चीन के एक दूर-दराज रेगिस्तानी इलाके में तेजी से एक बड़ा सैन्य परिसर तैयार किया जा रहा है, जिसे लेकर सुरक्षा विशेषज्ञों में चिंता बढ़ गई है. सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर दावा किया जा रहा है कि यह पूरा ढांचा चीन की परमाणु क्षमता को और मजबूत करने के लिए बनाया जा रहा है, ताकि किसी हमले की स्थिति में भी वह जवाबी कार्रवाई करने में सक्षम रहे. रिपोर्टों के मुताबिक, पूर्वी शिनजियांग क्षेत्र में दो बड़े अष्टकोण (Octagon) आकार के सैन्य परिसर बनाए गए हैं. इनके चारों तरफ सैकड़ों कंक्रीट लॉन्च पैड तैयार किए जा रहे हैं. माना जा रहा है कि इनका इस्तेमाल मोबाइल मिसाइल लॉन्चर, एयर डिफेंस सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और सैटेलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम के लिए किया जा सकता है.

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इन परिसरों के भीतर सैनिकों के रहने की व्यवस्था, बड़े वाहनों के लिए शेड, हथियारों के भंडारण बंकर और कमांड सेंटर भी बनाए जा रहे हैं. सैटेलाइट इमेज में आसपास सड़कें, रेलवे लाइन, एयरफील्ड और ईंधन स्टोरेज जैसी सुविधाएं भी दिखाई दे रही हैं. हाल के महीनों में यहां बड़े सैन्य वाहनों की आवाजाही और अभ्यास भी देखा गया है. चीन की परमाणु नीति अभी भी “नो फर्स्ट यूज यानी पहले परमाणु हमला न करने पर आधारित है. लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह पूरा नेटवर्क चीन की सेकंड स्ट्राइक क्षमता को मजबूत करने के लिए बनाया जा रहा है, ताकि अगर उस पर हमला हो भी जाए तो वह जवाबी परमाणु हमला कर सके.

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चीन की परमाणु हथियारों की संख्या 2030 में कितनी होगी?

पेंटागन की एक रिपोर्ट के अनुसार चीन 2030 तक अपने परमाणु हथियारों की संख्या 1000 तक पहुंचा सकता है. इसके साथ ही चीन साइलो आधारित मिसाइलों के अलावा मोबाइल लॉन्चर और पनडुब्बी से दागी जाने वाली मिसाइलों पर भी तेजी से काम कर रहा है. अमेरिका और चीन के बीच ताइवान को लेकर तनाव पहले से ही बढ़ा हुआ है. ऐसे में चीन का यह कदम दोनों देशों के बीच परमाणु प्रतिस्पर्धा को और तेज कर रहा है. सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह निर्माण चीन की रणनीतिक क्षमता में बड़ा बदलाव दिखाता है. अमेरिकी विशेषज्ञ हंस क्रिस्टेंसन ने इसे असाधारण प्रयास बताया है. वहीं अन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह पूरा सिस्टम चीन की कमांड, कंट्रोल और कम्युनिकेशन (C3) क्षमता को और मजबूत करेगा.

भारत के लिए भीमहत्वपूर्ण स्थिति

भारत के लिए भी यह स्थिति महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि चीन की तेजी से बढ़ती सैन्य और परमाणु क्षमता क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन पर असर डाल सकती है. भारत पहले से ही अपनी लंबी दूरी की मिसाइल क्षमता को मजबूत कर रहा है, लेकिन चीन की रफ्तार को रणनीतिक चुनौती माना जा रहा है. यह पूरा निर्माण सिर्फ सैन्य ढांचा नहीं, बल्कि चीन की परमाणु रणनीति को और मजबूत करने की एक बड़ी तैयारी माना जा रहा है, जिससे उसकी जवाबी हमले की क्षमता और सुरक्षित हो सके.

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