बांदा: बहुजन समाज पार्टी के खाते में नोटबंदी के बाद जमा हुए 104 करोड़ के खुलासे के बाद राजनीतिक दलों के अलावा सामाजिक संगठन भी मायावती पर उंगली उठाने लगे हैं. बुंदेलखंड के एक ऐसे ही संगठन 'पब्लिक एक्शन कमेटी' ने मंगलवार को कहा, "हर मामले में मायावती खुद को दलित की बेटी पेश करती हैं, लेकिन दलितों के प्रति गंभीर नहीं हैं. उन्हें यह करोड़ों रुपये गरीब दलितों के बीच बांट देना चाहिए."

गांव-देहात में एक-एक रुपये को तरस रहे लोग

गैर पंजीकृत संगठन 'पब्लिक एक्शन कमेटी' (पीएसी) की प्रमुख श्वेता ने कहा, "नोटबंदी के बाद बहुजन समाज पार्टी के खाते में जमा हुए 104.36 करोड़ रुपये का हिसाब बहुजन समाज को दिया जाना चाहिए और यह रकम उन गरीब दलितों के बीच बांट दिया जाना चाहिए, जो गांव-देहात में एक-एक रुपये को तरस रहे हैं.

बीएसपी प्रमुख मायावती पर जब भी कोई गंभीर आरोप लगता है, तभी वह खुद को दलित की बेटी बताती हैं. क्या बहुजन की बहन जी यह बता सकती हैं कि देश के और किस दलित के खाते में इतनी रकम जमा है? श्वेता केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की इस बात से सहमत हैं कि दलित होने का मतलब भ्रष्टाचार में संलिप्तता का 'लाइसेंस' नहीं है."

दलित नहीं दौलत की बेटी

अपने बयान में पीएसी प्रमुख ने कहा, "कुछ माह पूर्व बांदा जिले के ऐला गांव में भूख से हुई नत्थू दलित की मौत को राज्यसभा में मायावती ने भी मुद्दा बनाया था, लेकिन इस धनराशि का कुछ हिस्सा ही पीड़ित परिवार के पास भी पहुंचा दिया गया होता, तब भी बहन जी को दलित की बेटी मान लिया जाता. बीएसपी के खाते में जमा भारी भरकम रकम से प्रतीत होता है कि वह दलित नहीं दौलत की बेटी हैं."

गौरतलब है कि प्रवर्तन निदेशालय की जांच में नोटबंदी के बाद बीएसपी के दिल्ली के करोलबाग स्थित बैंक खाते में 104.36 करोड़ रुपये जमा किया जाना पाया गया है और मायावती ने मंगलवार को अपनी सफाई में नियमानुसार जमा करने की बात के अलावा बीजेपी पर बीएसपी के खिलाफ दुष्प्रचार करने का आरोप मढ़ा है.

मायावती खातों में आए 104 करोड़ का हिसाब दें: केशव प्रसाद मौर्य

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सांसद केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि बहुजन समाज पार्टी के खातों में नोटबंदी के तुरंत बाद जमा हुई बड़ी धनराशि एक बड़ा सवाल है और मायावती को खातों में आए 104 करोड़ रुपये का हिसाब दें. उन्होंने कहा, "अब नोटबंदी का असली कारण उजागर हुआ है. अब काली कमाई वाले लोगों के चेहरे उजागर हो रहे हैं."

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, "आज उत्तर प्रदेश की गरीब जनता और अनुसूचित वर्ग के भाई बहन मायावती से बीएसपी के खातों में नोटबंदी के बाद आए एक अरब से भी अधिक की धनराशि पर सवाल कर रहे हैं."

उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री मायावती को सवालों के घेरे में लेते हुए कहा, "जिस जनता जर्नादन को बाबा साहब के सपने दिखा कर उन्होंने (मायावती) वोटों का व्यापार कर यह अरबों की राशि एकत्रित की है, उसका हिसाब अब उत्तर प्रदेश की गरीब जनता पूछ रही है."

बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि अब लोगों को नोटबंदी के बाद मायावती के अनर्गल बयानबाजी का सच उजागर हो रहा है. उन्होंने कहा कि उनकी परेशानी का असली कारण वोटों के व्यापार से एकत्रित कालाधन है.