्यादा गर्म कर देता है, जिसका असर पूरी दुनिया के मौसम पर पड़ता है. इस बार एल-नीनो के बहुत मजबूत या सुपर स्तर तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है. इसके कारण जिन इलाकों में पहले से सूखे जैसी स्थिति है, वहां गर्मी और सूखा और बढ़ सकता है, जबकि कुछ अन्य क्षेत्रों में भारी बारिश और बाढ़ की घटनाएं बढ़ सकती हैं.
समुद्र की सतह का तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया
एक और चिंता की बात यह है कि जून 2026 में समुद्र की सतह का तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. वैज्ञानिकों का कहना है कि दुनिया में बढ़ रही अतिरिक्त गर्मी का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा महासागर अपने अंदर सोख रहे हैं. समुद्र का लगातार गर्म होना ग्लोबल वेदर सिस्टम को इम्पेक्ट कर रहा है और इससे भविष्य में और अधिक चरम मौसम घटनाएं देखने को मिल सकती हैं. मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया अब ऐसे दौर में पहुंच रही है जहां सूखा, बाढ़, हीटवेव और भारी बारिश जैसी घटनाएं पहले की तुलना में अधिक बार और अधिक गंभीर रूप में देखने को मिल सकती हैं. यही कारण है कि जलवायु परिवर्तन और मौसम से जुड़ी चुनौतियां अब पूरी दुनिया के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुकी हैं.
ये भी पढ़ें: Iran Nuclear Plant: ईरान का बुशहर न्यूक्लियर प्लांट अमेरिका ने किया तबाह? तेहरान ने जारी कर दिया बयान, जानें क्या कहा























