पाकिस्तान सरकार ने देश में काम कर रहे विदेशी मीडिया संगठनों के लिए नई गाइडलाइंस जारी की हैं. इनका उद्देश्य विदेशी पत्रकारों और उनसे जुड़े स्थानीय सहयोगियों के कामकाज के लिए एक औपचारिक ढांचा तय करना बताया गया है. हालांकि, प्रेस की आज़ादी से जुड़े संगठनों और पत्रकारों का कहना है कि नए नियम स्वतंत्र रिपोर्टिंग को सीमित कर सकते हैं और पत्रकारों के काम में अतिरिक्त प्रशासनिक बाधाएं पैदा करेंगे.
क्या हैं नई गाइडलाइंस?
'पाकिस्तान में कार्यरत विदेशी मीडिया और उनके सहयोगियों के लिए गाइडलाइंस' शीर्षक वाला यह दस्तावेज़ इस सप्ताह स्थानीय और विदेशी मीडिया संस्थानों को भेजा गया.
नई व्यवस्था के तहत इस्लामाबाद, लाहौर और कराची के बाहर रिपोर्टिंग करने वाले विदेशी मीडिया संगठनों से जुड़े पाकिस्तानी पत्रकारों, फ्रीलांसरों, स्ट्रिंगरों, फिक्सरों और अन्य सहयोगियों को पहले सूचना मंत्रालय के एक्सटर्नल पब्लिसिटी विंग में पंजीकरण (Registration) कराना होगा और आवश्यक मान्यता (Accreditation) प्राप्त करनी होगी.
सरकार का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य विदेशी मीडिया पर रोक लगाना नहीं, बल्कि उनके पंजीकरण और कामकाज के लिए एक स्पष्ट, पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था तैयार करना है.
विवाद क्यों शुरू हुआ?
यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब इस्लामाबाद में मौजूद विदेशी पत्रकारों को एक व्हाट्सऐप संदेश भेजा गया. इसमें कहा गया था कि इस्लामाबाद, लाहौर और कराची के बाहर किसी भी तरह की रिपोर्टिंग, फिल्मांकन या कंटेंट तैयार करने से पहले नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) लेना अनिवार्य होगा.
संदेश में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में काम कर रहे पत्रकारों को तुरंत लौटने, आवश्यक मंजूरी लेने और भविष्य में वहां रिपोर्टिंग टीम भेजने से पहले सूचना मंत्रालय को सूचित करने के निर्देश भी दिए गए थे.
सरकार को सफाई क्यों देनी पड़ी?
हालांकि यात्रा से पहले मंजूरी लेने की व्यवस्था पहले भी मौजूद थी, लेकिन नई गाइडलाइंस ऐसे समय जारी की गई हैं जब पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में विदेशी मीडिया की रिपोर्टिंग को लेकर विवाद चल रहा था.
पाकिस्तानी अधिकारियों का आरोप है कि कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने वहां पुलिस और जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के समर्थकों के बीच हुई झड़पों और विधानसभा चुनावों से जुड़ी घटनाओं की भ्रामक तस्वीर पेश की. सरकार का कहना है कि नई गाइडलाइंस का उद्देश्य केवल रिपोर्टिंग प्रक्रिया को व्यवस्थित करना है, न कि प्रेस की स्वतंत्रता को सीमित करना.
क्या PoK में स्वतंत्र कवरेज रोकना चाहती है पाक सरकार
प्रेस स्वतंत्रता से जुड़े संगठन और कुछ पत्रकारों का कहना है कि नई गाइडलाइंस के तहत इस्लामाबाद, लाहौर और कराची के बाहर, खासकर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) जैसे संवेदनशील इलाकों में रिपोर्टिंग के लिए पहले से सरकारी मंजूरी लेने की अनिवार्यता स्वतंत्र रिपोर्टिंग को प्रभावित कर सकती है. इस गाइडलाइंस के बाद अगर सरकार नहीं चाहेगी तो ऐसे संवेदनशील इलाकों से सरकार के खिलाफ विद्रोह और जनता के गुस्से की खबर बाहर नहीं आएगी.
उनका तर्क है कि यदि हर रिपोर्टिंग असाइनमेंट के लिए अनुमति लेनी पड़े, तो विरोध-प्रदर्शनों, सुरक्षा अभियानों या सरकार-विरोधी घटनाओं की स्वतंत्र कवरेज मुश्किल हो सकती है.
मीडिया अधिकार समूहों ने जताई चिंता
नई गाइडलाइंस की कई मीडिया अधिकार संगठनों ने आलोचना की है. पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (HRCP) का कहना है कि ये नियम पत्रकारिता को आसान बनाने के बजाय समाचार संग्रह की प्रक्रिया पर नौकरशाही नियंत्रण बढ़ा सकते हैं. आयोग के मुताबिक, इससे सार्वजनिक हित से जुड़े मुद्दों पर स्वतंत्र रिपोर्टिंग प्रभावित होने का खतरा है.
आयोग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा कि पाकिस्तान में पत्रकारों के लिए काम करने की जगह लगातार सिमट रही है. मनमाने प्रतिबंध, बढ़ती सेंसरशिप और प्रशासनिक बाधाएं स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही हैं.
कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (CPJ) के अफगानिस्तान और पाकिस्तान प्रतिनिधि वलीउल्लाह रहमानी ने भी कहा कि नई गाइडलाइंस विदेशी पत्रकारों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने का रास्ता खोल सकती हैं और उन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों में स्वतंत्र रूप से रिपोर्टिंग करने से रोक सकती हैं.
पाकिस्तान फेडरल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (PFUJ) ने भी इन नियमों पर चिंता जताते हुए सरकार से इन्हें वापस लेने की मांग की है.
प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में पाकिस्तान की स्थिति
रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (RSF) द्वारा जारी 2026 वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में पाकिस्तान 180 देशों में 153वें स्थान पर है. इस सूची में पाकिस्तान का कुल स्कोर 32.61 है, जो वहां प्रेस की सीमित स्वतंत्रता की ओर इशारा करता है.
इन देशों में मीडिया पर सबसे ज्यादा प्रतिबंध
उत्तर कोरिया- लगभग पूरा मीडिया सरकारी नियंत्रण में है. विदेशी मीडिया तक पहुंच बेहद सीमित है और कड़ी सेंसरशिप लागू रहती है.
इरिट्रिया- स्वतंत्र मीडिया लगभग समाप्त हो चुका है. पत्रकारों की गिरफ्तारी और हिरासत के मामले लगातार सामने आते रहे हैं.
चीन- इंटरनेट सेंसरशिप, विदेशी वेबसाइटों पर प्रतिबंध और मीडिया पर सख्त सरकारी नियंत्रण लागू है.
ईरान- सरकार की आलोचना करने वाले पत्रकारों और मीडिया संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई के मामले लगातार सामने आते हैं.
तुर्कमेनिस्तान- इसे दुनिया के सबसे नियंत्रित मीडिया वातावरण वाले देशों में गिना जाता है, जहां स्वतंत्र पत्रकारिता की लगभग कोई गुंजाइश नहीं है.
बेलारूस- स्वतंत्र मीडिया संस्थानों और पत्रकारों पर लगातार कानूनी कार्रवाई और सरकारी दबाव की खबरें आती रहती हैं.
वियतनाम- अधिकांश मीडिया राज्य के नियंत्रण में है और स्वतंत्र पत्रकारिता पर कई तरह की पाबंदियां लागू हैं.
सऊदी अरब- मीडिया और ऑनलाइन अभिव्यक्ति से जुड़े कानून काफी सख्त हैं तथा आलोचनात्मक रिपोर्टिंग पर कार्रवाई हो सकती है.
क्यूबा- अधिकांश समाचार माध्यम सरकार के नियंत्रण में संचालित होते हैं और स्वतंत्र मीडिया की भूमिका सीमित है.
अफगानिस्तान (तालिबान शासन)- तालिबान के सत्ता में आने के बाद कई मीडिया संस्थान बंद हो चुके हैं और पत्रकारों, विशेषकर महिला पत्रकारों, पर व्यापक प्रतिबंध लगाए गए हैं.
