प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार (17 मई) को स्वीडन पहुंचे. इस दौरान पीएम के विमान को स्वीडिश लड़ाकू जेट्स ग्रिपेन ने एस्कॉर्ट किया. उनका विमान जैसे ही स्वीडन की सीमा में पहुंचा, स्वीडिश वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने उन्हें स्पेशल सुरक्षा दी. इससे पहले यूएई पहुंचने पर भी ऐसा ही नजारा दिखा था, जहां एफ16 जेट विमान ने पीएम मोदी के विमान को एस्कॉर्ट किया था. आइए जानते हैं स्वीडन के जिन ग्रिपेन फाइटर जेट्स ने PM मोदी को एस्कॉर्ट किया था, वो राफेल से कितने सस्ते हैं और इनकी क्या खासियत है.

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राफेल की तुलना में ग्रिपेन सस्ता

फ्रांस के राफेल की तुलना में स्वीडन का ग्रिपेन सस्ता है. राफेल एक हेवी ट्विन इंजन (दो इंजन वाला) विमान है. वहीं, ग्रिपेन एक सिंगल इंजन लाइटवेट विमान है. ग्रिपेन की सबसे खास बात यह है कि इसे राफेल की तरह टेक ऑफ के लिए मिलिट्री एयरबेस की जरूरत नहीं होती, यह हाईवे से लेकर सड़क पर भी टेकऑफ और लैंडिंग करने में माहिर है.

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CNN-न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक,  राफेल को एक घंटे उड़ाने का खर्च कम से कम  $14,000 (लगभग 11.6 लाख रुपये) से ज्यादा आता है. इसके मुकाबले ग्रिपेन की एक घंटे की उड़ान का खर्च मात्र  $4,000 $10,000 (लगभग 3.3 से 8.3 लाख रुपये) के बीच बैठता है. यानी ग्रिपेन को मेंटेन करना बहुत आसान है.

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साब ग्रिपेन के प्रति विमान की अनुमानित बेस कीमत $85 मिलियन से $100 मिलियन है, जबकि राफेल की $115 मिलियन से $130 मिलियन के बीच. इसके अलावा प्रति विमान फुल पैकेज डील कीमत में भी ग्रिपेन सस्ता है. इसकी कीमत $140 मिलियन से $220 मिलियन के बीच है. वहीं, $200 मिलियन से $245 मिलियन के बीच बैठता है.

ग्रिपेन की क्या खासियत?

Rafale दो इंजन के सहारे चलता है, जिसका मतलब है कि अगर जंग के दौरान एक इंजन खराब भी हो जाए, तो दूसरा इंजन विमान को बचा सकता है. यह 9.5 टन हथियार उठा सकता है. दूसरी ओर, ग्रिपेन आकार में छोटा है, लेकिन इसकी रफ्तार राफेल से भी तेज है. स्वीडन का दावा है कि इसमें कोई भी स्वदेशी हथियार या सॉफ्टवेयर बिना किसी पाबंदी के जोड़ सकते हैं. इसे किसी बड़े एयरबेस की जरूरत नहीं है; जंग के समय इसे किसी भी आम हाईवे पर लैंड कराकर महज 10 मिनट टीम दोबारा ईंधन और हथियार लोड करके उड़ा सकती है.

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