भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने आखिरकार मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर चल रही लंबी बातचीत को पूरा कर लिया है. यह समझौता दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार बढ़ाने और आर्थिक रिश्तों को मजबूत करने के लिए अहम माना जा रहा है. दोनों पक्षों ने इस डील को संतुलित और भविष्य को ध्यान में रखकर किया गया बताया है. इसका आज औपचारिक ऐलान भी कर दिया गया है.

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एंटोनियो कोस्टा बोले- टैरिफ के खिलाफ मजबूत राजनीतिक संदेशयूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने कहा कि यह समझौता बढ़ते टैरिफ और संरक्षणवाद के खिलाफ दुनिया को एक साफ राजनीतिक संदेश देता है. उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के चलते वैश्विक स्तर पर जो अनिश्चितता बनी है, उसके बीच भारत-EU का यह कदम बेहद अहम है.

भारत-EU की नजदीकी जरूरी: कोस्टाएंटोनियो कोस्टा ने हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में कहा, 'आज की बहुध्रुवीय दुनिया में यह जरूरी है कि भारत और यूरोपीय संघ और करीब आएं. हम मिलकर अंतरराष्ट्रीय रिश्तों में स्थिरता, भरोसा और सुरक्षा देने वाले मजबूत साझेदार बन सकते हैं और नियमों पर आधारित वैश्विक व्यवस्था की रक्षा कर सकते हैं. कोस्टा गणतंत्र दिवस समारोह में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए थे.

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‘मदर ऑफ ऑल ट्रेड डील्स’ बताया जा रहा है समझौतायूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है. इस फ्री ट्रेड डील को खुद EU प्रमुख ने ‘मदर ऑफ ऑल ट्रेड डील्स’ कहा है. माना जा रहा है कि इससे खासतौर पर उन क्षेत्रों में व्यापार और निवेश बढ़ेगा, जो ट्रंप के टैरिफ से प्रभावित हुए हैं.

भू-राजनीति को स्थिर करने वाला समझौताएंटोनियो कोस्टा ने कहा कि यह व्यापार समझौता सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक तौर पर भी बेहद अहम है.उन्होंने कहा, “यह दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय नियमों पर आधारित व्यापार को कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है. यह एक मजबूत स्थिरता देने वाला समझौता है.”

‘टैरिफ नहीं, ट्रेड पर भरोसा’ का संदेशकोस्टा के मुताबिक, भारत-EU समझौता दुनिया को यह संदेश देगा कि भारत और यूरोपीय संघ टैरिफ की बजाय व्यापार समझौतों में भरोसा रखते हैं. यह ऐसे समय में हो रहा है, जब कई देश संरक्षणवाद की ओर बढ़ रहे हैं और टैरिफ बढ़ा रहे हैं.

भारत-EU व्यापार के मौजूदा आंकड़ेवित्त वर्ष 2024-25 में भारत और यूरोपीय संघ के बीच वस्तुओं का व्यापार 136.53 अरब डॉलर रहा. इसमें भारत का निर्यात 75.85 अरब डॉलर और आयात 60.68 अरब डॉलर था. सेवा क्षेत्र में 2024 में दोनों के बीच व्यापार 83.10 अरब डॉलर का रहा. किस पर कितना टैक्स लगता है?फिलहाल EU में भारतीय सामानों पर औसतन 3.8 प्रतिशत टैक्स लगता है, लेकिन श्रम आधारित क्षेत्रों में यह करीब 10 प्रतिशत तक है. वहीं भारत में EU से आने वाले सामानों पर औसतन 9.3 प्रतिशत टैक्स है. कार और उनके पुर्जों पर 35.5 प्रतिशत, प्लास्टिक पर 10.4 प्रतिशत, और केमिकल व दवाओं पर करीब 9.9 प्रतिशत शुल्क लगता है.

FTA से किन सेक्टरों को होगा फायदाजब यह फ्री ट्रेड एग्रीमेंट इस साल के अंत तक साइन हो जाएगा, तो कपड़ा, केमिकल, रत्न और आभूषण, इलेक्ट्रिकल मशीनरी, लेदर और फुटवियर जैसे श्रम आधारित क्षेत्रों के कई उत्पादों को बिना शुल्क या कम शुल्क पर व्यापार का मौका मिलेगा.