बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को आम चुनाव के साथ-साथ जनमत संग्रह भी होगा. नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तारीख 29 दिसंबर, 2025 है और नामांकन पत्रों की जांच 30 दिसंबर से जनवरी के बीच होगी. यहां 300 सीटों पर चुनाव होने हैं. 5 अगस्त, 2024 को शेख हसीना के तख्तापलट के बाद से बांग्लादेश में मोहम्मद युनूस की अगुवाई में अंतरिम सरकार चल रही है.

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कट्टरपंथी ताकत बांग्लादेश के भविष्य के लिए खतरा

मोहम्मद युनूस की अंतरिम सरकार ने बांग्लादेश में आम चुनाव कराने में लगभग डेढ़ साल से ज्यादा का समय ले लिया है. हालांकि अभी भी बांग्लादेश में हालात नहीं सुधरे हैं. आए दिन वहां से हिंसा, आगजनी और हिंदूओं पर अत्याचार की खबरें सामने आ रही हैं. पड़ोसी देश में इस वक्त कानून व्यवस्था सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है. कट्टरपंथी ताकतें देशभर में अपनी जड़ें जमाती जा रही हैं. यही कट्टरपंथी ताकतें ही बांग्लादेश के भविष्य के चुनाव के लिए खतरा बनकर उभर रही हैं.

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साल 2024 में जब शेख हसीना के खिलाफ बांग्लादेश में हिंसक आंदोलन हुआ तो उन्हें देश छोड़ना पड़ा. इसी दौरान जो छात्र इस आंदोलन में शामिल थे, उन छात्रों ने मिलकर एक राजनीतिक दल नेशनल सिटीजन पार्टी (NCP) का गठन किया, लेकिन अब जब चुनाव नजदीक आ रहे हैं तो एनसीपी पार्टी ने कट्टरपंथी विचारधारा वाले जमात-ए-इस्लामी के साथ हाथ मिलाने की चर्चा तेज है. इस फैसले से आहत होकर NCP के कई नेता पार्टी छोड़ रहे हैं और इस गठबंधन का विरोध कर रहे हैं. 

छात्र आंदोलन से बनी पार्टी NCP में इस्तीफों की झड़ी

जमात और एनसीपी के विचार बहुत अलग हैं. छात्र आंदोलन के समय एनसीपी ने जिन सुधारों का ऐलान किया था, उससे जमात की सोच बेहद अलग है. फिलहाल नाहिद इस्लाम एनसीपी के संयोजक हैं, जिनके ऊपर सबसे ज्यादा सवाल उठ रहे हैं. बांग्लादेश में नाहिद पर आरोप लग रहे हैं कि ये जमात-ए-इस्लामी के एजेंडा को आगे बढ़ा रहे हैं. यही कारण है कि आज एनसीपी के महफूज आलम ने भी पार्टी का साथ छोड़ने का ऐलान कर दिया है.

पार्टी के ज्वाइंट सेक्रेटरी मीर इरशादुल ने भी इस्तीफे का ऐलान कर दिया है. अब तक लगभग 30 से ज्यादा नेता पार्टी का साथ छोड़ रहे हैं. इस वजह से यह भी चर्चा हो रही है कि बीते साल जो छात्र आंदोलन हुआ था, उसका असली मकसद क्या था? क्या शेख हसीना को सत्ता से हटाना ही उस आंदोलन का एकमात्र उद्देश्य था? क्या एनसीपी से जुड़े नेताओं ने बांग्लादेश की जनता के साथ छल किया? बांग्लादेश की सियासी फिजा में ये सवाल घूम रहे हैं. 

हालांकि एनसीपी का जमात के साथ हाथ मिलाने के पीछे एक बड़ा कारण सीट शेयरिंग भी हो सकता है. एनसीपी अगर खालिदा जिया की पार्टी बीएनपी से हाथ मिलाती तो उसे सीटें बेहद कम मिलती और जमात के साथ वो ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ सकती है जिसके लिए एनसीपी अपने मुद्दों को तिलांजलि देती नजर आ रही है.

बांग्लादेश चुनाव में BNP होगी बड़ी पार्टी

ढाका के जानकारों का मानना है कि बांग्लादेश में BNP यानि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी इन चुनावों में सबसे बड़ा दल बन सकती है. पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की इस पार्टी को शेख हसीना का सबसे बड़ा सियासी दुश्मन माना जाता है. खालिदा जिया इस वक्त बीमार हैं और अस्पताल में भर्ती हैं. खालिदा के बेटे तारिक रहमान ने 17 सालों बाद बांग्लादेश वापसी की है और पार्टी का चुनावी कैंपेन संभाल रहे हैं. इस बार के आम चुनाव में वो खुद 2 सीटों से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. 

वहीं दूसरी ओर जमात ए इस्लामी भी इन चुनावों में अपने प्रत्याशी उतार रही है. शेख हसीना ने इस पार्टी पर बैन लगाया था, क्योंकि जमात कट्टरपंथ का समर्थन करने वाली पार्टी मानी जाती है. इस पार्टी की अगुवाई शफीकुर रहमान करते हैं और साल 2001-06 के बीच बीएनपी सरकार में गठबंधन का हिस्सा भी रह चुकी है.

कुल मिलाकर मुख्य तौर पर 3 दल ही बांग्लादेश में चुनावी मैदान में बड़े स्तर पर दिखाई दे रहे हैं. हालांकि बांग्लादेश की सबसे बड़ी पार्टी अवामी लीग पर चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा लेने पर प्रतिबंध लगा हुआ है. अवामी लगी शेख हसीना की पार्टी है और तख़्तापलट के बाद शेख हसीना ने देश छोड़ दिया था, लेकिन बांग्लादेश की चुनावी प्रक्रिया में शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग पर प्रतिबंध लगाने पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं. कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि बिना अवामी लीग के बांग्लादेश में चुनाव फिक्स माना जा रहा है. 

हिंदूओं पर हो रहे हमलों पर मोहम्मद युनूस चुप

वहीं बांग्लादेश के सामने चुनौती शांतिपूर्ण चुनाव कराना भी है, क्योंकि कट्टरपंथ ताकतें बांग्लादेश में आम हिंदूओं को निशाना बना रही हैं. मोहम्मद युनूस की चुप्पी पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. हाल ही में मोहम्मद युनूस ने बांग्लादेश में पाकिस्तान के उच्चायुक्त से मुलाकात की है, जिसके बाद युनूस की मंशा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं.

बांग्लादेश में 12 फरवरी को चुनाव के साथ ही जनमत संग्रह भी होना है, यानि एक दिन में 2 बार वोटिंग होगी. इन दोनों के लिए अलग अलग रंग के बैलेट पेपर का इस्तेमाल होगा. संसदीय चुनाव के लिए सफेद कागज पर काले रंग वाले बैलेट पेपर का प्रयोग होगा, वहीं जनमत संग्रह के लिए रंगीन बैलेट पेपर का सहारा लिया जाएगा. बांग्लादेश में कुल 42,761 पोलिंग सेंटर बनाए गए हैं, जिसमें 2,44,739 बूथ होंगे.

मतदान का समय सुबह 7:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक का रखा गया है. साल 2026 में होने वाले आम चुनाव में 12,76,12,384 मतदाता अपने मतों का प्रयोग करेंगे. जिसमें लगभग 6,47,60,382 पुरूष मतदाता और 6,28,50,772 महिला मतदाता शामिल हैं. लगभग 1,230 ट्रांसजेंडर मतदाता भी शामिल हैं. मतदान खत्म होने के बाद वोटों की गिनती शुरू हो जाएगी.