<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><channel><title>Explained: न्यूयॉर्क में ट्रंप और पेजेश्कियान की संभावित मुलाकात, 7 महीने के युद्ध के बीच क्या कूटनीति लेगी नया मोड़?</title><atom:link href="https://www.abplive.com/world/feed" rel="self" type="application/rss+xml"/><link>https://www.abplive.com/</link><description/><lastBuildDate>Wed, 23 Sep 2026 05:40:23 +0530</lastBuildDate><language>en-US</language><sy:updatePeriod>hourly</sy:updatePeriod><sy:updateFrequency>1</sy:updateFrequency><generator>https://www.abplive.com</generator><item><title><![CDATA[ममदानी ने किया हमास का सपोर्ट तो भड़के नेतन्याहू, बोले- 'आपको शर्म...']]></title><link>https://www.abplive.com/news/world/israel-pm-benjamin-netanyahu-reaction-on-new-york-mayor-mamdani-support-hamas-3192434</link><comments>https://www.abplive.com/news/world/israel-pm-benjamin-netanyahu-reaction-on-new-york-mayor-mamdani-support-hamas-3192434#respond</comments><pubDate>Tue, 22 Sep 2026 23:07:21 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ कार्तिक सागर समाधिया ]]></dc:creator><category><![CDATA[ विश्व ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/news/world/israel-pm-benjamin-netanyahu-reaction-on-new-york-mayor-mamdani-support-hamas-3192434</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याह ने मंगलवार को न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी को आड़े हाथों लिया है. उन्होंने कहा है कि मिस्टर ममदानी आपको शर्म आना चाहिए. हमास का समर्थन करने के लिए आपको शर्म आना चाहिए, वे आतंकवादी राक्षस हैं, जिन्होंने हमारे लोगों की बेरहमी से हत्या की है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;उन्होंने आगे कहा कि न्यूयॉर्क के यहूदियों के खिलाफ दंगे भड़काने के लिए आपको शर्म आना चाहिए. मैं यूएन जा रहा हूं. मैं हमारे बहादुर सैनिकों के बारे में सच बताऊंगा. मैं आपके बारे में भी सच बताऊंगा.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;इसके अलावा नेतन्याहू ने अपने बयान में साफ कहा है कि वह इस हफ्ते संयुक्त राष्ट्र में अपने भाषण का इस्तेमाल फिलिस्तीनियों के खिलाफ इजरायल सैन्य कार्रवाई का बचाव करने के लिए करेंगे.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;नेतन्याहू ने वीडियो जारी कर क्या कहा है?&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;नेतन्याहू ने वीडियो जारी करते हुए कहा, 'मैं संयुक्त राष्ट्र आ रहा हूं. मैं हमारे बहादुर सैनिकों के बारे में सच बताऊंगा. मैं आपके बारे में भी सच बताऊंगा. मिस्टर ममदानी आपको शर्म आना चाहिए। हमास के उन आतंकवादी राक्षसों का समर्थन करने के लिए आपको शर्म आना चाहिए, जिन्होंने हमारे लोगों की हत्या की. न्यूयॉर्क के यहूदियों के खिलाफ दंगे भड़काने के लिए आपको शर्म आना चाहिए.'&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;सीएनएन न्यूज चैनल से बात करते हुए ममदानी ने कहा था कि नेतन्याहू वॉर क्रिमिनल हैं. फिलिस्तीनी लोगों के जेनेसाइड यानी नरंसहार के सूत्रधार हैं. इस बयान के बाद नेतन्याहू बुरी तरह बिफर पड़े और इस तरह का आक्रमक बयान जारी किया है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;इसके अलावा ममदानी ने नेतन्याहू को गिरफ्तार करने की बात भी कही थी. हालांकि, उन्होंने माना कि उनके पास ऐसा करने की पावर नहीं है. साथ ही कहा था कि उनकी इजरायल पर आलोचना को अक्सर गलती से यहूदी विरोध से जोड़ दिया जाता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;क्यों जारी है इजरायल और फिलिस्तीन के बीच जंग&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;इधर इजरायली अधिकारियों के बयान के अनुसार 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर हमास के हमले में लगभग 1200 लोग मारे गए थे. वहीं, 251 लोगों को अगवा कर लिया गया था. इजरायल ने इशके जवाब में हवाई और जमीनी हमले किए. इसका मकसद हमास की सैन्य क्षमताओं को खत्म करना था. गाजा से जुड़े मेडिकल ऑफिसर्स ने कहा है कि 73 हजार से ज्यादा फिलिस्तिनी मारे जा चुके हैं. इस संख्या में लड़ाकों और आम नागरिकों के बीच किसी तरह का फर्क नहीं रह गया है. इजरायल ने गाजा में फिलिस्तीनियों के नरसंहार का आरोप को नकारा है. उसका कहना है कि वह हमास के चरमपंथियों से लड़ रहा है. इजरायल ने हमास पर आम नागरिकों को शील्ड की तरह उपयोग करने और बचने का आरोप लगाया है.&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/22/671de4bbe8a878e4cc4e8249883179fe17900842636851324_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[भारत-पाक युद्धविराम, ईरान को धमकी, AI का नया नामकरण...ट्रंप के भाषण की 10 बड़ी बातें]]></title><link>https://www.abplive.com/news/world/10-key-points-of-donald-trump-addresses-un-general-assembly-2026-3192493</link><comments>https://www.abplive.com/news/world/10-key-points-of-donald-trump-addresses-un-general-assembly-2026-3192493#respond</comments><pubDate>Tue, 22 Sep 2026 23:04:25 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ कार्तिक सागर समाधिया ]]></dc:creator><category><![CDATA[ विश्व ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/news/world/10-key-points-of-donald-trump-addresses-un-general-assembly-2026-3192493</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत पाकिस्तान संघर्ष &lt;strong&gt;(&lt;a title=&quot;ऑपरेशन सिंदूर&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/topic/operation-sindoor&quot; data-type=&quot;interlinkingkeywords&quot;&gt;ऑपरेशन सिंदूर&lt;/a&gt;)&lt;/strong&gt; समेत दुनिया की 8 जंग टैरिफ लगाकर रुकवाने का दावा करते हुए, अपने संयुक्त महासभा के 81वें सेशन में दिए भाषण को पूरा किया. इस दौरान उन्होंने ईरान को लेकर कई तरह की बातें कहीं हैं. ऐसे में हम उनके मंगलवार को दिए भाषण की 10 बड़ीं बातें साझा कर रहे हैं.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;दुनियाभर की 8 जंग रुकवाने का दावा&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;ईरान पर अटैक करने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने भाषण में जिन 8 देशों में टैरिफ लगाकर जंग रुकवाने का दावा किया उनमें भारत-पाकिस्तान, गाजा संघर्ष, आर्मेनिया-अजरबैजान संघर्ष शामिल हैं. उन्होंने पाकिस्तान पीएम को अद्भुत शख्स बताया. ट्रंप अबतक कई बार इस संघर्ष को रुकवाने का दावा कर चुके हैं और अपनी पीठ थपथपा चुके हैं. लेकिन भारत हमेशा से ही किसी भी तरह से तीसरे देश की मध्यस्थता से इनकार करता रहा है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;ईरान को दी सीधी धमकी, कहा- डील करो या खत्म कर देंगे&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;ट्रंप के भाषण की जो सबसे अहम बात रही, वो ईरान को खत्म करने की धमकी देना था. ट्रंप ने अपने भाषण में कहा कि उनके सामने एक बड़ा फैसला है. ईरान के साथ डील करना, या फिर उसे खत्म कर देना. उन्हें यह काम जल्दी करना है. ताकि फिर से किसी तरह का नुकसान पहुंचाने से रोका जा सके.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने की UN से अपील&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;ट्रंप ने ईरान को धमकी देने के अलावा यूएन से उसे आर्थिक रूप से अलग-थलग करने की अपील की है. ट्रंप ने कहा है कि अगर यह स्ट्रेटजी काम करेगी, तो तेल की कीमतों में काफी गिरावट आ सकती है. उन्होंने यूएन के सदस्य देशों समेत सभी से ईरान को आर्थिक रूप से बॉयकॉट करने और इकॉनोमिकल प्रेशर बनाने की अपील की है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;वेनेजुएला की कार्रवाई पर ट्रंप ने खुद की थपथपाई पीठ&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला में अमेरिकी कार्रवाई को सही ठहराया. अमेरिकी राष्ट्रपति ने इसको लेकर तारीफ करते हुए कहा कि जीतने वाले को सबकुछ मिलता है. बता दें, अमेरिका ने वेनेजुएला में हमला करते हुए, तख्तापलट कर दिया था और वहां के तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरों को अरेस्ट कर जेल में डाल दिया. तब से अप्रत्यक्ष तौर पर अमेरिका वेनेजुएला की सत्ता संचालित कर रहा है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;पड़ोसी मुल्कों को वामपंथ का ठिकाना न बनने देने को लेकर दी चेतावनी&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जो सबसे बड़ी बातें थीं, उनमें क्यूबा का जिक्र करते हुए अमेरिकी उपमहाद्वीप से वामपंथ को खत्म करने की बात कही. ट्रंप ने अपने भाषण में कहा कि अमेरिका में कम्युनिज्म या वामपंथ की विचारधारा कभी नहीं आएगी. अमेरिका अपने पड़ोसी मुल्कों को इसका ठिकाना नहीं बनने देगा. ऐसे देशों में जो वॉशिंगटन के लिए खतरे के रूप में उभरें. उन्होंने क्यूबा में सरकार गिराने की बात भी यूएन के मंच से की, जिसके बाद क्यूबा का डेलीगेशन बीच भाषण छोड़कर बाहर चला गया.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका-डेनामार्क में डील होगी साइन&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;डोनाल्ड ट्रंप ने अपने भाषण में ग्रीनलैंड का भी जिक्र किया. ट्रंप लगातार इस देश पर कब्जा करने की बात करते रहे हैं. ऐसे में यूएन के मंच से इसका जिक्र अहम हो जाता है. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ग्रीनलैंड में बड़े स्तर पर अमेरिकी सेना को तैनात करेगा. जल्द ही वहां दो बड़े मिलिट्री बेस बनाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. इसके जरिए अमेरिका महाद्वीप और अन्य यूरोपियन देशों के अलावा दूसरे इलाकों की सिक्योरिटी सुनिश्चित कर सकेगा. ट्रंप ने साफ कहा है कि उसके दुश्मन देश को सेना बनाने और किसी भी तरह के संवेदनशील इन्वेस्टमेंट की परमिशन नहीं दी जाएगी. वो भी तब तक जबतक वॉशिंगटन से इसकी ऑन पेपर मंजूरी न मिल जाए. ट्रंप ने कहा है कि ग्रीन लैंड को लेकर डेनमार्क और अमेरिका के बीच हुई डील आज ही साइन की जाएगी.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;आर्टिफियल इंटेलिजेंस का किया नया नामकरण&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;डोनाल्ड ट्रंप संयुक्त राष्ट्र के मंच पर एक तरफ अमेरिका की तकनीकी शक्ति का बखान कर रहे थे, तो उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का नया नामकरण कर दिया. ट्रंप ने कहा कि एआई के बहाने इंसानी चेतावनी देने वाले लोग वही हैं, जो उनके रूसी साजिश से जुड़े होने की पैरवी करते हैं. ट्रंप ने एआई को सुपर इंटेलिजेंस कहा है. उन्होंने कहा कि हम सुपर इंटेलिजेंस को बढ़ावा देंगे. हम एआई पर रोक नहीं लगाएंगे. यह इशारा हाल ही में उन बड़े टेक लीडर्स की ओर है, जिन्होंने एआई के विकास की स्पीड रोकने की बात कही थी. ट्रंप ने कहा कि हम पहले भी कह चुके हैं, कि जो देश एआई के रेस जीतेगा, वह दुनिया में आगे रहेगा. अमेरिका एआई पर ज्यादा पाबंदी भरे कानूनी कायदे या नियम लगाने के खिलाफ है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;ICC को बताया बेकाबू संस्था&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;ट्रंप के भाषण में जिस बात ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा, उसमें ICC का जिक्र रहा. ट्रंप ने इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट को एक बेकाबू संस्थान करार दिया है. साथ ही इसके मेंबर्स से तुरंत संस्था से अलग होने और इस्तीफा देने को कहा है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;हॉर्मुज पर टैरिफ लगाने के बहाने के क्या कहा? &lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अमेरिकी राष्ट्रपति &lt;a title=&quot;डोनाल्ड ट्रंप&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/topic/donald-trump&quot; data-type=&quot;interlinkingkeywords&quot;&gt;डोनाल्ड ट्रंप&lt;/a&gt; ने हॉर्मुज में टैरिफ लगाने की बात करते कहा है कि अमेरिकी नौसेना हाल ही में स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से 1 अरब बैरल से ज्यादा तेल निकालने वाले जहाजों को मंजूरी दे चुकी है. सबसे ज्यादा तेल इस जलमार्ग से गुजर रहा है. इसके अलावा ट्रंप ने सिक्योरिटी काउंसिल को कमर्शियल जहाजों पर हमला करने के निंदा प्रस्ताव का पास करने के लिए थैंक्यू किया है. उन्होंने सभी देशों से ईरान पर प्रेशर बनाए रखने की बात पर जोर दिया है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;अमेरिका को लेकर बोले- हम सबसे पावरफुल&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;इसके अलावा ट्रंप ने यूएन के भाषण के दौरान अमेरिका की मिसाल देते हुए, उसे दुनिया की बेहतर और सबसे पावरफुल इकॉनोमी बताया. उन्होंने कहा, हमारी सेना पावरफुल है. हमारी तकनीक का कोई मुकाबला नहीं. हम हर सेक्टर में अच्छा काम कर रहे हैं. दो साल पहले हमारा देश खत्म होने की कगार पर था, लेकिन अब दुनिया में सबसे तेजी से आगे बढ़ने वाला देश है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/22/0f57e640ca973795aa573842c60465ce17900983340801324_original.png" width="220"/></item><item><title><![CDATA[तुर्किए के राष्ट्रपति एर्दोगन की गंदी चाल, UN में उठाया कश्मीर का मुद्दा]]></title><link>https://www.abplive.com/news/world/turkiye-president-erdogan-again-raised-kashmir-issue-at-unga-after-continuous-backlash-from-india-3192489</link><comments>https://www.abplive.com/news/world/turkiye-president-erdogan-again-raised-kashmir-issue-at-unga-after-continuous-backlash-from-india-3192489#respond</comments><pubDate>Tue, 22 Sep 2026 22:32:23 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ विजय कुमार बिट्ठल ]]></dc:creator><category><![CDATA[ विश्व ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/news/world/turkiye-president-erdogan-again-raised-kashmir-issue-at-unga-after-continuous-backlash-from-india-3192489</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/search?s=turkiye&quot; target=&quot;_blank&quot; rel=&quot;noopener&quot;&gt;तुर्किए&lt;/a&gt; के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने एक बार फिर से संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के मंच से भारत के खिलाफ गंदी चाल चली है. एर्दोगन ने यूएनजीए के प्लेटफॉर्म से फिर से कश्मीर के मुद्दे को उठाया है. उन्होंने कहा कि दक्षिण एशिया के सभी विवादों, जिसमें कश्मीर का मुद्दा भी शामिल है, को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के फ्रेमवर्क के अंदर बातचीत के जरिए सुलझाया जाना चाहिए.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;UNGA&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt; में दिए संबोधन में क्या बोले एर्दोगन&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अमेरिका के न्यूयॉर्क में आयोजित संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की बैठक में मंगलवार (22 सितंबर, 2026) को अपने संबोधन के दौरान तुर्किए के राष्ट्रपति एर्दोगन ने कहा, &amp;lsquo;दक्षिण एशिया में यह बहुत ही जरूरी है कि कश्मीर मुद्दे के साथ-साथ बाकी सभी विवादों को यूएन चार्टर और अन्य संबंधित प्रस्तावों के फ्रेमवर्क के अंदर बातचीत और चर्चा के जरिए सुलझाया जाए.&amp;rsquo;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;एर्दोगन के बयानों पर क्या रहा है भारत का स्टैंड&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;पिछले कई सालों से तुर्किए के राष्ट्रपति बार-बार संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के मंच से कश्मीर के मुद्दे को उठाते रहे हैं. हालांकि, भारत ने हर बार कश्मीर के मुद्दे पर अपनी संप्रभुता को लेकर अपना स्टैंड क्लीयर किया है. भारत हर बार एर्दोगन के बयानों की खुले तौर पर आलोचना कर चुका है, उस पर आपत्ति जताता रहा है और बार-बार यह दोहराया है कि जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;भारत ने एर्दोगन की टिप्पणियों के बाद यह पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया था कि तुर्किए को दूसरे देशों की संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए और उसे भारत के आंतरिक मामले में अपने टांग अड़ाने और कुछ भी बयानबाजी करने से बचना चाहिए, लेकिन एर्दोगन ने लगातार भारत के खिलाफ अपने गंदे चाल को जारी रखा है और एक बार फिर से उन्होंने यूएनजीए के मंच का इस्तेमाल भारत के खिलाफ किया है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;iframe title=&quot;YouTube video player&quot; src=&quot;https://www.youtube.com/embed/6b-APnggxQU?si=aS-CwbUUMoCStpfr&quot; width=&quot;560&quot; height=&quot;315&quot; frameborder=&quot;0&quot; allowfullscreen=&quot;allowfullscreen&quot;&gt;&lt;/iframe&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;एर्दोगन की टिप्पणियों को लेकर भारत की तरफ से तीखी प्रतिक्रियाएं दी गई. यहां तक कि प्रधानमंत्री &lt;a title=&quot;नरेंद्र मोदी&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/topic/narendra-modi&quot; data-type=&quot;interlinkingkeywords&quot;&gt;नरेंद्र मोदी&lt;/a&gt; ने अपनी तुर्किए की प्रस्तावित यात्रा को भी कैंसिल कर दिया था, जबकि भारत ने अंकारा के साथ अपने रक्षा सहयोग को भी सीमित करने की दिशा में बड़े कदम उठाए थे.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;कश्मीर को लेकर एर्दोगन की टिप्पणियां&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;एर्दोगन ने कई मौकों पर UNGA में दिए अपने संबोधनों के दौरान कश्मीर को लेकर टिप्पणी की है. हालांकि, उनकी बयानबाजी का टोन अलग-अलग तरह का रहा है, लेकिन उनके दिए भाषणों में कश्मीर का मुद्दा हमेशा शामिल रहा है. उनकी तरफ से सबसे विवादित टिप्पणी साल 2019 में दी गई थी. यह वो वक्त था जब भारत ने जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म करने के लिए संविधान के आर्टिकल 370 के प्रावधानों को पूरी तरह से रद्द किया था.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;सितंबर 2019 में UNGA के 74वें सत्र के दौरान तुर्किए के राष्ट्रपति एर्दोगन ने अपने संबोधन में कहा था, &amp;rsquo;करीब 80 लाख लोग नाकेबंदी में रह रहे हैं और दुर्भाग्य है कि वो कश्मीर से बाहर भी नहीं निकल पा रहे हैं.&amp;rsquo; उन्होंने यह भी कहा था, &amp;lsquo;पिछले 72 सालों के दौरान अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस विवाद पर पर्याप्त रूप से ध्यान देने में नाकाम रहा है.&amp;rsquo;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ेंः &lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/news/india/india-on-relation-with-bangladesh-mea-says-we-desires-positive-constructive-and-forward-looking-relationship-3192463&quot;&gt;बांग्लादेश से रिश्तों पर भारत ने साफ किया स्टैंड - 'मौजूदा समय में...'&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/22/d1f79689480c4bddfbc671fa426caa3817900964834861126_original.png" width="220"/></item><item><title><![CDATA[PoK में मुनीर की सेना की बर्बरता, प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग में 13 घायल]]></title><link>https://www.abplive.com/news/world/pakistani-rangers-brutality-continues-in-pakistan-occupied-kashmir-shots-fired-at-civilians-3192416</link><comments>https://www.abplive.com/news/world/pakistani-rangers-brutality-continues-in-pakistan-occupied-kashmir-shots-fired-at-civilians-3192416#respond</comments><pubDate>Tue, 22 Sep 2026 22:17:29 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ शिवांक मिश्रा ]]></dc:creator><category><![CDATA[ विश्व ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/news/world/pakistani-rangers-brutality-continues-in-pakistan-occupied-kashmir-shots-fired-at-civilians-3192416</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में 103 दिन से जारी विद्रोह में आज राजधानी मुजफ्फराबाद में एक बार फिर प्रदर्शनकारियों और पाकिस्तानी सेना के बीच तनाव शुरू हो गया. शाम 4 बजे नीलम पुल पर प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी रेंजर्स ने अंधाधुंध फायरिंग की और आँसू गैस के गोले छोड़े. इसी तरह नीलम घाटी में भी प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सेना ने गोलीबारी की. PoK से आई प्राथमिक जानकारी के मुताबिक शाम 4 बजे हुए गोलीबारी में 13 लोग घायल हुए हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;मुजफ्फराबाद में किया गया था बंद का ऐलान&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;आज PoK के मुजफ्फराबाद डिवीज़न के सभी जिलों में प्रदर्शनकारियों ने बंद का ऐलान किया था. इसी वजह से सुबह से दुकानें और बाज़ारें बंद रही और पूरी राजधानी में बंद का असर दिखा. दुकानें बंद करने के बाद लोग सड़कों पर उतरे और पाकिस्तान की सरकार और सेना के ख़िलाफ नारेबाज़ी की. इसी नारेबाज़ी का जवाब पाकिस्तानी रेंजर्स और PoK पुलिस ने बर्बर तरीके से आँसू गैस के गोले और गोलियां दाग कर दिया.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;लगातार हो रही PoK में हिंसा&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;बता दें कि पिछले महीने Pok में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान भी पाकिस्तानी रेंजर्स और पाकिस्तानी पुलिस ने आम जनों पर बर्बरता से गोलियां चलाई गईं थी. जिसमें कई सारे लोगों की मौत की भी खबरें आईं थीं। &amp;nbsp;इस दौरान स्थानीय लोगों ने पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की थी. पाकिस्तानी सैन्य बलों की इस बर्बरता को देखते हुए युवाजनों ने चुनाव का बहिष्कार कर दिया था.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;पिछले कुछ समय से लगातार पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर क्षेत्र से आम जनों के दमन, उत्पीड़न, भेदभाव और अत्याचार की खबरें आ रहीं हैं. जिसके खिलाफ मुजफ्फराबाद, रावलकोट और मीरपुर जैसे शहरों में लगातार जन आंदोलन हो रहे हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;PoK में 5 जून से इंटरनेट बंद है, साथ ही 16 जून से पाकिस्तान के अन्य इलाकों से PoK में खाने की सामग्री नहीं आ पा रही है. सेना और रेंजर्स की गोलियों से 133 लोग पिछले 103 दिनों में मारे जा चुके हैं.&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/22/b9ad96c4e0b1bff5c3ed82d48e1284f617900802203461484_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[UN में डोनाल्ड ट्रंप बोले- मैंने टैरिफ लगाकर 8 जंग रुकवाईं]]></title><link>https://www.abplive.com/news/world/donald-trump-un-speech-message-for-russian-president-putin-says-settle-the-war-3192456</link><comments>https://www.abplive.com/news/world/donald-trump-un-speech-message-for-russian-president-putin-says-settle-the-war-3192456#respond</comments><pubDate>Tue, 22 Sep 2026 19:53:23 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ कार्तिक सागर समाधिया ]]></dc:creator><category><![CDATA[ विश्व ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/news/world/donald-trump-un-speech-message-for-russian-president-putin-says-settle-the-war-3192456</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण के दौरान दुनियाभर में 8 जंग रुकवाने का दावा करते हुए, ईरान को आड़े हाथों लिया. उन्होंने ईरान को सीधी धमकी देते हुए, समझौता करने को कहा है. साथ ही कहा है कि अगर ऐसा नहीं किया तो तबाह कर देंगे. ट्रंप ने कहा कि मेरे सामने एक बड़ा फैसला है. अमेरिका के पास दो रास्ते हैं. पहला ईरान के साथ समझौता करना या दूसरा- उसे खत्म कर देना. इस दौरान वहां मौजूद तेहरान का डेलीगेशन भाषण के बीच से वॉक आउट कर गया.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;ट्रंप ने कहा कि उन्हें दोबारा लोगों को मारने का मौका नहीं देंगे. अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के खिलाफ यूएन से आर्थिक नाकेबंदी करने की अपील की. इसके अलावा वेनेजुएला, गाजा, भारत-पाकिस्तान, आर्मेनिया-अजरबैजान के संघर्ष का भी जिक्र करते हुए कहा कि टैरिफ लगाकर दुनियाभर की 8 जंग खत्म करवाईं हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;हालांकि, तेहरान के खिलाफ युद्ध शुरू करने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्होंने शांति कायम की है. ईरान से लड़ाई लगभग खत्म हो चुकी है, उनका मकसद परमाणु हथियार बनाने से रोकना था.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;राष्ट्रपति &lt;a title=&quot;डोनाल्ड ट्रंप&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/topic/donald-trump&quot; data-type=&quot;interlinkingkeywords&quot;&gt;डोनाल्ड ट्रंप&lt;/a&gt; संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सेशन में भाषण देने पहुंचे थे. यूएन मुख्यालय पहुंचकर उन्होंने भाषण से पहले मीडिया से बात करते हुए रूसी राष्ट्रपति &lt;a title=&quot;व्लादिमीर पुतिन&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/topic/vladimir-putin&quot; data-type=&quot;interlinkingkeywords&quot;&gt;व्लादिमीर पुतिन&lt;/a&gt; के नाम संदेश देते हुए, युद्ध खत्म करने की अपील भी की थी.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;वॉशिंगटन ने ईरान को आतंक फैलाने से रोकने पर कदम उठाए: ट्रंप&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने भाषण में ईरान का जिक्र करते हुए कहा, 'भले ही ईरान दुनिया के लिए खतरा बना हुआ है, ताकत बढा़ने पर जोर दे रहा है, लेकिन वॉशिंगटन ने उसे आतंक फैलाने से रोकने के लिए कदम उठाए हैं. अमेरिका ने ईरान को बैलिस्टिक मिसाइल शील्ड की आड़ में परमाणु बम बनाने की कोशिशि से रोका है. अगर वे कामयाब हो जाते, तो वह दुष्ट शासन हमेशा के लिए आतंक और मौत फैलाने के लिए आजाद हो जाता.'&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;इसके अलावा राष्ट्रपति ने कहा कि हम लगभग हर चीज में सबसे आगे हैं.अब हमारे पास अमेरिकी इतिहास की सबसे सुरक्षित सीमा है. बिना बुलाए कोई अंदर नहीं आ सकता है. 51 सालों से ईरानी सरकार खून खराबे और बड़े पैमाने पर हत्याओं के जरिए राज कर रही है. पूरे मीडिल ईस्ट और उसके बाहर मौत, तबाही और अफरा-तफरी फैला रही है. वे मीडिल ईस्ट में दादागिरी करने वाले थे, लेकिन अब वे ऐसे नहीं रहे. पिछले साल पद संभालने के बाद मैंने तुरंत ईरान के साथ बातचीत शुरू की. उन्हें अपना न्यूक्लियर प्रोग्राम और आतंकवाद के खिलाफ समर्थन करने के बदले पूरा आर्थिक सहयोग देने की पेशकश की, लेकिन उन्होंने मना कर दिया. उन्होंने साफ मना कर दिया. यह एक बड़ी गलती थी.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;'ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने में साथ दें'&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;इसके अलावा ट्रंप ने ईरान को आर्थिक रूप से बॉयकॉट करने की अपील करते हुए कहा है कि सभी देश ईरान को पूरी तरह से आर्थिक रूप से अलग-थलग करने में अमेरिका का साथ दें. तेहरान को तबतक अलग-थलग रखा जाना चाहिए, जबतक वे कमर्शियल जहाजों पर हमले बंद न कर दें. न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर अपनी महत्वाकांक्षाएं छोड़ न दें. आतंकवाद का समर्थन बंद न कर दें. आतंकवादी सरकार बुरा बर्ताव इसलिए कर रही है क्योंकि वे मजबूत और आत्मविश्वासी नहीं है. बल्कि इसलिए कि वे कमजोर और हताश हैं. अगर हम एकजुट रहें, तो हम जल्द ही ईरानी आतंकवाद के पिछले 51 सालों के खतरे से मुक्त दुनिया देखेंगे.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;दूसरों ने शांति की बातें की, मैंने उसे हकीकत बनाया: ट्रंप&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;ट्रंप ने कहा, 'अगर जरूरत पड़ी तो अमेरिका अपने अहम नेशनल इंटरेस्ट की रक्षा के लिए सैन्य ताकत का इस्तेमाल करेगा. दूसरे लोगों ने सिर्फ बातें की हैं. मैंने काम करके दिखाया है.'&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;इसके अलावा ट्रंप ने कहा, 'दूसरों ने शांति की बातें की, मैंने उसे हकीकत बनाया. पिछले साल दोबारा सत्ता में आने के बाद से ट्रंप प्रशासन ने ईरान और वेनेजुएला की सरकारों पर हमले किए हैं. साथ ही अफ्रीका और मीडिल ईस्ट में टेररिज्म विरोधी कार्रवाई के नाम पर अमेरिकी हमलों को भी तेज किया है.'&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;ट्रंप ने कहा है कि उन्हें ईरान को लेकर बड़ा फैसला लेना है, लेकिन यह फैसला अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के बाद लिया जाएगा. ईरान शायद यह देख रहा है कि वह मध्यावधि चुनाव में कैसा प्रदर्शन करते हैं, लेकिन उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि मैं चुनाव नहीं लड़ रहा हूं.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;'हमने गाजा युद्ध खत्म कर हजारों जानें बचाईं'&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;ट्रंप ने कहा, 'हमने गाजा के सभी बंधकों को, चाहे वे जिंदा हो या मृत वापस घर पहुंचाया. पिछली बार यूएन जनरल असेंबली को संबोधित किया था, तब गाजा में युद्ध बहुत बुरी तरह चल रहा था. बंधक हमास की सुरंगों में गहरे छिपे हुए थे. इसका कोई अंत नजर नहीं आ रहा था. ऐसा लग रहा था कि यह कभी सुलझ नहीं पाएगा. लेकिन यहां जनरल असेंबली के दौरान हमने वे शुरुआती कदम उठाए, जिन्होंने सबकुछ बदल दिया. कुछ हफ्तों बाद हमने गाजा में युद्ध खत्म किया. हजारों जानें बचाईं.'&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;अमेरिका का कोई मुकाबला नहीं: ट्रंप&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;इससे पहले ट्रंप ने अपने भाषण के शुरुआत में कहा था कि हमारी इकॉनोमी दुनिया के लिए एक मिसाल है. हमारी सेना दुनिया में पावरफुल है, हमारी टेक्नोलॉजी का कोई मुकाबला नहीं. हम लगभग हर सेक्टर में आगे हैं. दो साल पहले हमारा देश खत्म हो रहा था, लेकिन अब दुनिया का सबसे तेजी से आगे बढ़ने वाला देश है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/22/0c0f393d8f5816b88d51e658708fece317900882605231324_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[जंग के बाद US में हथियार खत्म होने दावे पर बोले ट्रंप - 'कायर और गद्दार कहेंगे कि...']]></title><link>https://www.abplive.com/news/world/donald-trump-rejects-concerns-of-ammunition-shortage-amid-west-asia-conflicts-3192433</link><comments>https://www.abplive.com/news/world/donald-trump-rejects-concerns-of-ammunition-shortage-amid-west-asia-conflicts-3192433#respond</comments><pubDate>Tue, 22 Sep 2026 19:25:42 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ विजय कुमार बिट्ठल ]]></dc:creator><category><![CDATA[ विश्व ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/news/world/donald-trump-rejects-concerns-of-ammunition-shortage-amid-west-asia-conflicts-3192433</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/search?s=america&quot; target=&quot;_blank&quot; rel=&quot;noopener&quot;&gt;अमेरिका&lt;/a&gt; के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पश्चिम एशिया में ईरान के साथ जारी संघर्ष और तनाव के बीच बड़ा बयान दिया है. उन्होंने ईरान संघर्ष के दौरान अमेरिका के पास गोला-बारूद और हथियारों की कमी को लेकर लगाए जा रहे अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के पास गोला-बारूद और हथियारों की कोई कमी नहीं है. हम अपने देश में हथियारों के भंडार को लगातार बढ़ा रहे हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;पिछले करीब सात महीनों से पश्चिमी एशिया में अमेरिका और ईरान की बीच तनाव बरकरार है. इस बीच जब अमेरिकी हथियारों की आपूर्ति में कमी की अटकलें सामने लगीं, तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार (22 सितंबर, 2026) को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;ट्रूथ सोशल पोस्ट में ट्रंप ने अटकलों को किया खारिज&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;पोस्ट में डोनाल्ड ट्रंप ने हथियारों की कमी की आशंकाओं को सिरे से खारिज कर दिया और कहा, &amp;lsquo;कायर और देशद्रोही यह कहना पसंद करेंगे कि अमेरिका के पास गोला-बारूद और हथियारों की कमी हो रही है, लेकिन यह सच नहीं है.&amp;rsquo;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;उन्होंने कहा, &amp;lsquo;हमारे पास जितने हथियार हैं, उनका हम कभी पूरी तरह से इस्तेमाल करने की कल्पना भी नहीं कर सकते हैं और अब हम अपने हथियार भंडार को उस लेवल तक बढ़ा रहे हैं, जैसा पहले कभी भी देखा नहीं गया था.&amp;rsquo;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;iframe class=&quot;truthsocial-embed&quot; style=&quot;max-width: 100%; border: 0;&quot; src=&quot;https://truthsocial.com/@realDonaldTrump/117314399826449877/embed&quot; width=&quot;600&quot; allowfullscreen=&quot;allowfullscreen&quot;&gt;&lt;/iframe&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;
&lt;script src=&quot;https://truthsocial.com/embed.js&quot; async=&quot;async&quot;&gt;&lt;/script&gt;
&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;पेजेश्कियान की न्यूयॉर्क यात्रा से पहले ट्रंप ने दिया बयान&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से अमेरिकी हथियार भंडार को लेकर यह बयान ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के नेतृत्व वाले ईरानी प्रतिनिधिमंडल के न्यूयॉर्क दौरे से पहले दी गई है. दरअसल, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान इस हफ्ते संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की बैठक में शामिल होने के लिए न्यूयॉर्क के दौरे पर जाने वाले हैं. जिनकी यात्रा को लेकर डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के विदेश विभाग ने उन्हें वीजा देने की मंजूरी भी दे दी है. वहीं, UNGA के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ईरानी समकक्ष से मुलाकात करने को लेकर संकेत भी दिए हैं.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ेंः &lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/news/world/us-donald-trump-will-meet-greenland-and-denmark-leaders-to-sign-agreement-3192297&quot;&gt;ग्रीनलैंड पर होगा US का कब्जा! डेनमार्क संग डील करेंगे डोनाल्ड ट्रंप&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/22/db6b81901023f133c547a2a153afea6317900838057281126_original.png" width="220"/></item><item><title><![CDATA['7 दिन में होर्मुज खोलने को तैयार लेकिन...', ईरान ने US को भेजा प्रस्ताव, रखी ये शर्त]]></title><link>https://www.abplive.com/news/world/tehran-ready-open-strait-of-hormuz-iran-sends-proposal-for-resume-talks-with-us-3192420</link><comments>https://www.abplive.com/news/world/tehran-ready-open-strait-of-hormuz-iran-sends-proposal-for-resume-talks-with-us-3192420#respond</comments><pubDate>Tue, 22 Sep 2026 18:23:24 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ कार्तिक सागर समाधिया ]]></dc:creator><category><![CDATA[ विश्व ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/news/world/tehran-ready-open-strait-of-hormuz-iran-sends-proposal-for-resume-talks-with-us-3192420</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;ईरान और अमेरिका की एक दूसरे को लेकर दी जा रही धमकियों के बीच तेहरान ने बातचीत को आगे बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है. साथ ही कहा है कि अगले 7 दिनों के भीतर अहम व्यापारिक जलमार्ग स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को खोला जा सकता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;ईरान ने मंगलवार को क्योडो न्यूज से बात करते हुए बताया कि अगर अमेरिका मिलिट्री प्रेशर कम करने की दिशा में शुरुआती कदम उठाता है, तो वह सात दिनों के भीतर हॉर्मुज को फिर से खोलने के लिए तैयार है. ऐसे में इस बयान को अमेरिका और ईरान के रुकी हुई बातचीत को फिर से शुरू करने की कोशिशों के तौर पर देखा जा रहा है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;ईरान के अधिकारी ने कहा है कि यह प्रस्ताव मीडिएटर्स के द्वारा वॉशिंगटन तक पहुंचाया जा चुका है. ऐसे में दोनों देश दुश्मनी को स्थायी तौर पर खत्म करने के मकसद से नई बातचीत की मांग करता है.&amp;nbsp;खबरों की मानें तो इस वीक न्यूयॉर्क में होने वाली यूएन की महासभा का इस्तेमाल मीडिएशन करने वाले देशों के साथ बातचीत करने के लिए योजना बना रहा है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;ट्रंप के साथ पेजेश्कियान की बैठक को किया खारिज&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अधिकारी ने इन योजनाकृत बैठक के दौरान ईरान राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और अमेरिकी राष्ट्रपति &lt;a title=&quot;डोनाल्ड ट्रंप&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/topic/donald-trump&quot; data-type=&quot;interlinkingkeywords&quot;&gt;डोनाल्ड ट्रंप&lt;/a&gt; के बीच मुलाकात की संभावना को खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा है कि डील के जरिए ही प्रगति संभव है. इसके अलावा कहा है कि अगर कूटनीति को आगे बढ़ाना है, तो वॉशिंगटन को गंभीरता और प्रतिबद्धता दिखानी होगी.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;इसके अलावा अधिकारी ने कहा है कि ईरान वॉशिंगटन से ऐसे संकेत चाहता है कि वह बातचीत में लौटने और ईरान के बंदरगाहों की अमेरिकी सैन्य नाकेबंदी को खत्म करने और हॉर्मुज में मिलिट्री ऑपरेशन को रोकने की दिशा में कदम उठाने के लिए तैयार है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;तेहरान की तरफ कूटनीति पर जोर ऐसे वक्त आया है, जब उसके पोर्ट्स पर बैन के चलते कच्चे तेल के निर्यात पर असर पड़ रहा है. यह उसको होने वाली इनकम का मुख्य स्त्रोत में से एक है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अधिकारी ने बताया है कि तेहरान की इस पहल को सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई और देश की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने मंजूरी दे दी है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;रेजाई बोले- अमेरिका के सामने 7 शर्तें रखी है&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;काउंसिल के सचिव मोहसेन रेजाई ने शनिवार को कहा था कि ईरान ने अमेरिका के सामने सात शर्तें रखी हैं. इनमें ईरानी पोर्ट्स की नाकेबंदी को खत्म करना है. ईरान की प्रॉपर्टीज को अनफ्रीज करना शामिल है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;यह जानकारी ऐसे वक्त आई है, जब काउंसिल की तरफ से तय की गई टाइमलाइन नजदीक है. काउंसिल ने 16 अगस्त को फैसला किया था कि अमेरिका 45 दिनों के अंदर अगर पोर्ट्स से नाकेबंदी नहीं हटाता है तो ईरान के पास अमेरिका पर हमला करने का विकल्प खुला रहेगा.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;28 फरवरी को शुरु हुए युद्ध का फिलहाल अंत नजर नहीं आ रहा है. जून में दोनों देशों के बीच हुआ समझौता फिर से दुश्मनी और अनसुलझे विवादों के चलते टूट गया था. यहां से कमर्शियल जहाजों की आवाजाही में काफी कमी देखी गई है. समझौता टूटने के बाद से दोनों देशों के बीच हमले होते रहे हैं. इससे दुनिया के लिए फिर से चिंता बनी हुई है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/22/383d592740f454c70dfee82e3ba71b9117900812295871324_original.png" width="220"/></item><item><title><![CDATA[महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल, भारत के पड़ोसी मु्ल्क में 7 महीने में 3 बार बढ़े दाम]]></title><link>https://www.abplive.com/news/world/bangladesh-petrol-diesel-price-hike-20-taka-fuel-prices-3192341</link><comments>https://www.abplive.com/news/world/bangladesh-petrol-diesel-price-hike-20-taka-fuel-prices-3192341#respond</comments><pubDate>Tue, 22 Sep 2026 16:23:47 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ सौरव कुमार ]]></dc:creator><category><![CDATA[ विश्व ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/news/world/bangladesh-petrol-diesel-price-hike-20-taka-fuel-prices-3192341</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;बांग्लादेश में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में एक बार फिर बड़ी बढ़ोतरी की गई है. सरकार ने डीजल, पेट्रोल, ऑक्टेन और केरोसिन के दाम में 20 टका प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है. नई कीमतें सोमवार से लागू हो गई हैं. यह पिछले सात महीनों में ईंधन की कीमतों में तीसरी बढ़ोतरी है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;सरकार के इस फैसले के बाद फरवरी के मुकाबले बांग्लादेश में ईंधन की खुदरा कीमतों में करीब 38.4 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो चुकी है. ऊर्जा मंत्रालय का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतें बढ़ने और क्षेत्र में अस्थिरता के कारण माल ढुलाई का खर्च बढ़ने की वजह से यह फैसला लेना पड़ा.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;डीजल, पेट्रोल और ऑक्टेन के नए दाम&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;नई दर लागू होने के बाद बांग्लादेश में डीजल की कीमत 115 टका से बढ़कर 135 टका प्रति लीटर हो गई है. यानी इसमें करीब 17.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. पेट्रोल का भाव 140 टका से बढ़कर 160 टका प्रति लीटर हो गया है. ऑक्टेन की कीमत 145 टका से बढ़कर 165 टका और केरोसिन का दाम 135 टका से बढ़कर 155 टका प्रति लीटर हो गया है. सरकार ने इससे पहले अप्रैल और जून में भी ईंधन के दाम बढ़ाए थे. इस तरह फरवरी में हुए चुनाव के बाद यह तीसरी बढ़ोतरी है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;सरकार ने अंतरराष्ट्रीय कीमतों का दिया हवाला&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;बांग्लादेश के ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार मार्च के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में फ्यूल की कीमतें दोगुने से भी ज्यादा बढ़ गई हैं. इसके अलावा क्षेत्रीय तनाव और अस्थिरता के कारण ईंधन को दूसरे देशों से लाने का खर्च भी बढ़ा है. बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी BNP के नेताओं ने भी सरकार के फैसले का बचाव किया है. पार्टी के कार्यवाहक महासचिव और प्रधानमंत्री तारिक रहमान के सलाहकार रूहूल कबीर रिजवी ने कहा कि बढ़ी कीमतों के बाद भी सरकार को डीजल पर प्रति लीटर करीब 70 टका का नुकसान उठाना पड़ेगा.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;बस और ट्रांसपोर्ट का किराया बढ़ने का असर&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;ईंधन महंगा होने के बाद बांग्लादेश में ट्रांसपोर्ट का किराया बढ़ाने की मांग भी शुरू हो गई है. लंबी दूरी के कुछ रूट पर ट्रांसपोर्ट मालिकों ने किराया 100 टका तक बढ़ाने की बात कही है. ढाका के भीतर भी कुछ रूट पर यात्रियों से ज्यादा किराया लिए जाने की शिकायतें सामने आने लगी हैं. ईंधन की कीमत बढ़ने से माल ढुलाई और कंटेनर परिवहन का खर्च भी बढ़ने की आशंका है. चट्टोग्राम बंदरगाह के आसपास काम करने वाले लॉजिस्टिक्स ऑपरेटरों ने भी अपनी सेवाओं की कीमतों में बदलाव की मांग शुरू कर दी है. इससे आयात और निर्यात से जुड़ी कंपनियों की लागत बढ़ सकती है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;उद्योग और गारमेंट सेक्टर पर बढ़ सकता है दबाव&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था में गारमेंट उद्योग की बड़ी भूमिका है. कारोबार से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि ईंधन महंगा होने से पहले से दबाव झेल रहे उद्योगों की लागत और बढ़ सकती है. बांग्लादेश में उद्योगों को पहले से गैस और बिजली की कमी का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे में डीजल और दूसरे ईंधन महंगे होने से उत्पादन, परिवहन और सामान की सप्लाई का खर्च बढ़ सकता है. बांग्लादेश चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष अनवर-उल आलम चौधरी परवेज ने कहा कि सरकार ने ऐसे समय में ईंधन की कीमत बढ़ाई है जब देश में महंगाई पहले से ऊंचे स्तर पर है. उनके अनुसार इससे कारोबार और रोजगार पर दबाव बढ़ सकता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;गरीब और मध्यम वर्ग पर असर की चिंता&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;बांग्लादेश के सेंटर फॉर पॉलिसी डायलॉग ने भी ईंधन की कीमत बढ़ने के लंबे समय तक रहने वाले असर को लेकर चिंता जताई है. थिंक टैंक के अनुसार इसका सबसे ज्यादा असर गरीब और निम्न-मध्यम आय वाले परिवारों पर पड़ सकता है. ईंधन महंगा होने का असर केवल पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहता. परिवहन और माल ढुलाई की लागत बढ़ने पर खाद्य पदार्थों से लेकर रोजमर्रा की दूसरी चीजों की कीमतों पर भी दबाव आ सकता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;खेती पर भी पड़ सकता है असर&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;डीजल की बढ़ी कीमत का असर बांग्लादेश के कृषि क्षेत्र पर भी पड़ने की आशंका है. कृषि अर्थशास्त्रियों के अनुसार देश के करीब 70 प्रतिशत सिंचाई पंप डीजल से चलते हैं. ऐसे में डीजल महंगा होने पर किसानों की सिंचाई लागत बढ़ सकती है. इसका असर खेती की कुल लागत और आगे चलकर कृषि उत्पादों की कीमतों पर पड़ सकता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;iframe title=&quot;YouTube video player&quot; src=&quot;https://www.youtube.com/embed/_ktsxWMtRIg?si=esV8Ypvp-N9z3d-i&quot; width=&quot;560&quot; height=&quot;315&quot; frameborder=&quot;0&quot; allowfullscreen=&quot;allowfullscreen&quot;&gt;&lt;/iframe&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/22/5166022bdaa2035e94fc9589cfd345e017900717662601115_original.png" width="220"/></item><item><title><![CDATA[ग्रीनलैंड पर होगा US का कब्जा! डेनमार्क संग डील करेंगे डोनाल्ड ट्रंप]]></title><link>https://www.abplive.com/news/world/us-donald-trump-will-meet-greenland-and-denmark-leaders-to-sign-agreement-3192297</link><comments>https://www.abplive.com/news/world/us-donald-trump-will-meet-greenland-and-denmark-leaders-to-sign-agreement-3192297#respond</comments><pubDate>Tue, 22 Sep 2026 14:27:42 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ संतोष सिंह ]]></dc:creator><category><![CDATA[ विश्व ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/news/world/us-donald-trump-will-meet-greenland-and-denmark-leaders-to-sign-agreement-3192297</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अमेरिकी राष्ट्रपति &lt;a title=&quot;डोनाल्ड ट्रंप&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/topic/donald-trump&quot; data-type=&quot;interlinkingkeywords&quot;&gt;डोनाल्ड ट्रंप&lt;/a&gt;, ग्रीनलैंड और डेनमार्क के नेताओं संग एक समझौते पर हस्ताक्षर के लिए मंगलवार को मुलाकात करेंगे. इस समझौते से ग्रीनलैंड में अमेरिकी सेना की मौजूदगी बढ़ जाएगी और खनिजों से भरपूर इस आईलैंड को लेकर चल रहा गतिरोध खत्म हो सकता है. ग्रीनलैंड जो कभी डेनमार्क की कॉलोनी हुआ करता था. अभी अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र है और यहां ऊर्जा के विशाल संसाधन मौजूद हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;रॉयटर्स ने मामले की जानकारी रखने वाले 3 लोगों के हवाले से बताया कि जिस समझौते पर वे पहुंचे हैं, उससे अमेरिका को ग्रीनलैंड में अपनी मिलिट्री मौजूदगी बढ़ाने में मदद मिलेगी. इस समझौते से 2 नए मिलिट्री ठिकाने खुलने की उम्मीद है. पहला है नार्सारसुआक, जो कोल्ड वॉर के समय का एयरबेस था और जिसकी आबादी अब घटकर कुछ दर्जन रह गई है. दूसरा है मेस्टर्सविग, जिसका इस्तेमाल अभी डॉग स्लेज पेट्रोल करता है, जो डेनमार्क की एक खास स्पेशल फोर्स यूनिट है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;न्यूयॉर्क में UN जनरल असेंबली में ट्रंप डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन और ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक निल्सन से त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए मिलेंगे. डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन ने कहा है कि इस समझौते से आर्कटिक की सुरक्षा वॉशिंगटन और कोपेनहेगन पर अकेले छोड़ने के बजाय NATO की सामूहिक निगरानी में आ जाएगी.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;ग्रीनलैंड पर अमेरिका का पूरा कंट्रोल होगा- ट्रंप&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि इस समझौते से अमेरिका को ग्रीनलैंड में सुरक्षा और अन्य सभी जरूरतों पर पूरा कंट्रोल मिल जाएगा. डेनमार्क ने ट्रंप के इस दावे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन कहा है कि यह समझौता किंगडम की संप्रभुता और ग्रीनलैंड के आत्म-निर्णय के अधिकार का सम्मान करता है. इस समझौते का टेक्स्ट अभी प्रकाशित नहीं किया गया है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;हालांकि यह डील ग्रीनलैंड को पूरी तरह से खरीदने की ट्रंप की पुरानी महत्वाकांक्षाओं से पीछे हटने का संकेत है. बता दें कि ग्रीनलैंड टेक्सास से 3 गुना बड़ा द्वीप है, जिसकी आबादी सिर्फ 57,000 है और लोग इसके ऊबड़-खाबड़ तटों पर रहते हैं.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/news/world/australia-immigration-rules-indian-students-visa-hopping-yoga-teachers-3192229&quot;&gt;ऑस्ट्रेलिया में माइग्रेशन नियम में बदलाव, इंडियन छात्रों पर क्या होगा असर?&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/22/e7e555af676f4485339afa10bd4d906f17900670767541200_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[Explained: न्यूयॉर्क में ट्रंप और पेजेश्कियान की संभावित मुलाकात, 7 महीने के युद्ध के बीच क्या कूटनीति लेगी नया मोड़?]]></title><link>https://www.abplive.com/news/world/explained-meeting-between-trump-and-masoud-pezeshkian-new-york-will-diplomacy-mark-a-new-turning-point-amid-7-months-of-conflict-3192251</link><comments>https://www.abplive.com/news/world/explained-meeting-between-trump-and-masoud-pezeshkian-new-york-will-diplomacy-mark-a-new-turning-point-amid-7-months-of-conflict-3192251#respond</comments><pubDate>Tue, 22 Sep 2026 14:13:35 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ संकल्प ठाकुर ]]></dc:creator><category><![CDATA[ विश्व ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/news/world/explained-meeting-between-trump-and-masoud-pezeshkian-new-york-will-diplomacy-mark-a-new-turning-point-amid-7-months-of-conflict-3192251</guid><description><![CDATA[&lt;div class=&quot;container&quot;&gt;
&lt;div id=&quot;model-response-message-contentr_32672db2cfef1f86&quot; class=&quot;markdown markdown-main-panel md-content enable-luminous-fast-follows enable-updated-hr-color tutor-markdown-rendering&quot; dir=&quot;ltr&quot; aria-busy=&quot;false&quot; aria-live=&quot;polite&quot;&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot; data-path-to-node=&quot;1&quot;&gt;संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के उच्च स्तरीय सत्र के दौरान न्यूयॉर्क में एक ऐतिहासिक और कूटनीतिक मोड़ देखने को मिल सकता है. अमेरिकी राष्ट्रपति &lt;a title=&quot;डोनाल्ड ट्रंप&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/topic/donald-trump&quot; data-type=&quot;interlinkingkeywords&quot;&gt;डोनाल्ड ट्रंप&lt;/a&gt; ने संकेत दिया है कि वे इस हफ़्ते न्यूयॉर्क में ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से मिलने के लिए 'तैयार' हैं. वॉशिंगटन और तेहरान के बीच पिछले सात महीनों से जारी गंभीर सैन्य संघर्ष और तनाव के बीच अगर दोनों राष्ट्राध्यक्षों के बीच आमने-सामने की यह वार्ता होती है, तो यह मध्य पूर्व और अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीति के लिए एक बेहद निर्णायक घटनाक्रम साबित होगा.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot; data-path-to-node=&quot;2&quot;&gt;रॉयटर्स और ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी 'मेहर' के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करने वाले हैं, जबकि ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियान बुधवार को अपना वक्तव्य देंगे. संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में दोनों नेताओं की एक साथ मौजूदगी ने सीधी बातचीत की संभावनाओं को अचानक से बढ़ा दिया है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot; data-path-to-node=&quot;3&quot;&gt;व्हाइट हाउस के पूर्व घरेलू नीति सलाहकार और पूर्व कार्यवाहक सहायक अटॉर्नी जनरल थियो वोल्ड ने फॉक्स न्यूज़ डिजिटल से बातचीत में कहा, &lt;strong&gt;&lt;em data-path-to-node=&quot;3&quot; data-index-in-node=&quot;131&quot;&gt;&quot;यहां की परिस्थितियां एक काफ़ी नाटकीय पल बना सकती हैं.&quot;&lt;/em&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot; data-path-to-node=&quot;3&quot;&gt;उम्मीद है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा की अपनी दो दिवसीय यात्रा के दौरान ट्रंप कई विदेशी नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकों और कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे, लेकिन सभी की नज़रें पेजेश्कियान के साथ संभावित बैठक पर टिकी हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot; data-path-to-node=&quot;3&quot;&gt;&lt;strong&gt;कड़े नियम, वीज़ा पाबंदियां और कूटनीतिक पृष्ठभूमि&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot; data-path-to-node=&quot;6&quot;&gt;अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने पेजेश्कियान और उनके विदेश मंत्री अब्बास अराघची को संयुक्त राष्ट्र सत्र में शामिल होने के लिए वीज़ा प्रदान कर दिया है, लेकिन उनके अमेरिका आगमन पर सख्त आवाजाही प्रतिबंध लागू किए गए हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p data-path-to-node=&quot;7,0,0&quot;&gt;&lt;strong data-path-to-node=&quot;7,0,0&quot; data-index-in-node=&quot;0&quot;&gt;आवाजाही पर रोक:&lt;/strong&gt; ईरानी प्रतिनिधिमंडल को केवल मैनहट्टन में यूएन मुख्यालय के आसपास के बेहद सीमित दायरे में ही रहने की अनुमति दी गई है.&lt;/p&gt;
&lt;p data-path-to-node=&quot;7,1,0&quot;&gt;&lt;strong data-path-to-node=&quot;7,1,0&quot; data-index-in-node=&quot;0&quot;&gt;व्यावसायिक पाबंदियां:&lt;/strong&gt; उनके द्वारा अमेरिका में किसी भी प्रकार के लग्जरी सामान खरीदने या विशेष व्यापारिक गतिविधियों पर भी रोक रहेगी.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot; data-path-to-node=&quot;8&quot;&gt;इन कड़े नियमों के बावजूद अमेरिका द्वारा वीज़ा जारी करना और ट्रंप का सकारात्मक संकेत देना यह दर्शाता है कि दोनों देश पर्दे के पीछे से कूटनीतिक रास्ते तलाशने के इच्छुक हो सकते हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot; data-path-to-node=&quot;8&quot;&gt;&lt;strong&gt;क्या-क्या हो सकती है बात?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot; data-path-to-node=&quot;11&quot;&gt;लगभग 7 महीने से अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे प्रत्यक्ष सैन्य टकराव, हवाई हमलों और रणनीतिक गतिरोध के बीच यदि यह मुलाकात आयोजित होती है, तो यह शांति स्थापित करने का एक दुर्लभ अवसर होगा. इस बैठक में मुख्य रूप से निम्नलिखित चार बड़े मुद्दों पर गहन मंथन हो सकता है:&lt;/p&gt;
&lt;h4 style=&quot;text-align: justify;&quot; data-path-to-node=&quot;12&quot;&gt;युद्धविराम और शांति समझौता&lt;/h4&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot; data-path-to-node=&quot;13&quot;&gt;राष्ट्रपति ट्रंप इस समय एक बड़े रणनीतिक चौराहे पर खड़े हैं. उन्हें यह तय करना है कि ईरान के साथ जारी संकट को और अधिक सैन्य हमलों के ज़रिए आगे बढ़ाया जाए या फिर एक व्यापक कूटनीतिक समझौते से सुलझाया जाए. इस बैठक में दोनों देश सीधे सैन्य टकराव को रोकने, युद्धविराम के बुनियादी मापदंड तय करने और एक दीर्घकालिक शांति समझौते का ढांचा तैयार करने पर सीधी चर्चा कर सकते हैं.&lt;/p&gt;
&lt;h4 style=&quot;text-align: justify;&quot; data-path-to-node=&quot;14&quot;&gt;कतर की मध्यस्थता और ईरान की 7 शर्तें&lt;/h4&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot; data-path-to-node=&quot;15&quot;&gt;ईरान ने सीधे संवाद से पहले अपनी रणनीतिक सीमाएं स्पष्ट कर दी हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, मध्यस्थ देश कतर के जरिए तेहरान ने अमेरिका के सामने बातचीत शुरू करने के लिए 7 प्रमुख मांगें रखी हैं. इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:&lt;/p&gt;
&lt;p data-path-to-node=&quot;16,0,0&quot;&gt;&lt;strong data-path-to-node=&quot;16,0,0&quot; data-index-in-node=&quot;0&quot;&gt;सैन्य अभियानों का पूर्ण समापन:&lt;/strong&gt; अमेरिका द्वारा ईरान और उसके सहयोगियों पर जारी हमलों को तुरंत रोकना.&lt;/p&gt;
&lt;p data-path-to-node=&quot;16,1,0&quot;&gt;&lt;strong data-path-to-node=&quot;16,1,0&quot; data-index-in-node=&quot;0&quot;&gt;जब्त फंड्स की वापसी:&lt;/strong&gt; अमेरिका और उसके सहयोगी देशों द्वारा फ्रीज़ (ज़ब्त) किए गए ईरानी वित्तीय संसाधनों को बहाल करना.&lt;/p&gt;
&lt;p data-path-to-node=&quot;16,2,0&quot;&gt;&lt;strong data-path-to-node=&quot;16,2,0&quot; data-index-in-node=&quot;0&quot;&gt;नेवल ब्लॉकेड हटाना:&lt;/strong&gt; फारस की खाड़ी और संबंधित समुद्री मार्गों में ईरान की समुद्री नाकेबंदी को पूरी तरह समाप्त करना ताकि उसका व्यापार फिर शुरू हो सके.&lt;/p&gt;
&lt;h4 style=&quot;text-align: justify;&quot; data-path-to-node=&quot;17&quot;&gt;सैन्य धमकियों और एस्केलेशन पर लगाम&lt;/h4&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot; data-path-to-node=&quot;18&quot;&gt;हाल ही में ईरान की सेना इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है. IRGC का कहना है कि यदि अमेरिका कोई नया बड़ा हमला करता है, तो वे नए और अधिक घातक हथियारों का इस्तेमाल करेंगे और युद्ध का दायरा भूगोल बदल देंगे. ऐसे में, इस बैठक का मुख्य उद्देश्य सैन्य तनाव को कम करना और दोनों ओर से दी जा रही चेतावनियों के चक्र को तोड़ना होगा.&lt;/p&gt;
&lt;h4 style=&quot;text-align: justify;&quot; data-path-to-node=&quot;19&quot;&gt;4. कड़े आर्थिक प्रतिबंध और अर्थव्यवस्था की रक्षा&lt;/h4&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot; data-path-to-node=&quot;20&quot;&gt;ट्रंप ने अपने सख्त रुख को कायम रखते हुए ईरान को चेतावनी दी है कि यदि वह समझौते पर राजी नहीं होता, तो उसे अपनी अर्थव्यवस्था के पूरी तरह तबाह होने के लिए तैयार रहना चाहिए. वहीं दूसरी ओर, ईरान चाहेगा कि उस पर लगाए गए कड़े अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों में ढील दी जाए. इस वार्ता में अमेरिकी प्रतिबंधों में छूट के बदले ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उसकी नीतियों से जुड़ी शर्तों पर भी बड़ा मोलभाव संभव है.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot; data-path-to-node=&quot;22&quot;&gt;संभावित मुलाकात के मायने और वैश्विक प्रभाव&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot; data-path-to-node=&quot;23&quot;&gt;यदि न्यूयॉर्क की धरती पर ट्रंप और पेजेश्कियान की यह मुलाकात साकार होती है, तो यह केवल दो नेताओं की बातचीत नहीं होगी, बल्कि मध्य पूर्व में जारी 7 महीने लंबे संघर्ष का रुख मोड़ने वाला बिंदु साबित हो सकती है. हालाँकि, दोनों ही नेताओं को अपने-अपने देशों में भारी राजनीतिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है. जहां ट्रंप को अमेरिका में सख्त नीति के समर्थकों को जवाब देना होगा, वहीं पेजेश्कियान पर ईरान के कट्टरपंथी धड़ों का दबाव रहेगा. इसके बावजूद, यदि कूटनीति सफल होती है, तो इससे न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाज़ार और तेल आपूर्ति तंत्र को भी बड़ी राहत मिलेगी.&lt;/p&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;/div&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/22/95f4736d6a1793ad0d28a36af18f64381790065314207130_original.jpeg" width="220"/></item></channel></rss>