प्रयागराज: मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार के खिलाफ बगावत करने के बाद दिगंबर अणी अखाड़े से बर्खास्त किये गए विवादित महामंडलेश्वर कंप्यूटर बाबा की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. दिगंबर अणी अखाड़े ने कंप्यूटर बाबा समर्थकों के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमे उन्हें महामंडलेश्वर पद पर बहाल करते हुए अखाड़े में उनकी वापसी की बात कही गई थी.

प्रयागराज के कुंभ मेले में मौजूद दिगंबर अखाड़े के ज़िम्मेदार पदाधिकारियों का कहना है कि न तो कंप्यूटर बाबा ने कोई लिखित माफीनामा भेजा है और न ही उनकी वापसी के बारे में कोई चर्चा हुई हैं. इन पदाधिकारियों का यह भी दावा है कि कंप्यूटर बाबा अब खुलकर सियासत करने लगे हैं, लिहाजा अखाड़ा माफी मांगने के बावजूद फिलहाल उस पर कोई विचार नहीं करना चाहेगा.

दिगंबर अखाड़े के ज़िम्मेदार पदाधिकारियों का यह भी कहना है कि कंप्यूटर बाबा को लेकर अखाड़े में अब तक न तो कोई चर्चा हुई है और न ही अखाड़े के लोग इस बारे में फिलहाल बात करना चाहते हैं.

कंप्यूटर बाबा ने पहले ही एलान कर दिया था कि वह दस जनवरी को प्रयागराज के कुंभ मेले में आ जाएंगे. उनके करीबियों ने अखाड़े से समझौते का दावा भी किया था. ऐसे में यह अब भी सस्पेंस बना हुआ है कि कंप्यूटर बाबा कुंभ के मेले में महामंडलेश्वर के तौर पर आएंगे या फिर करोड़ों श्रद्धालुओं के बीच भीड़ का हिस्सा बनकर रह जाएंगे.

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के इंदौर के रहने वाले कंप्यूटर बाबा ने नर्मदा आंदोलन की शुरुआत कर डेढ़ साल पहले तत्कालीन शिवराज सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला था. शिवराज सरकार ने उन्हें बाद में राज्यमंत्री का दर्जा दे दिया था. बाद में उन्होंने राज्यमंत्री का पद छोड़ते हुए बगावत कर दी और कांग्रेस के पक्ष में प्रचार करने लगे थे.