US Iran War: US नाकाबंदी के बाद लौटा चीनी जहाज, ट्रंप बोले- होर्मुज में नहीं करने देंगे ईरान को उगाही, समझौते पर जानें क्या कहा
तनाव के बीच पाकिस्तान ने दोनों पक्षों को फिर से बातचीत की टेबल पर लाने की कोशिशें तेज कर दी हैं. वहीं Sergey Lavrov के चीन दौरे की खबर भी सामने आई है, जिससे संकेत मिल रहा है कि वैश्विक शक्तियां इस संकट को कूटनीति से सुलझाने में जुटी हैं.

US Iran War: इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई शांति वार्ता विफल होने के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव और तेजी से बढ़ गया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाकाबंद के बाद कहा कि ईरान ने इस युद्ध में बहुत कुछ खोया है, उनकी सेना को नुकसान हुआ है, उनके रडार खत्म कर दिए गए हैं. उनके नेता की मौत हो गई है. उनके पास कुछ नहीं बचा है. ट्रंप ने कहा कि ईरान को परमाणु संपन्न देश नहीं बनने देंगे. साथ ही, उन्होंने कहा कि ईरान होर्मुज में उगाही कर रहा है, जो उसे नहीं करने दिया जाएगा.
उन्होंने आगे कहा कि चीन को लेकर बोला कि चीन के साथ उनके रिश्ते अच्छे हैं और चीन भी चाहते हैं कि ये युद्ध जल्दी से खत्म हो जाए. वो कोई गुप्त जानकारी शेयर नहीं कर रहा है. क्यूबा को लेकर बोला कि वहां पर हालात ख़राब है. वहां पर क्राइम बढ़ रहा है. लोग परेशान हैं. ईरान से युद्ध खत्म होने पर हम वहां पर ध्यान देंगे.
समझौते को बेताब ईरान
राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि ईरान को किसी भी हाल में परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा. उन्होंने साफ कहा कि अगर तेहरान उनकी शर्तों से सहमत नहीं होता है, तो कोई समझौता नहीं होगा. ट्रंप के मुताबिक, अमेरिका को दूसरी तरफ से संदेश मिला है कि ईरान समझौते के लिए “बेहद उत्सुक” है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने नाकेबंदी कर रखी है, जिसके कारण ईरान का कारोबार लगभग ठप हो गया है और फिलहाल कोई सक्रिय लड़ाई नहीं हो रही है.
इसी बयान में ट्रंप ने धार्मिक नेतृत्व पर भी टिप्पणी करते हुए Pope Leo को लेकर कहा कि वह उनसे माफी नहीं मांगेंगे. ट्रंप ने आरोप लगाया कि पोप लियो अपराध के मामलों में “कमजोर” रुख रखते हैं, जबकि अमेरिका कानून-व्यवस्था में विश्वास करता है. उन्होंने यह भी कहा कि माफी मांगने की कोई जरूरत नहीं है और उनके अनुसार पोप का रुख गलत है.
वापस लौटा चीन का जहाज
वार्ता फेल होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तय डेडलाइन खत्म होते ही Strait of Hormuz में अमेरिकी युद्धपोतों ने नाकेबंदी शुरू कर दी. इसका असर तुरंत दिखा, जब शिप-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार चीन की ओर जा रहा एक तेल टैंकर रास्ते से वापस लौटने पर मजबूर हो गया. चीन जाने वाली एक शिप रिच स्टेरी को नेवल ब्लाकेड में वापस लौटाया गया. वापस लौटाए जाने के बाद पिछले 4 घंटे से चीन जाने वाली शिप सूझा के पास पर्शियन गल्फ में खड़ी है.
डेडलाइन से पहले ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अगर ईरान की नौसेना होर्मुज की ओर बढ़ती है, तो उसे उसी तरह तबाह कर दिया जाएगा जैसे अमेरिकी नेवी ड्रग तस्करों की नावों को नष्ट करती है. उन्होंने दावा किया कि ईरान की नौसेना पहले ही काफी हद तक कमजोर हो चुकी है. अमेरिकी कदम के बाद Islamic Revolutionary Guard Corps के प्रवक्ता Ebrahim Zolfaqari ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका जमीनी युद्ध शुरू करता है, तो ईरान 10 लाख सैनिक तैनात कर सकता है और अमेरिकी युद्धपोतों का “सख्ती से” जवाब दिया जाएगा.
चीन की यूएस को चेतावनी
चीन के रक्षा मंत्री Dong Jun ने United States को कड़ी चेतावनी देते हुए साफ कहा है कि China अपने हितों से पीछे नहीं हटेगा, खासकर Iran के साथ उसके व्यापार और ऊर्जा समझौतों को लेकर. डॉन्ग जून ने कहा कि चीनी जहाज Strait of Hormuz और खाड़ी क्षेत्र के जलक्षेत्र में लगातार आवाजाही कर रहे हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि चीन ईरान के साथ अपने ऊर्जा और व्यापारिक समझौतों का पूरी तरह सम्मान करेगा और उम्मीद करता है कि अमेरिका इन मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगा.
उन्होंने यह भी कहा कि हॉर्मुज जैसे अहम समुद्री मार्ग पर ईरान का नियंत्रण है और यह चीन के लिए खुला हुआ है, इसलिए वहां से उसकी ऊर्जा आपूर्ति जारी रहेगी. इस बयान से साफ है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अब चीन भी खुलकर अपने रणनीतिक और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सामने आ गया है, जिससे वैश्विक स्तर पर शक्ति संतुलन और अधिक जटिल हो सकता है.
दूसरी ओर तनाव के बीच पाकिस्तान ने दोनों पक्षों को फिर से बातचीत की टेबल पर लाने की कोशिशें तेज कर दी हैं. वहीं रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के चीन दौरे की खबर भी सामने आई है, जिससे संकेत मिल रहा है कि वैश्विक शक्तियां इस संकट को कूटनीति से सुलझाने में जुटी हैं. इसके अलावा भारत की ओर से भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने भी संघर्ष-विराम का पालन करने और कूटनीतिक समाधान खोजने पर जोर दिया है, खासकर होर्मुज में नौवहन की स्वतंत्रता बहाल करने को लेकर.
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