25 साल की बातचीत के बाद यूरोपीय संघ और मर्कोसुर के बीच ऐतिहासिक समझौता, FTA से दुनिया पर क्या होगा असर?
ईयू और दक्षिण अमेरिकी देशों के मर्कोसुर ब्लॉक ने ऐतिहासिक समझौता करते हुए सभी को चौंका दिया है. यह समझौता ऐसे वक्त आया है, जब दुनिया के बाजार अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के टैरिफ वॉर से जूझ रहे हैं.

यूरोपीय संघ यानी EU के साथ दक्षिण अमेरिकी देशों के मर्कोसुर ब्लॉक ने ऐतिहासिक समझौता किया है. यह समझौता 25 साल से ज्यादा चली बातचीत के बाद लिया गया है. मर्कोसुर ब्लॉक ने ऐतिहासिक मुक्त बाजार (फ्री मार्केट) समझौते पर हस्ताक्षर किया है. यह डील 17 जनवरी को पराग्वे के असुनसियन में की गई है. दोनों देशों के बीच आर्थि संबंधों को और मजबूत करने के लिए इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं. खबर है कि मर्कोसुर का नया सदस्य बोलीविया इस समझौते में शामिल हो सकता है. वहीं, वेनेजुएला को ब्लॉक से बाहर करने के बाद से रखा गया है.
दोनों पक्षों में हुए समझौते में 90% व्यापार होने के बाद टैरिफ धीरे-धीरे हटा दिया जाएगा. अमेरिकी देशों को बीफ, पोल्ट्री, चीनी और सोया जैसे कृषि निर्यात के लिए यूरोपीय बाजार तक पहुंच मिलेगी.
इसके बदले यूरोपीय कंपनियों को दक्षिण अमेरिका में कारों, मशीनरी, केमिकल, फार्मास्यूटिक्ल और अन्य औद्योगिक सामानों के निर्यात के समय मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ेगा.
📍 🇵🇾 Just arrived in Asunción, Paraguay, for a historic occasion: the signing of the EU–Mercosur Association Agreement.
— António Costa (@eucopresident) January 17, 2026
In the very city where Mercosur was born back in 1991, today we take a key step to develop the world’s largest free trade area.
Breaking down barriers,… pic.twitter.com/M7fwI5dRwE
इतने साल क्यों लग गए बातचीत में?
बातचीत 1990 में शुरू हुई थी. लेकिन राजनीतिक और आर्थिक मतभेदों के चलते इसे रोक दिया गया था. यूरोपीय किसानों ने सस्ते दक्षिण अमेरिकी कृषि आयात से कॉम्पिटिशन के बारे में चिंता जताई थी. वहीं, ईयू ने मर्कोसुर देशों पर सख्त पर्यावरण, खाद्य सुरक्षा और श्रम मानकों को पूरा करने के लिए प्रेशर बनाया था. इनमें जंगलों की कटाई, पशु कल्याण और उत्पादन नियमों पर विवाद था. साथ ही दक्षिण अमेरिका में लगातार राजनीतिक बदलावों की वजह से इस डील में देरी हुई. इस समझौते को फिर से शुरू किया गया, इसकी वजह वैश्विक व्यापार में बढ़ते तनाव और डोनाल्ड ट्रंप के तरफ से लगाए जा रहे नए टैरिफ बड़ी वजह है.
Today, we signed a Partnership Agreement and an Interim Trade Agreement with Mercosur.
— EU Trade 🇪🇺 (@Trade_EU) January 17, 2026
Together, we create one of the 🌎’s largest trade zones, covering 720 million consumers, and strengthen cooperation on economic & geopolitical issues
🔗 https://t.co/hkqgZHtnrP#EUTrade pic.twitter.com/Jd55cHP5F1
जियोपॉलिटिक्स में क्या भूमिका निभाएगा ये समझौता
जियोपॉलिटिक्स की मद्देनजर यह बेहद ही महत्वपूर्ण समझौता है. यह संसधान समृद्ध क्षेत्र में यूरोपीय संघ की उपस्थिति को मजबूत करता है. यह चीन से प्रभावित है. साथ ही अमेरिका की तरफ से विवादित है. यूरोपीय कमिशन की तरफ से अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इस समझौते को टैरिफ की बजाय निष्पक्ष व्यापार और लंबे समय से सहयोग के पक्ष में सोच समझकर लिया गया फैसला बताया है. यह विविध वैश्विक साझेदारी बनाए रखने के इरादे को संकेत देती है.
यूरोपीय किसान इस समझौते से डर में क्यों?
इस समझौते का विरोध यूरोपीय देश के किसान कर रहे हैं. कई ईयू देशों के किसानों को डर है कि इस समझौते से सस्ते कृषि उत्पादों का आयात बढ़ सकता है. इससे घरेलू कीमतों और आय पर दबाव पड़ेगा. इस समझौते से क्या मर्कोसुर को सहमति का सामना करना पड़ेगा. दक्षिण अमेरिका में इस डील को व्यापक समर्थन मिला है. इनमें राजनीतिक बारीकियां भी हैं.
ब्राजील और अर्जेंटीना का समझौते को समर्थन
ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने लंबे समय से इस समझौते को बहुपक्षीय सहयोग के रूप में समर्थन दिया है. अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली ने भी इस समझौते का समर्थन किया है. इससे पहले अर्जेंटीना भी इस समर्थन के खिलाफ था.
EU और मर्कोसुर में डील क्यों मायने रखती है?
इस डील से दोनों देशों समेत पूरी दुनिया के सबसे बड़े मुक्त व्यापार को मजबूती मिलेगी. ये ऐसे समय ओपन मार्केट के समर्थन को मजबूत करेगा, जब व्यापार युद्ध और आर्थिक राष्ट्रवाद बढ़ रहा है. ये इस बात का भी उदाहरण है कि जटिल व्यापारिक समझौते राजनीतिक दबाव के बीच भी सफल हो सकते हैं और अर्थव्यवस्थाएं टकराव की बजाय सहयोग के लिए प्रतिबद्ध होने को तैयार हो सकती हैं.
Source: IOCL

























