भारत ने बांग्लादेश को दिया कितना कर्ज, किन कामों में हो रहा इस्तेमाल? जानें सब कुछ
बांग्लादेश में भारत ने हजारों करोड़ का निवेश कर रखा है. पड़ोसी देश के विकास के लिए भारत ने करीब 8 अरब डॉलर यानी करीब 70 हजार करोड़ रुपये की क्रेडिट लाइन दे रखी है.

पड़ोसी देश बांग्लादेश के जन्म से लेकर उसे अपने पैरों पर खड़ा करने तक भारत ने हर तरह से उसकी पूरी मदद की. मोहम्मद यूनुस के शासन के दौरान नई दिल्ली से ढाका के रिश्ते बेहद तल्ख रहे और अब बांग्लादेश की डोर तारिक रहमान के हाथों में है. उम्मीद है कि उनके शासन के दौरान दोनों देशों के रिश्ते बेहतर होंगे. बांग्लादेश को भारत ने 70 हजार करोड़ रुपये का कर्ज दे रखा है. इसके अलावा भारत ने बांग्लादेश में करीब 93 प्रोजेक्ट में पैसे लगाए हैं.
भारत ने बांग्लादेश को डायरेक्ट कर्ज नहीं दिया है, लेकिन लाइन ऑफ क्रेडिट के रूप में बड़ी रकम उपलब्ध कराई है. ढाका इस क्रेडिट का इस्तेमाल देश में इन्फ्रा परियोजनाओं, रेल, सड़क और बंदरगाह बनाने में कर सकता है. भारत ने करीब 8 अरब डॉलर यानि करीब 70 हजार करोड़ रुपये की क्रेडिट लाइन दी है. इसमें पहली क्रेडिट लाइन साल 2010 में 1 अरब डॉलर दी थी. साल 2016 में 2 अरब डॉलर और दिए, जबकि 2017 में 4.5 अरब डॉलर की क्रेडिट लाइन दी. इतना ही नहीं बांग्लादेश की आर्मी के सामान खरीदने के लिए भी भारत ने 50 करोड़ डॉलर की क्रेडिट लाइन दी थी.
बांग्लादेश की 93 परियोजनाओं में भारत का पैसा
भारत से मिली क्रेडिट लाइन से बांग्लादेश ने काफी पैसों का इस्तेमाल भी किया है. 2025 में बांग्लादेश ने करीब 15.50 हजार करोड़ रुपये का इस्तेमाल किया है. हालांकि 2024 में शेख हसीना सरकार जाने के बाद भारत ने इस क्रेडिट लाइन को कम कर दिया है. भारत ने बांग्लादेश की करीब 93 परियोजनाओं में पैसा लगाया है. इसमें से 77 परियोजनाओं का काम पूरा हो चुका है, जबकि 16 अभी चल रही है.
बता दें कि इन परियोजनाओं में हॉस्टल, स्कूल, स्किल ट्रेनिंग, कल्चरल सेंटर आदि शामिल हैं. भारत ने पिछले साल बांग्लादेश के लिए 120 करोड़ रुपये का आवंटन किया था. हालांकि शेख हसीना सरकार जाने के बाद इन प्रोजेक्ट में देरी आई, लेकिन 2025 में दोनों देशों ने मिलकर एक बार फिर इन परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है.
किन-किन चीजों के लिए भारत पर निर्भर है बांग्लादेश
बांग्लादेश बिजली जरूरतों के लिए आज भी भारत पर निर्भर है. वह भारत से करीब 17 फीसदी बिजली खरीदता है. 2025 में अडानी पावर ने 1,500 मेगावॉट बिजली की आपूर्ति की थी. बांग्लादेश में गैस और कोयले की कमी की वजह से निर्भरता बढ़ी है. इसके अलावा कपास, पेट्रोलियम प्रोडक्ट, स्टील, प्लास्टिक, वाहन पार्ट्स, मशीनरी और केमिकल्स के लिए भी बांग्लादेश भारत पर सबसे ज्यादा निर्भर है. आलू, लहसुन, प्याज, मसाले, चावल, चीनी, गेहूं और फल-सब्जियों के लिए भी ढाका को नई दिल्ली की ओर ही देखना पड़ता है.
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Source: IOCL

























