नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा ने एससी-एसटी संशोधन विधेयक को दलितों और वंचित समाज की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम करार दिया. उन्होंने कहा कि आज कहा कि यह तत्काल राहत वाला उपाय है और अखिल भारतीय न्यायिक सेवा व्यवस्था लागू करके ही इसका स्थायी समाधान निकाला जा सकता है.
लोकसभा में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण संशोधन विधेयक पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के नेता कुशवाहा ने कहा कि इस संशोधन की सख्त जरूरत थी. इसके बाद दलित और वंचित समाज के लोग राहत महसूस कर रहे होंगे. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ऐसी स्थिति बनी जिसकी वजह से कानून में फिर से संशोधन की जरूरत महसूस हुई. वंचित वर्ग के लोगों के दर्द पर यह संशोधन मरहम लगाने जैसा है.
कुशवाहा ने कहा कि यहां सवाल यह है कि हम दर्द पर मरहम लगाकर दर्द को दबाने का प्रयास कर रहे हैं या उसे पूरी तरह से दूर कर रहे हैं. मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री ने कहा कि यह संशोधन बीमारी का इलाज नहीं है बल्कि तत्काल राहत का उपाय है. ऐसा इसलिए है कि सरकार कोई फैसला करती है और उसके बाद अदालत का कोई फैसला आ जाता है. इसकी वजह से सरकार को फिर कोई पहल करनी पड़ती है. आंदोलन की स्थिति भी देखने को मिलती है.
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह सवाल उठा है कि क्या संसद सर्वोच्च है. इस सरकार ने यह साबित किया है कि संसद सर्वोच्च है. यही ताकत लगाकर आरक्षण में 50 प्रतिशत की सीमा को समाप्त किया जाए. आरएलएसपी नेता ने कहा कि एससी-एसटी की बात छोड़िये, उच्च न्यायापालिका में ब्राह्मण समाज से गरीब वर्ग का मेधावी बच्चा नहीं जा सकता है. उन्होंने कहा कि ऐसे में अखिल भारतीय न्यायिक सेवा की व्यवस्था को लागू किया जाए ताकि इसका स्थायी समाधान निकाला जा सके.