नई दिल्ली: बिहार के अररिया जिले की जोकीहाट विधानसभा सीट का नतीजा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए शुभ संकेत नहीं है. आरजेडी के शहनवाज आलम ने जेडीयू के मुर्शीद आलम को करीब 41,000 वोटों से हराया. इस जीत को तेजस्वी यादव ने अवसरवाद पर लालूवाद की जीत करार दिया है. अब ऐसे में सियासी गलियारे में ये सवाल उठने लगा है कि क्या नीतीश कुमार को बीजेपी का साथ रास नहीं आ रहा है?

ये सवाल वाजिब भी है. इससे पहले अररिया लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भी नीतीश कुमार की पार्टी को मुंह की खानी पड़ी थी. सबसे खास बात ये कि दोबारा बीजेपी के साथ आने के बाद नीतीश कुमार का मुस्लिम वोट खिसकता नजर आ रहा है. अररिया में मुस्लिमों की वोटों की ठीक-ठाक संख्या है. जोकीहाट पर साल 2005 से ही जेडीयू जीतती आ रही है. लेकिन नतीजे इस बात का संकेत दे रहे हैं कि मुस्लिम जेडीयू से 'नाराज' हैं. बीजेपी पर सांप्रदायिकता फैलाने का आरोप विपक्षी दल लगाते रहे हैं. बिहार: जोकीहाट उपचुनाव में RJD की जीत, क्या नीतीश से दूर हो रहे हैं मुस्लिम?

वहीं दूसरी तरफ महागठबंधन से अलग होने के बाद से ही लगातार तेजस्वी यादव, नीतीश कुमार पर हमलावर रहे हैं. वे लगाता नीतीश कुमार पर जनादेश का अपमान करने का आरोप लगाते रहे हैं. नतीजा इस बात का भी संकेत है कि तेजस्वी यादव लोगों को ये समझाने में कामयाब रहे हैं. ये नतीजे इस बात को भी दर्शाते हैं कि लालू यादव की सोशल इंजीनियरिंग के सामने नीतीश कुमार पस्त हो गए हैं.

क्यों हुआ जोकीहाट चुनाव?

जोकीहाट विधानसभा सीट स्थानीय JDU विधायक सरफराज आलम के इस्तीफे से खाली हुई. दरअसल, सरफराज आलम अपने पिता तस्लीमुद्दीन के निधन के बाद JDU से इस्तीफा देकर आरजेडी में शामिल हुए और इसी पार्टी से अर​रिया से सांसद चुने गए, जो उनके पिता के निधन से खाली हुई थी.

जोकीहाट से आरजेडी ने सरफराज के भाई शाहनवाज को मैदान में उतारा. दूसरी तरफ जेडीयू के मोहम्मद मुर्शीद आलम ने एनडीए के प्रत्याशी के तौर पर अपना भाग्य आजमाया. शहनवाज और मुर्शिद के अलावा मधेपुरा से आरजेडी से निष्कासित सांसद पप्पू यादव की जनाधिकार पार्टी के उम्मीदवार गौसुल आजम भी मैदान में थे. मुर्शीद आलम पर सात आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिसमें एक गैंगरेप का मामला भी शामिल है. एक अन्य केस में पुलिस ने मंदिर से चोरी की गई मूर्ति को भी उनके घर से बरामद किया है.