संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के साथ स्ट्रेटेजिक डिफेंस पार्टनरशिप करने के बाद अब भारत सऊदी अरब के साथ आतंक के खिलाफ लड़ाई में बड़ा समझौता करने वाला है. बुधवार (28 जनवरी) को भारत और सऊदी अरब ने रियाद में उच्च स्तरीय सुरक्षा और आतंकवाद को लेकर बातचीत की. 

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भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार यह बैठक क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा चिंताओं के बीच हुई और इसमें आतंकवाद विरोधी उपायों, कानूनी सहयोग और उभरते खतरों पर फोकस किया गया. रणनीतिक साझेदारी परिषद की राजनीतिक, कांसुलर और सुरक्षा सहयोग समिति के तहत भारत-सऊदी अरब सुरक्षा कार्य समूह की तीसरी बैठक 28 जनवरी को आयोजित की गई थी.

'आतंकवाद के सभी रूपों की कड़ी निंदा' विदेश मंत्रालय ने बताया कि सुरक्षा सहयोग को लेकर समीक्षा की गई और वैश्विक स्तर पर अपने-अपने क्षेत्रों में आतंकवादी समूहों से होने वाले खतरों का व्यापक स्तर पर आकलन किया गया. भारत और सऊदी अरब दोनों ने सीमा पार आतंकवाद सहित आतंकवाद के सभी रूपों की कड़ी निंदा की. अधिकारियों ने विशेष रूप से जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल, 2025 को नागरिकों पर हुए आतंकवादी हमले और नई दिल्ली में लाल किले के पास 10 नवंबर को हुई आतंकी घटना की निंदा की.

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किन मुद्दों पर हुई बातचीतदोनों पक्षों ने बैठक के दौरान वर्तमान और उभरती आतंकवाद विरोधी चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग को मजबूत करने पर बातचीत की. इनमें उग्रवाद और कट्टरता का मुकाबला करना, आतंकवाद के फंड को रोकना, आतंकी मकसदों के लिए टेक्नोलॉजी के दुरुपयोग को रोकना और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध और आतंकवाद के बीच के गठजोड़ को संबोधित करना शामिल था.

सऊदी और UAE दोनों से भारत के अच्छे रिश्तेये बातचीत इसलिए भी अहम है क्योंकि अभी हाल ही में यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की नई दिल्ली यात्रा के दौरान दोनों देशों ने स्ट्रेटेजिक डिफेंस पार्टनरशिप को लेकर एक डील साइन की है. भारत के प्रमुख साझेदार संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब के बीच यमन और उत्तरी अफ्रीका के कुछ हिस्सों में अलग-अलग मामलों को लेकर तनाव देखा गया है. हालांकि भारतीय अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया है कि अबू धाबी के साथ नई दिल्ली का रक्षा सहयोग किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं है बल्कि भारत के हितों को देखते हुए समझौता किया गया है.

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