Iran Foriegn Minister Abbas Araghchi Reveal 28th Attack:  ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने शुक्रवार को दावा किया है. उन्होंने कहा है कि जब 28 फरवरी को हुई अमेरिका और इजरायल की ईरान पर संयुक्त कार्रवाई के दौरान तबके सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के ऑफिस पर हमला हुआ था, तब वह वहीं पर मौजूद थे. 

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हमले के बाद वह खामेनेई की हालत को लेकर डरे हुए थे. मलबे से बाहर निकले. इसके बाद 1 मार्च को खामेनेई की मौत की पुष्टी ईरान की तरफ से कर दी गई. ईरानी मीडिया की मानें तो लेबनान में स्थित अल मायादीन टीवी से बात करते हुए अरागची ने जानकारी दी है कि उनके शहीद होने के समय उसी ऑफिस में था, जिसपर हमला हुआ था. मेरा पहला विचार और मेरी पहली चिंता नेता की हालत के बारे में थी.

हमले के बाद क्या कहा था ईरान के तत्कालीन अली खामेनेई

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ईरान के राजनयिक ने बताया कि मलबे से बाहर निकलने की कोशिशों की देखरेख करते हुए उन्होंने दो दिन खामेनेई के भविष्य को लेकर अनिश्चितता (Uncertainty) में बिताए.  अरागची ने उस दौरान खामेनेई से हुई बात पर कहा कि खामेनेई ने कहा था कि वह तबतक किसी शेल्टर या सुरक्षित जगह पर नहीं जाऊंगा, जबतक कि ईरान की जनता के हर सदस्य के पास सुरक्षित स्थान न हो. मेरे लोगों के साथ कुछ भी होगा, वही मेरे साथ भी होगा. 

इसके अरागची ने साफ कहा है कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल करने पर जवाबी कार्रवाई होगी. अगर ईरान के पड़ोसी देशों में ये अमेरिकी ठिकाने नहीं होते, तो उनपर जवाबी हमला नहीं होता. 

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ईरान की जवाबी कार्रवाई ने अमेरिका और सहयोगी देशों को चौंकाया

उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों की सरकारों ने अपनी जमीन पर अमेरिकी सेना की तरफ से किए इस तरह के इस्तेमाल का विरोध किया था, लेकिन वॉशिंगटन ने उनकी बातों को नजरंदाज किया. ईरान की जवाबी कार्रवाई ने अमेरिका और उसके सहयोगी देश इजरायल को चौंका दिया था. किसी को भी ईरान की तरफ से इस तरह तत्काल और जोरदार जवाबी कार्रवाई की उम्मीद नहीं थी. 

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अरागची ने वर्तमान के सुप्रीम लीडर सैयद मोजतबा खामेनेई की प्रशंसा करते हुए कहा कि वह देश के मौजूदा मामलों में बहुत असरदार और मजबूत भूमिका निभाते हैं. सत्ता की बागडोर पूरी तरह उनके हाथ में है. इसके अलावा उन्होंने पूरे ईरान की जनता के इस मुश्किल समय में साथ देने को लेकर कहा कि शहीद नेता के प्रति जो आज्ञाकारिता और वफादारी दिखाई गई थी, वही नए इस्लामिक क्रांति के लीडर के प्रति पूरी तरह बनी हुई है. अमेरिका ईरान युद्ध 8 अप्रैल से रुका हुआ है. ट्रंप ने युद्धविराम की घोषणा की थी. यह समझौता अभी भी कमजोर बना हुआ है. बीच-बीच में होने वाले हमले रुकी हुई बातचीत और दोनों पक्षों के बीच गहरे आविश्वास के कारण इस समझौते के टूटने का खतरा बना हुआ है.