दुनिया में मौजूद कोई भी इंसान किसी दूसरे देश घूमने, पढ़ने या नौकरी करने के इरादे से जाता है तो उसके मन में करेंसी को लेकर सवाल जरूर आता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हर देश की करेंसी की कीमत एक-दूसरे से अलग होती है. भारत की करेंसी की कीमत साउथ कोरिया में ज्यादा है. दोनों देश एशिया की मजबूत अर्थव्यवस्थाएं हैं, लेकिन उनकी करेंसी की वैल्यू में बड़ा अंतर है.

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वाइस डॉट कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक साउथ कोरिया में एक भारतीय रुपये की वैल्यू वहां के 16 साउथ कोरियाई वॉन के बराबर होती है. इस हिसाब से अगर किसी के पास भारत में एक लाख रुपये हैं तो दक्षिण कोरिया में उसकी कीमत करीब 16 लाख वॉन होती है.

दक्षिण कोरियाई वॉन क्या है और कौन जारी करता है?

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साउथ कोरिया की आधिकारिक मुद्रा को दक्षिण कोरियाई वॉन कहा जाता है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे KRW के नाम से पहचाना जाता है. इस मुद्रा को देश का केंद्रीय बैंक, बैंक ऑफ कोरिया जारी करता है, जिसका मुख्यालय सियोल में स्थित है. साउथ कोरिया में 1, 5, 10, 50, 100 और 500 वॉन के सिक्के और 1,000, 5,000, 10,000 और 50,000 वॉन के नोट चलते हैं. आज जो वॉन दक्षिण कोरिया में इस्तेमाल होता है, उसे आधिकारिक रूप से 1962 में लागू किया गया था. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जब कोरिया जापानी शासन से मुक्त हुआ तब पहली बार वॉन को अपनाया गया.

दक्षिण कोरिया में चलन में कौन-कौन से नोट और सिक्के हैं?

दक्षिण कोरिया में नकद लेन-देन के लिए अलग-अलग मूल्य के नोट और सिक्के प्रचलन में हैं. छोटे खर्चों के लिए सिक्कों का इस्तेमाल होता है, जबकि बड़े लेन-देन आमतौर पर बैंक नोट्स से किए जाते हैं. डिजिटल पेमेंट भी वहां तेजी से लोकप्रिय हो चुका है, लेकिन वॉन ही हर लेन-देन की आधार मुद्रा है. 

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