आतंकवाद को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए भारत ने पाकिस्तान को हाल के वर्षों में दो बड़े झटके दिए. एक तरफ ऑपरेशन सिंदूर के जरिए आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई की गई तो दूसरी ओर सिंधु जल संधि को स्थगित करने का फैसला लिया गया. इसके बाद से ही पाकिस्तान में पानी को लेकर बेचैनी बढ़ती जा रही है.

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भारत से बहकर जाने वाली नदियों के जल प्रवाह में कमी आने से पाकिस्तान के कई इलाकों में जल संकट गहराने लगा है. हालात यह हैं कि पाकिस्तान बार-बार इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने की कोशिश कर रहा है. दिलचस्प बात यह है कि जो देश आतंकवाद पर कोई ठोस कदम नहीं उठाता, वह अब नैतिकता और कानून की दुहाई देता नजर आ रहा है. नए साल पर ये तीसरी बार है कि पाकिस्तान ने भारत को धमकी देने की कोशिश की है. इससे पहले आसिम मुनीर और शहबाज शरीफ पिछले 4 दिनों में 2 बार भारत विरोधी बयान दे चुके हैं.

पाकिस्तान का दावा संधि स्थगित करने का कोई आधार नहीं

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सिंधु जल के लिए पाकिस्तान के आयुक्त सैयद मुहम्मद मेहर अली शाह ने 4 जनवरी को बयान देते हुए कहा कि भारत की तरफ से सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का दावा अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत मान्य नहीं है. उनके अनुसार यह संधि पूरी तरह से लागू है और इसे इस तरह रोका नहीं जा सकता.

पहलगाम हमले के बाद भारत का कड़ा फैसला

अप्रैल 2025 में कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित करने का फैसला लिया था. इसके जवाब में पाकिस्तान ने इसे युद्ध जैसी कार्रवाई बताया, लेकिन भारत ने साफ शब्दों में कहा कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते.

दुलहस्ती परियोजना से पाकिस्तान की बढ़ी घबराहट

भारत ने हाल ही में चिनाब नदी पर स्थित 260 मेगावाट की दुलहस्ती फेज-टू जलविद्युत परियोजना को मंजूरी दी है. इस फैसले से पाकिस्तान और ज्यादा बौखलाया हुआ है, क्योंकि उसे आशंका है कि इससे उसके हिस्से के पानी पर असर पड़ेगा.

अंतरराष्ट्रीय कानून का हवाला दे रहा पाकिस्तान

पाकिस्तानी चैनल जियो न्यूज के कार्यक्रम जिरगा में बोलते हुए सैयद मेहर अली शाह ने कहा, 'अंतरराष्ट्रीय संधि कानून में स्थगन जैसा कोई शब्द नहीं है. उनके मुताबिक भारत जानता है कि वह संधि को न तो खत्म कर सकता है और न ही निलंबित, इसलिए इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है.'

भारत का स्पष्ट संदेश

भारत पहले ही यह साफ कर चुका है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद पर ठोस कार्रवाई नहीं करता, तब तक रिश्तों में सामान्यता संभव नहीं है. पानी के मुद्दे पर भी भारत का रुख स्पष्ट है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिकों की जान से समझौता नहीं किया जा सकता.

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