G7 भले ही दुनिया की सबसे अमीर और विकसित अर्थव्यवस्थाओं का ग्रुप हो, लेकिन जब भी इसके नेता दुनिया के अहम मुद्दों पर चर्चा करते हैं तो भारत वहां मौजूद होता है. G7 में अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली और जापान शामिल हैं. इसका मेंबर न होने के बावजूद भारत को अक्सर खास मेहमान के तौर पर बुलाया जाता है, जो यह दिखाता है कि ये ग्रुप नई दिल्ली की आवाज को कितनी अहमियत देता है.
ग्लोबल इकॉनमी और क्लाइमेट चेंज से लेकर सुरक्षा और कूटनीति तक भारत की भूमिका इतनी बढ़ गई है कि अब इसके शामिल हुए बिना बड़े अंतर्राष्ट्रीय फैसले लेना लगभग मुश्किल हो गया है. बता दें कि दशकों तक ग्लोबल संस्थाओं पर अधिकतर अमीर पश्चिमी देशों का दबदबा रहा है. इसी कारण एशिया, अफ़्रीका और लैटिन अमेरिका के कई विकासशील देशों को लगता रहा है कि उनकी चिंताओं पर कभी विचार विमर्श नहीं किया गया.
भारत इन देशों की आवाज उठाने वाले सबसे मजबूत देशों में से एक बनकर उभरा है. बढ़ते प्रभाव और कूटनीतिक पहुंच के साथ नई दिल्ली ने विकसित अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील दुनिया के बीच एक पुल के तौर पर अपनी जगह बनाई है. G7 के लिए भारत के साथ जुड़ना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि किसी भी वैश्विक नीति की सफलता के लिए उसे व्यापक स्तर पर स्वीकार किया जाना जरूरी है, खासकर पश्चिमी गुट से बाहर के देशों में.
दुनिया के सबसे बड़े कंज्यूमर मार्केट में एक है भारतइन सबके अलावा भारत की आर्थिक तरक्की ने दुनिया की बड़ी ताकतों के लिए इसे नजरअंदाज करना नामुमकिन कर दिया है. 140 करोड़ से ज़्यादा की आबादी वाला भारत दुनिया के सबसे बड़े कंज्यूमर मार्केट में से एक है. भारत की बढ़ती डिजिटल इकॉनमी, मैन्युफैक्चरिंग पर जोर और टेक्नोलॉजी सेक्टर ने इसे ग्लोबल ग्रोथ प्लान का एक अहम हिस्सा बना दिया है.
भारत एक अहम आर्थिक पार्टनर दुनियाभर की कंपनियां अपनी सप्लाई चेन में विविधता लाने के लिए कुछ ही देशों पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रही हैं तो ऐसे में G7 के लिए भारत एक अहम आर्थिक पार्टनर बन गया है. भारत के साथ सहयोग सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है बल्कि ये ग्लोबल आर्थिक स्थिरता के बारे में भी है.
चीन को काउंटर करने के लिए भारत की जरूरतभारत की बढ़ती अहमियत के पीछे एक बड़ा कारण इंडो-पैसिफिक में उसकी रणनीतिक स्थिति भी है. चीन का बढ़ता हुआ सैन्य और आर्थिक प्रभाव G7 के कई देशों के लिए चिंता का सबब बन गया है. अपने आकार, सैन्य क्षमता और भौगोलिक स्थिति के कारण, भारत को इस क्षेत्र में शक्ति का संतुलन बनाए रखने में एक अहम साझेदार के तौर पर देखा जाता है. भले ही दुनिया के तमाम नेता खुलकर इस बारे में बात न करें, लेकिन एशिया में एक मजबूत रणनीतिक संतुलन बनाने की कोशिशों में भारत की साझेदारी अहम हो गई है.
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