बांग्लादेश आज दुनिया की सबसे घनी आबादी वाले देशों में शामिल है. वर्ल्डोमीटर की रिपोर्ट के मुताबिक इसकी कुल आबादी करीब 17 करोड़ 66 लाख से ज्यादा है. जनसंख्या के लिहाज से यह दुनिया का आठवां सबसे बड़ा देश बन चुका है, लेकिन इस बढ़ती आबादी के बीच एक बड़ा बदलाव साफ नजर आता है और वह है हिंदू समुदाय की लगातार घटती हिस्सेदारी. आज बांग्लादेश में हिंदू आबादी कुल जनसंख्या का बहुत छोटा हिस्सा रह गई है, जबकि आजादी के समय स्थिति बिल्कुल अलग थी.
साल 2022 की जनगणना और जनसंख्या अनुमानों के अनुसार बांग्लादेश में हिंदुओं की संख्या लगभग एक करोड़ तीस लाख से डेढ़ करोड़ के बीच थी. प्रतिशत के रूप में देखें तो यह कुल आबादी का करीब 7.5 से 8 प्रतिशत ही है. यह आंकड़ा इसलिए अहम है क्योंकि 1971 में जब बांग्लादेश बना था, तब देश की लगभग 5वीं आबादी हिंदू थी.
आजादी के बाद से क्यों घटता गया हिंदू प्रतिशत
बांग्लादेश के इतिहास पर नजर डालें तो साफ दिखता है कि हिंदू आबादी का प्रतिशत हर दशक में कम होता गया. आजादी के समय जहां यह करीब 22 प्रतिशत था, वहीं कुछ ही वर्षों में यह गिरकर 13–14 प्रतिशत रह गया. इसके बाद हर जनगणना में यह आंकड़ा और नीचे आता गया. आज स्थिति यह है कि हिंदू समुदाय देश की राजनीति, प्रशासन और समाज में बहुत सीमित प्रभाव रखता है. इसके उलट मुस्लिम आबादी का प्रतिशत लगातार बढ़ता गया, जिससे धार्मिक संतुलन एकतरफा हो गया.
हिंदू आबादी घटने की सबसे बड़ी वजह
बांग्लादेश में हिंदू आबादी घटने का सबसे बड़ा कारण बड़े पैमाने पर माइग्रेशन रहा है. पिछले कई दशकों में लाखों हिंदू परिवार बांग्लादेश छोड़कर भारत चले आए. यह पलायन एक-दो साल की घटना नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चल रही प्रक्रिया है. भारत के साथ खुली सीमा, पश्चिम बंगाल और असम में पारिवारिक रिश्ते, भाषा और संस्कृति की समानता के कारण हिंदुओं के लिए भारत जाना अपेक्षाकृत आसान रहा. कई शोध बताते हैं कि औसतन हर साल दो लाख से ज्यादा हिंदू बांग्लादेश छोड़ते रहे हैं. आज भारत में रहने वाले लाखों लोग ऐसे हैं, जिनकी जड़ें बांग्लादेश में हैं.
असुरक्षा और धार्मिक उत्पीड़न की भावना
पलायन के पीछे सिर्फ आर्थिक कारण नहीं हैं, बल्कि सुरक्षा की भावना भी बड़ा मुद्दा रही है. अलग-अलग समय पर बांग्लादेश में हिंदुओं को सांप्रदायिक हिंसा, मंदिरों पर हमले, जमीन विवाद और सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ा है. 1971 के युद्ध के दौरान हिंदुओं को विशेष रूप से निशाना बनाया गया. इसके बाद 1990, 2001 और हाल के वर्षों में चुनावों या राजनीतिक अस्थिरता के समय हिंदू इलाकों में हिंसा की खबरें आती रही हैं. ऐसी घटनाओं ने हिंदू समुदाय के भीतर डर और अस्थिरता को और गहरा किया.
जन्म दर का अंतर भी बना वजह
हिंदू और मुस्लिम आबादी के बीच जन्म दर का अंतर भी जनसंख्या बदलाव का एक कारण है. शोध बताते हैं कि हिंदू परिवारों में औसतन बच्चों की संख्या मुस्लिम परिवारों की तुलना में थोड़ी कम रही है. लंबे समय में यह छोटा सा अंतर भी आबादी के प्रतिशत को प्रभावित करता है, खासकर तब जब पलायन लगातार जारी हो.
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