वॉशिंगटन: अमेरिका का कहना है कि वाशिंगटन के प्योंगयांग के साथ युद्ध समाप्ति घोषणापत्र पर हस्ताक्षर से पहले उत्तर कोरिया को परमाणुमुक्त हो जाना चाहिए. विदेश विभाग की प्रवक्ता हीदर नौर्ट ने बुधवार को कहा, "हमारा मानना है कि अन्य चीजों को शुरू करने से पहले उत्तर कोरिया को परमाणुमुक्त हो जाना चाहिए."
अमेरिकी मीडिया ने पहले कहा था कि कोरियाई युद्ध को औपचारिक रूप से समाप्त करने के लिए दोनों देशों के बीच मौखिक समझौता हुआ था. संयुक्त घोषणापत्र पर हस्ताक्षर के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के बीच मौखिक समझौते हुए थे. किम और ट्रंप 12 जून को सिंगापुर में मिले थे. परमाणुमुक्ति की गति और पैमाने के अलावा वाशिंगटन व प्योंगयांग युद्ध समाप्ति की घोषणा को जारी रखने पर असहमत थे.
अमेरिका पहले भी कहता रहा है कि उत्तर कोरिया से तभी कुछ बातचीत की जाएगी जब कोरिया परमाणु मुक्त करता है. इसके पहले कई बार उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच कोल्ड वॉर होता रहा है. दोनों देश एक-दूसरे को हमले की धमकी दे चुके हैं. इसके अलावा उत्तर कोरिया को परमाणु हमलें की चेतावनी दी है. उत्तर कोरिया पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं. इन प्रतिबंधों के बावजूद उसने अपने परमाणु कार्यक्रमों को नहीं रोका.
अमेरिका ने कई बार उत्तर कोरिया को चेताया और धमकी दी की उस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाएंगे. बात न बनते देख अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दोनों देशों के बीच बातचीत की बात कही. जहां जून महीने में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन से सिंगापुर में मुलाकात की थी. इस मुलाकात दौरान परमाणुमुक्ति के बारे में चर्चा की गई. वही अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने उत्तर कोरिया की तीन बार यात्रा की.
डोनाल्ड ट्रम्प ने विदेश मंत्री माइक पोम्पियो की चौथी उत्तर कोरिया की यात्रा को रद्द कर दिया. यात्रा को रद्द करने के पीछे उन्होंने कारण बताया कि परमाणु मुक्त होने की प्रक्रिया कोई सहमति नहीं बन रही है. वही अमेरिका ने स्टीफन बीगन को उत्तर कोरिया से बातचीत के लिए विशेष दूत नियुक्त किया है.
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