Baloch leader Akhtar Mengal Warn Asim Munir: बलूचिस्तान एक बार फिर पाकिस्तान के लिए चुनौती बन गया है. जहां एक ओर भारत को धमकाने की कोशिशों में पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर गीदड़भभकी दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना की असफलताएं और कमजोरी दिन-प्रतिदिन उजागर हो रही हैं.

पिछले कुछ महीनों में बलोच अलगाववादी गुटों ने पाकिस्तानी सेना पर इतने हमले किए हैं कि सेना को अपने ही देश में संघर्ष का सामना करना पड़ रहा है. इसी कड़ी में बलोच नेता अख्तर मेंगल का बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने जनरल मुनीर को साफ शब्दों में पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) की ऐतिहासिक हार की याद दिलाई.

जनरल मुनीर की धमकी और बलोच नेता का करारा जवाबजनरल मुनीर ने इस्लामाबाद में प्रवासी पाकिस्तानियों के एक सम्मेलन के दौरान बलोच अलगाववादियों को सीधे धमकी देते हुए कहा, ''बलूचिस्तान पाकिस्तान के माथे का झूमर है अगली 10 नस्लें भी इसे अलग नहीं कर पाएंगी.” उनकी इस बयानबाज़ी का जवाब बलूचिस्तान नेशनल पार्टी के नेता और पूर्व सांसद अख्तर मेंगल ने बेहद तीखे अंदाज़ में दिया. मेंगल ने कहा कि पाकिस्तानी सेना को 1971 की शर्मनाक हार और 90,000 सैनिकों के समर्पण को कभी नहीं भूलना चाहिए. उन्होंने कहा कि  90 हजार फौजियों के न सिर्फ हथियार बल्कि उनकी पतलूनें भी आज वहां टांगी हुई हैं.

पूर्वी पाकिस्तान की हार1971 के युद्ध में पाकिस्तान की हार एक ऐसा ऐतिहासिक धब्बा है जिसे देश की सेना और शासन आज भी छुपाने की कोशिश करता है. लेकिन अख्तर मेंगल जैसे नेता बार-बार इस हार की याद दिलाकर सेना के अतिवादी रवैये को चुनौती दे रहे हैं. उन्होंने अपनी रैली में कहा,“बंगालियों ने जो आपके साथ किया, वो आपको कितनी नस्ल तक याद रहेगा? उसे भी याद करो हम तो 75 साल से आपकी हर जुल्म और ज्यादती को याद करते आ रहे हैं.”

बलूचिस्तान में फौज की असफलताबलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत होने के बावजूद आर्थिक और राजनीतिक रूप से सबसे उपेक्षित रहा है. यहां दशकों से चल रहे सशस्त्र विद्रोह और मानवाधिकार उल्लंघनों ने पाकिस्तानी सेना को कमजोर किया है. पाक सेना की कई चौकियों पर बलोच विद्रोहियों ने कब्ज़ा कर लिया है.