मिडिल ईस्ट में अमेरिका और इजरायल की तरफ से ईरान के खिलाफ शुरू हुई जंग ने दुनियाभर के मुल्कों को मुश्किल में डाल दिया है. पूरे दुनिया में ऊर्जा संकट पैदा हो गया है. तेल और नेचुरल गैस की किल्लत ने अफरा-तफरी का माहौल पैदा कर दिया है. वहीं, अब इस पर इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी ने ताजा बयान जारी किया है. 

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दुनिया का सबसे बड़ा तेल संकट: IEAएजेंसी ने इस संकट को दुनिया का सबसे बड़ा तेल संकट करार दिया है. साथ ही कहा है कि युद्ध के हालातों के चलते दुनियाभर में रोज 80 लाख बैरल कम तेल की सप्लाई होगी. IEA ने बकायदा इसको लेकर एक रिपोर्ट भी जारी की है. इसमें कहा गया है कि मार्च 2026 में दुनियाभर में तेल सप्लाई रोजाना 80 लाख बैरल से कम हो जाएगा. यह दुनिया की कुल जरूरत का करीबन 8% है. 

खाड़ी देशों ने प्रोडक्शन क्षमता को घटायायुद्ध के हालात के चलते फारस की खाड़ी वाले देशों ने अपने प्रोडक्शन क्षमता को घटा दिया है. इराक, कुवैत, कतर, यूएई और सऊदी अरब ने मिलाकर अपना प्रोडक्शन रोजाना एक करोड़ बैरल तक घटा दिया है. बुधवार को आईए ने अपने सदस्य देशों के साथ मिलकर रणनीतिक स्टॉक से 40 करोड़ बैरल तेल बाजार में उतारने का फैसला किया है. 

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कई देश पाइपलाइनों के जरिए निर्यात बढ़ा रहेIEA ने साफ कहा है कि बंद पड़ा प्रोडक्शन पहले जैसे स्तर पर लाने में हफ्तों या कुछ मामलों में महीनों का वक्त लग सकता है. सऊदी अरब और यूएई, होर्मुज को बायपास करने वाले पाइपलाइनों के रास्तों से निर्यात बढ़ा रहे हैं. IEA का अनुमान है कि अप्रैल से जून के बीच इससे आंशिक राहत मिल सकती है. लेकिन यह विकल्प भी होर्मुज का कारगर उपाय नहीं है. 

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