पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में अपना संबोधन देने के दौरान भारत को लेकर कई झूठी बयानबाजी की और फर्जी दावे किए. इसके साथ ही पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर और भारत में हिंदुत्व पर भी टिप्पणी की. ऐसे में जब भारत ने इस पर पलटवार किया तो पाकिस्तान की बखिया उधेड़कर रख दी. शहबाज शरीफ ने जिस जोश के साथ भारत के खिलाफ ढिंढोरा पीटा था, अब उन्हें उतनी ही फजीहत झेलनी पड़ रही है.

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में जवाब देने के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने शनिवार (27 सितंबर, 2025) को कहा, ‘इस सभा में आज सुबह पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का बेतुका बयान सुनने को मिला. शरीफ ने एक बार फिर आतंकवाद का महिमामंडन किया, जो उनकी विदेश नीति के केंद्र में है.

शहबाज की टिप्पणी पर भारत ने किया पलटवार

गहलोत ने कहा, ‘पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हालिया संघर्ष को लेकर एक अजीब कहानी पेश की, जबकि भारत ने 22 अप्रैल, 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में 26 आम नागरिकों की मौत के जवाब में ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था.’

उन्होंने कहा, ‘इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े समूह द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ने ली थी. नौ मई तक पाकिस्तान भारत पर और हमले करने की धमकी दे रहा था. लेकिन 10 मई को उसकी सेना ने सीधे हमसे संघर्ष रोकने की अपील की. इस बीच भारतीय सेना ने पाकिस्तान के कई एयरबेस नष्ट कर दिए थे. उस तबाही की तस्वीरें सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं.’

UNGA में शहबाज शरीफ ने क्या-क्या बोले झूठ?

भारत ने UNGA में शुक्रवार (26 सितंबर, 2025) की सुबह प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के भाषण के बाद पाकिस्तान की कड़ी आलोचना की. शरीफ ने अपने भाषण में दावा किया कि हालिया संघर्ष में उनका देश युद्ध जीत गया. उन्होंने संघर्ष रोकने को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता का परिणाम बताया और साथ ही कश्मीर मुद्दा भी उठाया. इस अलावा, उन्होंने हिंदुत्व को लेकर भी टिप्पणी की.

शरीफ ने कहा, ‘भारत में कट्टरपंथी हिंदुत्व दुनिया के लिए चुनौती बन गया है. हेट स्पीच के लिए कहीं कोई जगह नहीं है. यह किसी भी धर्म या व्यक्ति के खिलाफ हिंसा की तरह है. भारत में हिंदुत्व की कट्टरपंथी विचारधारा हिंसा भड़काती है. इससे पूरी दुनिया को खतरा है.’ इसके अलावा, शहबाज शरीफ ने कश्मीर का जिक्र करते हुए कहा कि मैं कश्मीरियों से कहना चाहता हूं कि हम उनके साथ खड़ें हैं, एक न एक दिन कश्मीर में अत्याचार जरूर रुकेगा.

वहीं, ऑपरेशन सिंदूर के लेकर शरीफ ने दावा किया कि मई में चार दिन तक चले संघर्ष के दौरान भारत के सात विमान क्षतिग्रस्त हुए थे. इस पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई.

शरीफ के बयान पर भारत की तीखी प्रतिक्रिया

भारत ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘अगर तबाह हुए रनवे और राख में बदल चुके हैंगर (हवाई जहाज रखने की जगह) पाकिस्तान को जीत लगते हैं, जैसा कि उसके प्रधानमंत्री ने दावा किया है, तो पाकिस्तान खुश हो सकता है.’ गहलोत ने कहा, ‘ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेनाओं की ओर से बहावलपुर और मुरिदके में स्थित आतंकी ठिकानों में मारे गए आतंकवादियों की कई तस्वीरें सामने आई हैं.’

उन्होंने यह भी कहा, ‘जब पाकिस्तान के वरिष्ठ सैन्य और नागरिक अधिकारी खुलेआम इन कुख्यात आतंकवादियों का महिमामंडन करते हैं और उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं, तो इस सरकार की मानसिकता पर कोई शक रह ही नहीं जाता.’

आतंकियों के जनाजे में शामिल थे पाकिस्तानी सैन्य अधिकारी

गहलोत ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद एक तस्वीर वायरल हुई थी, जिसमें लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी हाफिज अब्दुल रऊफ मुरिदके में स्थित लश्कर मुख्यालय पर हुए हमलों में मारे गए लोगों के जनाजे में नमाज अदा करवा रहा था. इस जनाजे में पाकिस्तान सेना के सदस्य भी मौजूद थे.

भारत ने पाकिस्तान को ओसामा बिन लादेन की दिलाई याद

उन्होंने कहा, ‘याद दिला दें कि पाकिस्तान ने एक दशक तक ओसामा बिन लादेन को पनाह दी, जबकि वह आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में साझेदार बनने का दिखावा करता रहा. इसके मंत्रियों ने हाल ही में खुद स्वीकार किया है कि वे दशकों से आतंकी शिविर संचालित कर रहे हैं.’

भारत-पाकिस्तान के द्विपक्षीय मामले में कोई तीसरा हस्तक्षेप मान्य नहीं- गहलोत

भारत ने दोहराया कि दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच के मुद्दों में किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप की कोई जगह नहीं है. गहलोत ने कहा, ‘भारत और पाकिस्तान लंबे समय से इस बात पर सहमत हैं कि उनके बीच के किसी भी लंबित मुद्दे को द्विपक्षीय तरीके से सुलझाया जाएगा. इस प्रक्रिया में किसी तीसरे पक्ष के लिए कोई स्थान नहीं है.’ भारत लगातार यह कहता आया है कि संघर्षविराम पर सहमति दोनों देशों की सेनाओं के सैन्य संचालन महानिदेशकों (डीजीएमओ) के बीच सीधी बातचीत के बाद बनी थी.

(रिपोर्ट- पीटीआई के इनपुट के साथ)

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