जर्मनी में अब अमेरिका के खिलाफ राजनीतिक आवाज उठने लगी है. जर्मनी की दक्षिणपंथी पार्टी Alternative for Germany (AFD) ने अमेरिका से मांग की है कि वह अपने सैनिकों और परमाणु हथियारों को जर्मनी से हटा ले. पार्टी का कहना है कि अब समय आ गया है कि जर्मनी अपनी विदेश नीति खुद तय करे और किसी दूसरे देश पर निर्भर न रहे. AFD के सह-नेता टिनो कृपल्ला ने कहा कि जर्मनी और अमेरिका के रिश्तों को फिर से समझने और नए तरीके से तय करने की जरूरत है.

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जर्मनी की दक्षिणपंथी पार्टी AFD की इस मांग के पीछे मुख्य कारण जर्मनी में लंबे समय से मौजूद अमेरिकी सैनिक और परमाणु हथियार हैं. अभी जर्मनी में करीब 40,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं और वहां कई बड़े अमेरिकी सैन्य अड्डे भी मौजूद हैं. पार्टी का मानना है कि जब तक दूसरे देश की सेना और हथियार जर्मनी में रहेंगे, तब तक देश पूरी तरह से स्वतंत्र फैसले नहीं ले पाएगा, इसलिए AFD चाहती है कि जर्मनी अपनी सुरक्षा और विदेश नीति पर खुद का पूरा नियंत्रण बनाए. यह मुद्दा जर्मनी की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है और आने वाले समय में इस पर और बहस देखने को मिल सकती है.

अमेरिका के पास मौजूद परमाणु हथियार

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ICAN की रिपोर्ट के मुताबिक परमाणु हथियारों के मामले में अमेरिका दूसरे नंबर पर आता है. साल 2025-2026 के अनुमान के अनुसार, अमेरिका के पास लगभग 5,000 से 5,400 के बीच परमाणु हथियार हैं. यह संख्या रूस के बाद दुनिया में दूसरी सबसे बड़ी है. अमेरिका के पास मौजूद सभी परमाणु हथियार एक जैसे नहीं हैं. इनमें से कुछ तुरंत इस्तेमाल के लिए तैयार रहते हैं, जबकि कुछ को जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल के लिए रखा जाता है और कुछ पुराने होकर हटाए जा चुके हैं लेकिन अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं. अमेरिका अपने सभी परमाणु हथियार सिर्फ अपने देश में ही नहीं रखता. नाटो के तहत उसने यूरोप के कई देशों में भी अपने कुछ परमाणु हथियार तैनात कर रखे हैं. इनमें तुर्किए, इटली, बेल्जियम, जर्मनी और नीदरलैंडशामिल हैं. 

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