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सऊदी में फाइटर जेट की तैनाती के बाद आंखों की किरकिरी बना पाकिस्तान? आसिम मुनीर भागे-भागे पहुंचे ईरान

ईरान - अमेरिका की जंग में मध्यस्थ बना पाकिस्तान सऊदी में अपने फाइटर जेट की तैनाती को लेकर सवालों के घेरे में हैं. ऐसे में आसिम मुनीर के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने ईरान से जानकारी साझा की है

Asim Munir Iran Visit: पाकिस्तान की तीनों सेनाओं के प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की अगुवाई में पाकिस्तान का कुल चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल बुधववार की शाम ईरान की राजधानी तेहरान में ईरान गया था. इसमें आसिम मुनीर के अलावा पाकिस्तानी गृहमंत्री मोहसिन नकवी, पाकिस्तान सेना के डीजी (मिलिट्री ऑपरेशंस) मेजर जनरल काशिफ अब्दुल्ला और आसिम मुनीर का प्राइवेट सेक्रेटरी मेजर जनरल सैयद जवाद तारिक शामिल थे.

सूत्रों के मुताबिक, तेहरान बातचीत के लिए गए पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल में डीजी (मिलिट्री ऑपरेशंस) मेजर जनरल काशिफ अब्दुल्ला को इसलिए ले जाया गया था, क्योंकि पाकिस्तान ने पिछले गुरुवार को सऊदी अरब में ईरानी सीमा से 200 किलोमीटर दूर सऊदी अरब के अब्दुल अजीज एयरबेस पर अपने एफ-16 फाइटर जेट्स की एक स्क्वार्डन तैनात की थी.

यमन बॉर्डर के पास अपनी 25 वीं मैकेनाइज्ड डिवीजन की 12 वीं आर्मर्ड ब्रिगेड और 31 वीं मैकेनाइज्ड ब्रिगेड टाइनाइट की है. ऐसे में डीजी (मिलिट्री ऑपरेशंस) मेजर जनरल काशिफ अब्दुल्ला ने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची वाले ईरानी प्रतिनिधिमंडल को ब्रीफिंग दी कि ये तैनाती ईरान के खिलाफ नहीं है.

क्या आसिम मुनीर लगातार स्टीव विटकॉफ के संपर्क में था? 

पाकिस्तानी फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को लेकर वाइट हाउस के सूत्रों ने अमेरिकी मीडिया को जानकारी दी थी कि रविवार को इस्लामाबाद में बातचीत फेल होने के बाद से आसिम मुनीर लगातार स्टीव विटकॉफ के संपर्क में था. बातचीत कर रहा था. 

आसिम मुनीर ने अमेरिका के मध्य एशिया में स्पेशल दूत स्टीव विटकॉफ के बातचीत के आधार पर तेहरान में ईरानी नेताओं के साथ बैठक में अब्बास अराघची, काजेम गरीबाबादी, इस्माइल बागी को अमेरिका की नई रियायतों के बारे में जानकारी दी.

वैसे अमेरिका और ईरान के संबंधों में पाकिस्तान के मध्यस्थ होने का यह कोई नया मामला नहीं है. साल 1979 से जब से अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक संबंध खत्म हुए हैं, तब से ही पाकिस्तान ईरान के लिए अमेरिका के साथ बैक चैनल वार्ता करता है. 

साल 1979 से वाशिंगटन में स्थित पाकिस्तानी दूतावास में एक ईरानी इंटरेस्ट सेक्शन है, जिसका निदेशक ईरानी डिप्लोमेट मेहदी अतेफात है. मेहदी अतेफात वाशिंगटन स्थित पाकिस्तान दूतावास में ही बने एक दफ्तर में बैठते हैं. साथ ही ईरानी इंटरेस्ट सेक्शन के निदेशक को पाकिस्तान ने किसी डिप्लोमेट को मिलने वाली सभी रियायतें भी दिलवायी हैं.

यह भी पढ़ें: अमेरिकी संदेश लेकर पाक आर्मी चीफ आसिम मुनीर पहुंचे तेहरान, US-ईरान 2.0 वार्ता पर जल्द निकलेगा रास्ता?

ट्रंप और विटकॉफ का पाकिस्तानी कनेक्शन

इसी तरह जो ट्रंप के मध्य एशिया में विशेष दूत और उनके मित्र स्टीव विटकॉफ का भी पाकिस्तान के साथ विशेष कनेक्शन है जो ईरान के साथ वार्ता में मुख्य भूमिका में हैं. कुछ ही महीने पहले अमेरिका के न्यूयॉर्क के मैनहटन में स्थित पाकिस्तानी सरकार के रोजवेल्ट होटल के पुनर्निर्माण की डील स्टीव विटकॉफ ने करवायी थी. इसके तहत पाकिस्तानी सरकार के इस होटल का पुनर्निर्माण अमेरिका और पाकिस्तान की सरकार मिलकर करेगी.  ट्रम्प और विटकॉफ पर फरवरी में हुई डील के बाद से आरोप लग रहा था कि इस डील के तहत ट्रम्प और विटकॉफ पुन:निर्माण में रियल स्टेट कारोबारियों को फ़ायदा दिलवाएंगे. 

इसी तरह पाकिस्तान ने पिछले साल वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंसियल नाम की क्रिप्टोकरेंसी वेंचर के साथ शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर की मौजूदगी में करार किया था, जिसके को फाउंडर स्टीव विटकॉफ और ट्रम्प के दामाद जेराड कुशनर समेत ट्रम्प के दोनों बेटो एरिक ट्रम्प, डोनाल्ड ट्रम्प जूनियर हैं और ट्रम्प परिवार के ही कुल 60% शेयर हैं.

ट्रम्प के दामाद जेराड कुशनर भी ईरान के साथ वार्ता की टीम में शामिल हैं. ऐसे में कुछ दिन पहले ही अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने दावा किया था कि पाकिस्तान को ईरान-अमेरिका जंग में अमेरिका की तरफ से मध्यस्थ की कुर्सी मिलने का एक बड़ा कारण रोजवेल्ट होटल डील और क्रिप्टो डील है. इसमे ट्रम्प को खुश करने की वजह से अमेरिका को मध्यस्त की कुर्सी मिली है.

सऊदी पहुंचे थे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी कल सऊदी अरब पहुंचे थे. जेद्दाह में शहबाज शरीफ ने सऊदी के प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान से मुलाकात की. ये सऊदी अरब में पाकिस्तान द्वारा अपने लड़ाकू विमान और सेना तैनात करने के बाद पहली मुलाकात थी. 

इससे पहले 6 मार्च को युद्ध के बीच पाकिस्तान का फील्ड मार्शल आसिम मुनीर सऊदी जाकर सऊदी के रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान से मुलाकात की थी. वादा किया था कि पाकिस्तान सऊदी की रक्षा के लिये अपनी सैन्य ताकत को तैनात करेगी, लेकिन पाकिस्तान ने ये वादा नहीं निभाया.

इसके बाद सऊदी अरब द्वारा और दबाव बनाने पर 12 मार्च पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, आसिम मुनीर और इशाक डार सऊदी अरब जाते हैं और फिर से सऊदी अरब से वादा करते हैं कि उसकी सेना जल्द ही सऊदी अरब में अपने फाइटर जेट्स और एंटी ड्रोन सिस्टम तैनात कर देगा और सैनिकों को भी भेज देगा. 

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हालांकि पाकिस्तान इस वादे को भी पूरा नहीं करता है, लेकिन इस मामले में टर्निंग पॉइंट संयुक्त अरब अमीरात (UAE) द्वारा पाकिस्तान को दिए गए कर्ज की 3.5 बिलियन डॉलर की किश्त मांगने को माना जा रहा है, जिसके बाद पाकिस्तान ने पहले सऊदी से वित्तीय मदद मांगी और फिर गुरुवार 9 अप्रैल से सऊदी अरब में अपनी सेना, फाइटर जेट,एंटी ड्रोन सिस्टम और साब-2000 एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (AWCS) की तैनाती शुरू कर दी. 

जिसके बाद सबसे पहले एबीपी न्यूज़ ने 13 अप्रैल को खुलासा किया था कि सऊदी अरब की सरकार ने सैन्य तैनाती के बदले पाकिस्तान को 3 बिलियन डॉलर की मदद देने के मंजूरी दे दी है और इसी वजह से सऊदी अरब का शुक्रिया करने और सैन्य तैनाती के बाद सऊदी के डिफेंस का वादा करने शहबाज शरीफ कल सऊदी अरब पहुंचे थे. जहां उन्होंने ईरान-अमेरिका के बीच वार्ता में सऊदी अरब से भी अमेरिका पर ईरान के साथ समझौता करने के लिए बात करने की मांग की थी.

आसिम मुनीर की बातों का आकलन कर रहा है ईरान

तेहरान में कल आसिम मुनीर द्वारा ईरानी विदेश मंत्रालय के नेताओं को अमेरिका की शर्तें और रियातों की जानकारी देने के बाद ईरान की सरकार ने अपनी सरकारी न्यूज एजेंसी तसनीम न्यूज एजेंसी को जानकारी दी कि ईरान फिलहाल आसिम मुनीर द्वारा बतायी गई बातों का आकलन कर रहा है और इसके बाद ही तय होगा कि अमेरिका के साथ दूसरे दौर की वार्ता करने ईरान का प्रतिनिधिमंडल जाएगा या नहीं.

इसके पीछे वजह है कि आसिम मुनीर की बातचीत और ईरान को अमेरिका के ऑफर की जानकारी के बाद ईरान की तरफ से कहा गया कि यूरेनियम के मामले पर दोनों देशों के बीच मतभेद बना हुआ है. जहां अमेरिका चाहता है की ईरान 20 साल तक यूरेनियम को एनरिक नहीं करेगा, तो ईरान अपनी नागरिक जरूरतों को देखते हुए सिर्फ 5 साल के लिए तैयार है.

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शिवांक मिश्रा साल 2020 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं और इस वक्त एबीपी न्यूज़ में बतौर प्रिंसिपल कॉरेस्पॉन्डेंट कार्यरत हैं. उनकी विशेषज्ञता साइबर सुरक्षा, इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग और जनहित से जुड़े मामलों की गहन पड़ताल में है. कनाडा में खालिस्तानी आतंकियों के शरण मॉड्यूल से लेकर भारत में दवा कंपनियों की अवैध वसूली जैसे विषयों पर कई महत्वपूर्ण खुलासे किए हैं. क्रिकेट और फुटबॉल देखना और खेलना पसंद है.
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